पुलिस कंट्रोल रूम भिण्ड में मिशन वात्सल्य और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत कार्यशाला सह समन्वय बैठक हुई आयोजित
कलेक्टर भिण्ड के मार्गदर्शन एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री महेंद्र सिंह अंब और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री प्रदीप पटेल के समन्वय से पुलिस कंट्रोल रूम भिण्ड में मिशन वात्सल्य और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, सपोर्ट पर्सन और बाल देखरेख संस्थाओं के प्रतिनिधियों की कार्यशाला सह समन्वय बैठक का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में महिला एवं बाल विकास विभाग से बाल संरक्षण अधिकारी अजय सक्सेना, बाल कल्याण समिति के पदाधिकारी में अध्यक्ष अनुजकांत उदैनिया, श्रीमती सीमा शर्मा सदस्य, इंद्रजीत शर्मा सदस्य, सपोर्ट पर्सन, विशेष किशोर पुलिस इकाई शाखा से मुन्ना सिंह नरवरिया, योगेंद्र बब्बर, जिला अंतर्गत समस्त पुलिस थानों में बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, बाल देखरेख संस्थाओं के प्रतिनिधि शिशु गृह, बालगृह उपस्थित रहे।
कार्यशाला में बाल संरक्षण अधिकारी अजय सक्सेना द्वारा किशोर न्याय अधिनियम एवं पाक्सो अधिनियम के संबंध में विस्तार से चर्चा की और बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों को दायित्वों के बारे में अवगत कराया, स्पष्ट किया गया कि कोई भी पाक्सो पीड़ित यात्रा के समय को छोड़कर 24 घंटे के अंदर बाल कल्याण समिति के समक्ष अनिवार्यता प्रस्तुत हो यह कानून की बाध्यता है इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही क्षम्य नहीं है, साथ यह भी स्पष्ट किया गया कि बालक के मामले में किसी भी बालक को पुलिस थाने में रात्रि में ना रोका जाए, सभी बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों से अपेक्षा की गई की पोक्सो की प्रकरण में पीड़ित व्यक्ति को प्रकरण के संबंध में समस्त जानकारी यथा उसकी मेडिकल रिपोर्ट, विवेचना अधिकारी की जानकारी, उसके वरिष्ठ अधिकारी की जानकारी संपर्क सूत्र सहित उपलब्ध कराई जावे, यह पीड़ित का अधिकार है, साथ ही पोक्सो विक्टिम को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत कर उसके साथ सपोर्ट पर्सन की नियुक्ति करवाई जावे।
सपोर्ट पर्सन का यह दायित्व है कि वह पीड़ित व्यक्ति के प्रकरण के संबंध में समुचित पात्रता अनुसार व्यक्ति को विभिन्न योजनाओं से सलग्न कर लाभ दिलाए।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष अनुजकांत उदैनिया एवं अन्य सदस्य श्रीमती सीमा शर्मा और इंद्रजीत शर्मा के द्वारा स्पष्ट किया गया कि जिला अंतर्गत अभी भी पाक्सो के समस्त प्रकरण बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जा रहे हैं। उक्त संबंध में भी कार्यवाही की आवश्यकता है। आगे बाल संरक्षण अधिकारी द्वारा स्पष्ट किया गया के दत्तक ग्रहण के प्रकरण में भी बालक बालिका के मिलने पर दो माह तक ही पुलिस की रिपोर्ट का इंतजार किया जाता है यदि रिपोर्ट नहीं मिले तो यह माना जाता है कि पुलिस द्वारा रिपोर्ट दे दी गई है और बालक को लीगल फ्री कर दिया जाता है।
उक्त संबंध में भी निर्देशानुसार कार्रवाई अपेक्षित है जिससे दत्तकग्रहण के बाद किसी विषम परिस्थिति का सामना न करना पड़े। आयु परीक्षण के संबंध में श्री सक्सेना द्वारा स्पष्ट किया गया कि किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 के तहत सर्वप्रथम मैट्रिकुलेशन की या समकक्ष की मार्कशीट, उसके ना मिलने पर स्थानीय निकाय द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र और उन दोनों की अनुपलब्धता होने पर ही अस्थि परीक्षण के विषय में आदेश कराया जा सकता है।
कार्यशाला में विभिन्न बाल कल्याण अधिकारियों द्वारा क्षेत्र अंतर्गत आने वाली बालिकाओं के पुनर्वास के संबंध में भी जिज्ञासा की इसके संबंध में स्पष्ट किया गया कि हर व्यक्ति जिसने अभी 18 वर्ष की आयु पूर्ण नहीं किया चाहे वह बालक हो या बालिका कानून में बालक समझ जाएगा और बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, महिला एवं बाल विकास विभाग 18 वर्ष तक के आयु के बालकों के संरक्षण पोषण और पुनर्वास के लिए पूरी तरीके से संकल्पित है इसी के साथ-साथ पुलिस के कार्य व्यवहार में संवेदनशीलता पर भी चर्चा की गई आपका भाव विचार, बात करने का तरीका पीड़ित व्यक्ति को सहज कर सकता है, और उचित शब्दावली प्रयोग करने पर जोर दिया गया।
जैसे अपराध को विधि विरुद्ध कृत्य, पकड़ना को अभिरक्षा में लेना, बालक को ईश्वरीय सर्वोत्तम कृति समझकर कार्य करना।कार्यशाला में सभी प्रतिभागियों को अधिनियम के संबंध में प्रशिक्षण किट उपलब्ध कराई गई। बाल विवाह के प्रकरण में भी आयु परीक्षण के संबध में स्पष्ट किया गया कि आधार आयु का प्रमाण नहीं है अपितु मैट्रिकुलेशन, जन्मप्रमाण पत्र और अंतिम समाधान के रूप में अस्थि परीक्षण का प्रयास किया जा सकता है।
सभी देखरेख और संरक्षण के जरूरतमंद और विधि विवादित बालकों की पहचान हमेशा गोपनीय रहनी चाहिए।, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 लोगों को सभी थानों तक प्रसारित कराया गया और पाक्सो, बालविवाह संबंधी पोस्टर भी प्रसारित किये गए।
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