खेलेंगे बच्चे तो नशे से रहेंगे दूर, फिर क्यों बिलासपुर के खिलाड़ियों को घर बैठने को कहा जा रहा? DC Bilaspur HP
न खेल किट, न बेहतर मैदान! बिलासपुर खेल छात्रावास की बदहाली पर उठे सवाल
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बिलासपुर। राज्य खेल छात्रावास में रह रहे खिलाड़ियों की मूलभूत सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर भी खेल मैदान की सफाई और बच्चों के लिए किसी विशेष खेल कार्यक्रम का आयोजन न होने को लेकर चर्चा है। इस बीच बिलासपुर के खेल जगत से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों ने खेल छात्रावास पहुंचकर बच्चों से मुलाकात की और वहां की मौजूदा परिस्थितियों को देखकर चिंता जताई।
जानकारी के अनुसार खेल छात्रावास के बच्चों को वर्ष 2019 से खेल किट उपलब्ध नहीं करवाई गई है। बच्चों के लिए बेहतर खेल सुविधाएं और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग लंबे समय से उठ रही है। पूर्व संयुक्त शिक्षा निदेशक ने संबंधित अधिकारियों और प्रशासन से छात्रावास की दशा सुधारने तथा बच्चों को आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने की मांग की है।
इस बीच बच्चों के कोच की ओर से भी एक गंभीर बात सामने आने का दावा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि जब कोच ने खेल छात्रावास के बच्चों और उनकी व्यवस्थाओं को लेकर उच्च अधिकारियों से बात की, तो उन्हें कथित तौर पर कहा गया कि बच्चों को घर पर ही रहने दिया जाए और उन्हें बुलाने की आवश्यकता नहीं है। यदि यह दावा सही है तो खेल प्रतिभाओं के भविष्य और छात्रावास की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि इस संबंध में संबंधित उच्च अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
कुछ लोगों द्वारा यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि उच्च अधिकारी छात्रावास की व्यवस्थाओं और बच्चों की समस्याओं के समाधान पर अपेक्षित ध्यान नहीं दे रहे हैं। बच्चों के लिए निर्धारित डाइट और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि खेल गतिविधियां बच्चों और युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। बताया जा रहा है कि छात्रावास में विशेष रूप से देहरा सेक्टर सहित नशे से प्रभावित क्षेत्रों के कई बच्चे खेलों के माध्यम से सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में बच्चों को पर्याप्त खेल सुविधाएं देने के बजाय उन्हें घर बैठने को कहा जाना, यदि सही है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर राज्य खेल छात्रावास की स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों ने प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर ध्यान आकर्षित किया है। मांग की जा रही है कि प्रशासन मामले का संज्ञान लेकर बच्चों को खेल किट, बेहतर मैदान, उचित डाइट और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाए, ताकि खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।
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