*नलवी में 12 फीट नीचे मिला पुराना ढांचा, ग्रामीणों ने गोगामेड़ी से जोड़ा
-------------
छोटी ईंटों और चूने से बनी दीवारें मिलीं; वर्षों पुरानी लोकमान्यता के बाद ग्रामीणों ने शुरू कराया गोगामेड़ी का निर्माण
कुरुक्षेत्र, 27 सितंबर (सोनिका वधवा)। शाहाबाद क्षेत्र के गांव नलवी में वर्षों से बुजुर्गों के बीच चली आ रही एक लोकमान्यता ने उस समय ग्रामीणों की उत्सुकता बढ़ा दी, जब एक खेत में करीब 12 फीट की खुदाई के दौरान जमीन के नीचे छोटी ईंटों और चूने की चिनाई से बना पुराना ढांचा सामने आया। यह ढांचा एयरफोर्स से सेवानिवृत्त कॉरपोरल तारा सिंह के खेत में पीपल के पेड़ के पास मिला है।
खुदाई के दौरान करीब एक फीट चौड़ी और तीन फीट लंबी एक अन्य संरचना भी सामने आई है। ग्रामीण इसे गोगाजी की पुरानी गोगामेड़ी से जोड़ रहे हैं। हालांकि ढांचे की वास्तविक उम्र, निर्माण काल और मूल उपयोग को लेकर अभी किसी पुरातात्विक संस्था की जांच नहीं हुई है। ग्रामीण इसे करीब 150 से 200 वर्ष पुराना मान रहे हैं, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ढांचा मिलने के बाद ग्रामीणों ने यहां नई गोगामेड़ी का निर्माण शुरू कर दिया है। इसके लिए ग्रामीण राजस्थान के बागड़ क्षेत्र स्थित गोगाजी धाम से निशान के रूप में दो ईंटें भी लेकर आए हैं। खेत तक जाने वाले रास्ते को भी पक्का किया जा रहा है।
7 फीट पर दिखी दीवार, 12 फीट तक हुई खुदाई
तारा सिंह के मुताबिक वीरवार को गांव के कई लोगों ने पीपल के पेड़ के पास खुदाई शुरू की। करीब सात फीट की गहराई पर छोटी ईंटों से बनी चारदीवारी दिखाई दी। ईंटों की चिनाई में सीमेंट के बजाय चूने का इस्तेमाल नजर आया। इसके बाद खुदाई करीब 12 फीट तक की गई।
इस दौरान लगभग सात फीट चौड़े और 12 फीट लंबे कमरे जैसी संरचना के बीच करीब एक फीट चौड़ी और तीन फीट लंबी आकृति मिली। चारों ओर की दीवारों में कोष्ठक या खांचे भी बने हुए हैं। ग्रामीण इसकी निर्माण शैली और छोटी ईंटों को देखकर इसे पुराना ढांचा बता रहे हैं।
बॉक्स
बुजुर्गों से सुनते आए थे—पुल के पास दबी है गोगामेड़ी
गांव निवासी मनजीत ने बताया कि गांव के बुजुर्ग वर्षों से कहते आए हैं कि पुल के आसपास किसी खेत में पुरानी गोगामेड़ी जमीन के नीचे दबी हुई है। हालांकि किसी को इसकी सही जगह की जानकारी नहीं थी।
इलाका बाढ़ प्रभावित होने के कारण भी यहां पहले गहरी खुदाई नहीं की गई। अब तारा सिंह के खेत में पीपल के पास पुराना निर्माण निकलने के बाद ग्रामीणों में वर्षों पुरानी इस मान्यता को लेकर दिलचस्पी बढ़ गई है। आसपास के क्षेत्रों से भी लोग यहां पहुंच रहे हैं।
बॉक्स
30 साल से खेत में खेती कर रहा परिवार
74 वर्षीय तारा सिंह ने बताया कि उनका परिवार करीब 30 वर्षों से इस जमीन पर खेती कर रहा है। उनका परिवार विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत आया था और बाद में नलवी में करीब 10 एकड़ जमीन खरीदकर खेती शुरू की।
तारा सिंह वर्ष 1996 में एयरफोर्स से सेवानिवृत्त हुए और इसके बाद खेती करने लगे। उनके मुताबिक गांव के लोग पहले भी खेत में गोगामेड़ी होने की बात कहते थे, लेकिन उन्हें इस पर विश्वास नहीं था। हालांकि पीपल के पेड़ के आसपास का कुछ हिस्सा उन्होंने खाली छोड़ रखा था और वहां फसल नहीं बोते थे। कई लोग यहां आकर पीपल के पास दीया भी जलाते थे।
तारा सिंह ने बताया कि खेत सड़क के स्तर से करीब पांच से छह फीट नीचे है। टांगरी नदी में ज्यादा पानी आने पर यहां करीब छह फीट तक पानी भर जाता है। इसके बावजूद इतने वर्षों में जमीन के नीचे दबा ढांचा सामने नहीं आया था।
बॉक्स
परिवार ने परेशानियों के बाद बनाया था पीपल तक रास्ता
तारा सिंह के अनुसार करीब दो वर्ष पहले परिवार में स्वास्थ्य संबंधी और दूसरी परेशानियां बढ़ी थीं। उस समय कुछ ग्रामीणों ने उन्हें पीपल के पेड़ तक आने-जाने के लिए रास्ता छोड़ने की सलाह दी और इसे गोगामेड़ी की मान्यता से जोड़ा।
इसके बाद परिवार ने पीपल वाले हिस्से तक कच्चा रास्ता बना दिया। तारा सिंह का कहना है कि इसके बाद परिवार की परिस्थितियों में सुधार हुआ। परिवार इसे अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार गोगाजी की कृपा मानता है। बाद में उन्होंने इस रास्ते को पक्का कराने का निर्णय लिया।
बॉक्स
करीब 20 दिन पहले मांगी थी खुदाई की अनुमति
गोगामेड़ी के सेवादार सतपाल कश्यप के अनुसार करीब 20 दिन पहले उन्होंने अपने साथी सतनाम को तारा सिंह के पास भेजकर पीपल के पास खुदाई की अनुमति मांगी थी। पहली बार इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। पिछले सप्ताह दोबारा अनुमति मांगी गई, जिसके बाद तारा सिंह तैयार हो गए।
सतपाल का दावा है कि उन्हें सपने में पीपल के आसपास पुरानी गोगामेड़ी होने का आभास हुआ था। खुदाई से पहले चार ईंटें रखी गईं और उसी स्थान पर बाद में पुरानी संरचना मिली। ग्रामीण इसे अपनी धार्मिक मान्यता के अनुसार गोगाजी से जोड़ रहे हैं। इन दावों की स्वतंत्र या वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है।
बॉक्स
बागड़ से लाए ईंटों का जोड़ा, जुटने लगे श्रद्धालु
पुराना ढांचा मिलने के बाद ग्रामीण राजस्थान के बागड़ क्षेत्र से गोगाजी धाम की दो ईंटें निशान के रूप में लेकर आए। अब यहां गोगामेड़ी का निर्माण कराया जा रहा है। पास में धूना भी स्थापित किया गया है।
सेवादार सतपाल कश्यप के अनुसार सुबह-शाम ग्रामीण यहां सेवा और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं, जबकि दिन में आसपास तथा दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग दर्शन के लिए आ रहे हैं।
बॉक्स
पुराने इतिहास से भी जोड़ रहे ग्रामीण
ग्रामीण नलवी के इतिहास को लेकर अलग-अलग मान्यताएं बताते हैं। सेवादार सतपाल कश्यप के मुताबिक कुछ ग्रामीण गांव का संबंध पुराने नलवागढ़ अथवा नालागढ़ क्षेत्र से जोड़ते हैं। राजा नल और पुराने तालाब से संबंधित लोककथाएं भी गांव में प्रचलित हैं।
इन्हीं कथाओं के आधार पर कुछ लोग मिले ढांचे को राजा नल के समय से जोड़ रहे हैं, जबकि कुछ इसे ब्रिटिश काल का निर्माण मान रहे हैं। इन दोनों दावों के समर्थन में फिलहाल कोई आधिकारिक पुरातात्विक प्रमाण सामने नहीं आया है।
बॉक्स
पुरातात्विक जांच से खुल सकता है रहस्य
जमीन से मिले ढांचे की वास्तविक उम्र और ऐतिहासिक महत्व का पता विशेषज्ञ पुरातात्विक जांच से ही लगाया जा सकता है। ईंटों के आकार, चूने की चिनाई, निर्माण शैली, मिट्टी की विभिन्न परतों और आसपास मिलने वाले अन्य अवशेषों के अध्ययन से इसके निर्माण काल और मूल उपयोग के बारे में अधिक ठोस जानकारी मिल सकती है।
फिलहाल ग्रामीणों की ओर से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से औपचारिक सर्वे कराने की मांग नहीं की गई है। ऐसे में वर्षों से गांव में चली आ रही लोकमान्यता और जमीन के नीचे मिले इस पुराने निर्माण के बीच वास्तविक संबंध क्या है, यह विशेषज्ञ जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।