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अति गंभीर कुपोषित नवजात शिशु के सफल उपचार की कहानी समय पर पहचान, त्वरित रेफरल और समन्वित उपचार से नवजात को मिला नया जीवन -- कलेक्टर महोदया श्रीमती जमुना भिड़े के मार्गदर्शन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. अनिल झामनानी तथा खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) डॉ. रमेश मलारिया के निर्देशन में निवाड़ी क्षेत्र में RBSK टीम द्वारा नियमित स्वास्थ्य सेवाएं एवं भ्रमण किया जा रहा है। इसी क्रम में HBNC के अंतर्गत आशा कार्यकर्ता श्रीमती प्रीति दुबे द्वारा ग्राम मुड़ारा निवासी श्री सुनील कुशवाह एवं श्रीमती सरोज के 15 दिन के नवजात शिशु के संबंध में RBSK टीम को जानकारी दी गई। जानकारी प्राप्त होते ही RBSK टीम की डॉ. नेहा ठाकुर एवं डॉ. स्वतंत्र खरे द्वारा तत्काल बच्चे के घर पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। परीक्षण के दौरान नवजात में अति गंभीर कुपोषण (Severe Acute Malnutrition) की स्थिति पाई गई। बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल उच्च स्तरीय उपचार की आवश्यकता थी। टीम द्वारा बिना विलंब किए बच्चे को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) रेफर किया गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सर्वेश पांडे द्वारा बच्चे की विस्तृत जांच एवं आवश्यक उपचार किया गया। बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज, दतिया रेफर किया गया। एम्बुलेंस के माध्यम से बच्चे को दतिया मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया, जहां उसे SNCU (Special Newborn Care Unit) में भर्ती कर विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में आवश्यक उपचार, पोषण प्रबंधन एवं समुचित देखभाल प्रदान की गई। SNCU में लगभग एक माह तक चिकित्सकीय निगरानी एवं उपचार के बाद बच्चे के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ। उपचार के दौरान बच्चे का वजन 1.7 किलोग्राम से बढ़कर लगभग 3 किलोग्राम हो गया। स्वास्थ्य में संतोषजनक सुधार के बाद बच्चे को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आगे की देखभाल एवं नियमित फॉलो-अप के लिए परिजनों को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया। यह सफलता कलेक्टर महोदया श्रीमती जमुना भिड़े के मार्गदर्शन, स्वास्थ्य विभाग की सतत निगरानी, HBNC के माध्यम से आशा कार्यकर्ता की सजगता, RBSK टीम की तत्परता, समय पर रेफरल तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों के समन्वित प्रयासों का उत्कृष्ट उदाहरण है। ग्राम मुड़ारा निवासी श्री सुनील कुशवाह एवं श्रीमती सरोज के नवजात शिशु की समय पर पहचान कर उसे उचित उपचार उपलब्ध कराया गया, जिससे उसके स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ। यह प्रकरण दर्शाता है कि समय पर कुपोषण की पहचान, त्वरित रेफरल और समन्वित उपचार से गंभीर रूप से प्रभावित नवजात के जीवन को सुरक्षित किया जा सकता है। Directorate of Health Services, Madhya Pradesh Department Of Women Child Development, Madhya Pradesh Jansampark Madhya Pradesh #JansamparkMP #niwari - Niwari News