*भरमौर से शुरू हुई ‘ग्रामीण क्रांति’, किसानों की आय 5 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य*
*पाइन ग्रीन एग्रो फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने शुरू किया ग्रामीण मार्ट, जैविक खेती और बेहतर बाजार व्यवस्था पर रहेगा फोकस*
हिमाचल 84 टीवी ब्यूरो भरमौर,
जनजातीय क्षेत्र में किसानों की आर्थिक समृद्धि और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए पाइन ग्रीन एग्रो फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (एफपीसी) ने "पाइन ग्रीन फार्मर्स ग्रामीण मार्ट" का शुभारंभ किया। सावनपुर स्थित राधा स्वामी सत्संग भवन के समीप आयोजित कार्यक्रम में कृषि, शिक्षा और ग्रामीण विकास से जुड़े विशेषज्ञों ने किसानों को संगठित होकर खेती को लाभकारी व्यवसाय के रूप में अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. केहर सिंह, वैज्ञानिक (सिल्वीकल्चर), ने कहा कि वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से किसानों की उत्पादकता और आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने किसानों को जैविक खेती और टिकाऊ कृषि मॉडल अपनाने की सलाह दी।
विशिष्ट अतिथि डॉ. शिव राज, एसोसिएट प्रोफेसर, एवं स्मार्ट विलेज यूथ क्लब के संस्थापक ने कहा कि ग्रामीण विकास का वास्तविक आधार शिक्षा, कौशल विकास और स्थानीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग है। उन्होंने युवाओं से कृषि आधारित उद्यमिता को अपनाकर रोजगार के नए अवसर सृजित करने का आह्वान किया।
कंपनी के अध्यक्ष मेद सिंह ने बताया कि एफपीसी का लक्ष्य छोटे और सीमांत किसानों को संगठित कर उनकी वार्षिक आय पांच लाख रुपये से अधिक तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से किसान बिचौलियों पर निर्भरता कम कर अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। ग्रामीण मार्ट किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनेगा।
उन्होंने बताया कि कंपनी किसानों को आधुनिक खेती का प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण बीज एवं कृषि उपकरण, सरकारी योजनाओं की जानकारी, फसलों की बेहतर मार्केटिंग, डेयरी और बागवानी गतिविधियों में सहयोग उपलब्ध कराएगी। साथ ही कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और तकनीकी सहायता जैसी सुविधाओं के विकास पर भी कार्य किया जाएगा।
कंपनी के अनुसार किसान सदस्य और शेयरधारक बनकर संस्था के विकास और लाभ में भागीदारी कर सकते हैं। सामूहिक खरीद से लागत में कमी आएगी, सरकारी योजनाओं तक पहुंच आसान होगी और भविष्य में लाभांश का लाभ भी प्राप्त होगा।
कार्यक्रम में मौजूद किसानों, बागवानों, स्वयं सहायता समूहों और युवाओं ने इस पहल को क्षेत्र की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नई दिशा देने वाला कदम बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भरमौर में जैविक खेती, किसान सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास की नई संभावनाओं का द्वार खोल सकती है।