सुरावली में ‘मोक्ष’ के लिए भी जमीन नहीं! गाँव से 5 किलो मीटर दूर किया गया अंतिम संस्कार Dio Jalaun DM Jalaun District Magistrate/District Election Officer, Jalaun
जिंदगी गांव में गुजरी, मगर अंतिम विदाई के लिए भी गांव में जगह नहीं मिली; बारिश ने बढ़ाई दुखी परिवार की मुश्किलें
माधौगढ़ जालौन ।
ब्लॉक माधोगढ़ अतर्गत ग्राम पंचायत सुरावली में विकास की कहानी का ऐसा पन्ना खुला कि पढ़कर सवाल उठना लाजिमी है—गांव में जीने के लिए जगह है, लेकिन मरने के बाद दो गज जमीन भी नहीं! गुरुवार सुबह करीब आठ बजे 75 वर्षीय राम बटई पुत्र पहलवान कोटेदार की अंतिम यात्रा की तैयारी हुई तो अंत्येष्टि स्थल की कमी ने परिजनों और ग्रामीणों को परेशान कर दिया। ऊपर से बारिश ने व्यवस्था की परीक्षा ले ली। आसमान से पानी बरसता रहा और ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए सूखी जमीन तलाशते रहे। गांव में अंत्येष्टि स्थल होता तो अंतिम यात्रा को भी गांव की सीमा पार करने की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन यहां तो मोक्ष की राह भी माधौगढ़ होकर निकली। ग्रामीणों में इस बात को लेकर खासा रोष रहा। देवेंद्र उपाध्याय, संतराम, संतोष, राहुल, राजू, गजेंद्र, पिंटू, आकाश, मुन्ना बाबू, रन सिंह, भगीरथ, चंद्रशेखर मिश्रा और मेक सिंह समेत ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि गांव में विकास के दावे खूब सुनाई देते हैं, लेकिन जरूरत के वक्त सुविधाएं ढूंढे नहीं मिलतीं। मामला बढ़ता देख तहसीलदार गौरव कुमार ने मोर्चा संभाला और ग्रामीणों को आश्वासन दिया। इसके बाद राम बटई का अंतिम संस्कार माधौगढ़ में कराया गया। अब ग्रामीणों का सवाल सीधा है—जब गांव में सड़क, नाली और विकास की बातें हो सकती हैं, तो अंतिम संस्कार के लिए दो गज जमीन क्यों नहीं? रामबटई की अंतिम यात्रा ने सुरावली की व्यवस्था से यही कड़वा सवाल पूछ दिया है।
Jalaun, Jalaun | Sep 3, 2026