50 दिन तक मौत से लड़ता रहा नवजात, मेडिकल कॉलेज रायगढ़ के डॉक्टरों ने बचाई जिंदगी
उम्मीद छोड़ चुके माता-पिता को स्वस्थ शिशु सौंपा, चिकित्सकों की सेवा भावना बनी मिसाल
33 सप्ताह में जन्मे 1.7 किलो के गंभीर नवजात का निःशुल्क हुआ सफल उपचार
स्व.श्री लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति शासकीय चिकित्सालय, रायगढ़ के चिकित्सकों ने सेवा, समर्पण और मानवीय संवेदनाओं की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने एक नन्ही जिंदगी को नया जीवनदान दिया। जूटमिल निवासी दंपति श्री ललित एवं श्रीमती सुगंधी के समयपूर्व जन्मे गंभीर रूप से बीमार नवजात को 50 दिनों तक चले जटिल उपचार के बाद स्वस्थ अवस्था में उनके परिजनों को सौंप दिया गया। गर्भावस्था के मात्र 33वें सप्ताह में जन्मा यह शिशु केवल 1.7 किलोग्राम वजन का था। जन्म के तुरंत बाद उसे गंभीर श्वसन संबंधी परेशानी होने लगी और पहले ही दिन से बार-बार दौरे पड़ने लगे। जांच में फेफड़ों में रक्तस्राव, गंभीर संक्रमण (सेप्सिस) और निमोनिया जैसी जटिल बीमारियों का पता चला। स्थिति अत्यंत गंभीर होने के कारण नवजात को तत्काल नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में भर्ती कर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।
उपचार के दौरान चिकित्सकों ने शिशु को कई बार रक्त और प्लाज्मा चढ़ाया। संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए व्यापक स्तर पर एंटीबायोटिक और एंटीफंगल दवाओं का उपयोग किया गया। लगातार चिकित्सकीय निगरानी और उपचार के बाद शिशु की स्थिति में सुधार होने लगा। इसके बाद उसे वेंटिलेटर से हटाकर नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन (एनआईव्ही) पर लाया गया। भर्ती अवधि के दौरान हुए कोलेस्टेटिक पीलिया का भी सफलतापूर्वक उपचार किया गया। बाल्य एवं शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मणेश्वर कुमार सोनी ने बताया कि उपचार के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब शिशु की हालत अत्यंत गंभीर हो गई थी। परिस्थितियां इतनी चुनौतीपूर्ण थीं कि माता-पिता ने भी उम्मीद लगभग छोड़ दी थी और अस्पताल आना बंद कर दिया था। लेकिन एनआईसीयू की टीम ने हार नहीं मानी और पूरे समर्पण के साथ उपचार जारी रखा। धीरे-धीरे शिशु ने दूध लेना शुरू किया, उसका वजन बढ़ा और सामान्य गतिविधियां विकसित होने लगीं। पूरे उपचार के दौरान शिशु 23 दिन वेंटिलेटर और 17 दिन ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहा। करीब 50 दिनों तक चिकित्सकों, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ ने दिन-रात उसकी निगरानी कर उपचार किया। अंततः शिशु पूरी तरह स्थिर, दौरे-मुक्त और सामान्य ऑक्सीजन स्तर के साथ स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज किया गया।
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42 views | Raigarh, Chhattisgarh | Jun 26, 2026