पत्रकारों को डिटेन करके सरकार आखिर कौन-सा संदेश देना चाहती है?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की कवरेज के दौरान वरिष्ठ पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा जी को डिटेन किए जाने की खबर पर सरकार और दिल्ली पुलिस को जवाब देना चाहिए।
क्या अब लोकतंत्र में सच दिखाना और सत्ता से सवाल पूछना भी गुनाह बन गया है?
सरकार याद रखे—पत्रकारों का काम सत्ता की वाहवाही करना नहीं, बल्कि जनता के सवालों को सत्ता तक पहुँचाना है। अगर पत्रकारों को अपना काम करने से रोका जाता है, तो यह प्रेस की स्वतंत्रता, प्रशासन की जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मैं साफ कहना चाहता हूँ—डर और दबाव से न सवाल खत्म होंगे, न जनता की आवाज़ दबेगी!
सरकार बताए:
- प्रज्ञा मिश्रा जी को किस कानूनी आधार पर डिटेन किया गया?
- क्या उन्हें पत्रकारिता का दायित्व निभाने से रोकना उचित था?
- क्या सरकार और प्रशासन इन सवालों का स्पष्ट जवाब देने को तैयार हैं?
लोकतंत्र किसी सरकार की जागीर नहीं है। सत्ता आती-जाती रहती है, लेकिन संविधान, नागरिकों के अधिकार और प्रेस की स्वतंत्रता सर्वोपरि हैं।
सवालों से मत डरिए, जवाब दीजिए!
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Budaun, Budaun | Oct 11, 2026