*भगत सिंह के विचारों से गूंजा कुरुक्षेत्र, वीरांगनाओं और पूर्व सैनिकों को मिला सम्मान
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*पंजाबी बिरादरी महासभा ने मनाया शहीद-ए-आजम का 119वां जन्मदिवस, बच्चों की देशभक्ति प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कुरुक्षेत्र, 27 सितंबर (सोनिका वधवा)।
शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती पर रविवार को कुरुक्षेत्र में देशभक्ति, सम्मान और राष्ट्रसेवा का अनूठा संगम देखने को मिला। पंजाबी बिरादरी महासभा (रजि.) कुरुक्षेत्र की ओर से अमीन रोड स्थित ब्रह्मानंद कॉलोनी की वात्सल्य वाटिका में भगत सिंह का 119वां जन्मदिवस श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। समारोह का प्रमुख आकर्षण देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों की वीरांगनाओं और पूर्व सैनिकों का सम्मान रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ महासभा के पदाधिकारियों, सदस्यों, पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों ने भगत सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया। वात्सल्य वाटिका के संचालक स्वामी हरिओम दास परिव्राजक ने अतिथियों का स्वागत किया।
समारोह में वक्ताओं ने भगत सिंह के जीवन, विचारों, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण को याद करते हुए युवा पीढ़ी से उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। पूर्व सैनिकों ने कहा कि देशभक्ति केवल भावना तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि प्रत्येक नागरिक को अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।
बच्चों की प्रस्तुतियों ने जगाया देशभक्ति का जज्बा
वात्सल्य वाटिका के बच्चों ने देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर शहीद भगत सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित किए। बच्चों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को भावविभोर कर दिया। वहीं डॉ. मुनीश कुकरेजा ने बांसुरी की सुमधुर धुन पर देशभक्ति गीतों की संगीतमय प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरीं।
वक्ताओं ने विद्यार्थियों को किताबों से मित्रता करने, बुरी संगति से दूर रहने और जीवन में उच्च आदर्श अपनाने के लिए प्रेरित किया। समारोह में उपस्थित लोगों ने भगत सिंह के विचारों से प्रेरणा लेते हुए देश और समाज के हित में सदैव आगे रहने का संकल्प लिया।
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शहीदों की वीरांगनाओं के सम्मान से भावुक हुआ माहौल
समारोह का सबसे भावपूर्ण क्षण शहीदों की वीरांगनाओं के सम्मान का रहा। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में वीरगति को प्राप्त पंजाब रेजिमेंट के लांस नायक सेवा सिंह (सेना मेडल) की धर्मपत्नी हरभजन कौर, सिख रेजिमेंट के हवलदार बलवंत सिंह की धर्मपत्नी सुरजीत कौर तथा पंजाब रेजिमेंट के नायक अमरिक सिंह की धर्मपत्नी सुरजीत कौर को शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
इसके अलावा वर्ष 1995 में जम्मू-कश्मीर में 'ऑपरेशन रक्षक' के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले पंजाब रेजिमेंट के हवलदार लखविंदर सिंह (शौर्य चक्र) की धर्मपत्नी सुखविंदर कौर, वर्ष 1988 में श्रीलंका में 'ऑपरेशन पवन' के दौरान शहीद हुए सिख रेजिमेंट के सिपाही सुखदेव सिंह की धर्मपत्नी दलजीत कौर और वर्ष 2003 में 'ऑपरेशन रहिनो' में वीरगति पाने वाले पंजाब रेजिमेंट के सिपाही पिंदर पाल सिंह की धर्मपत्नी गुरमीत कौर को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
पूर्व सैनिकों को भी मंच पर मिला सम्मान
कार्यक्रम में सेना से सेवानिवृत्त वरिष्ठ सैन्य अधिकारी एवं पूर्व सैनिक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। पंजाबी बिरादरी महासभा ने सिख रेजिमेंट के कप्तान गुरमेल सिंह, पंजाब रेजिमेंट के सूबेदार मेजर रविंदर कौशिक, कप्तान नरेंद्र पाल चीमा, नायब सूबेदार दलजीत पटिआल तथा जिला सैनिक बोर्ड कुरुक्षेत्र के सूबेदार आर.आर. शर्मा को मंच पर सम्मानित किया।
इस अवसर पर पंजाबी बिरादरी महासभा के प्रधान आशीष सभरवाल, वरिष्ठ उपप्रधान पंकज अरोड़ा, महासचिव फतेहचंद गांधी, कोषाध्यक्ष डॉ. राजेश वाधवा, रेनू खुगर, विनीत बजाज, सुनील मुंजाल, राकेश अरोड़ा, ललित चावला, कृष्ण धमीजा, राजेश अरोड़ा, राजेंद्र लोटा, राम कुमार सेठी, दीपक सेठी, सुरिंदर गाबा, निश्चल दीप ढींगरा और रविंदर सहित बड़ी संख्या में बिरादरी के सदस्य एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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वीरांगनाओं को सम्मान देकर शहीदों के बलिदान को किया नमन
पंजाबी बिरादरी महासभा ने समारोह के माध्यम से शहीद भगत सिंह को श्रद्धांजलि देने के साथ उन परिवारों के प्रति भी कृतज्ञता प्रकट की, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्रियजनों का सर्वोच्च बलिदान दिया। छह वीरांगनाओं को शॉल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। सम्मान के दौरान पूरा सभागार देशभक्ति के भाव से सराबोर नजर आया। महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि शहीदों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।