मनाली फोरलेन हाईवे पर भराड़ी के पास बेसहारा गोवंश सड़क पर, हादसे को न्योता; करोड़ों के सेस और अनुदान के बावजूद स्थायी समाधान कब?
मनाली। मनाली फोरलेन हाईवे पर भराड़ी के पास बेसहारा गोवंश सड़क पर घूम रहे हैं। तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क पर मौजूद ये पशु हर वक्त बड़े हादसे का खतरा पैदा कर रहे हैं। स्थिति में गोवंश भी असुरक्षित है और वाहन चालक भी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इस समस्या का स्थायी समाधान कब होगा?
हिमाचल प्रदेश में गोवंश संरक्षण और गौशालाओं के लिए सरकार की ओर से विभिन्न माध्यमों से धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। शराब की बोतलों पर लगाए जाने वाले गौधन विकास निधि सेस के अलावा गौ सेवा आयोग के माध्यम से सरकारी अनुदान और अन्य स्रोतों से भी राशि उपलब्ध होती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्षों में गौधन विकास निधि सेस के माध्यम से करोड़ों रुपये एकत्र किए गए हैं।
वहीं, पंजीकृत गौशालाओं और गौसदनों में रखे जाने वाले गोवंश के रखरखाव के लिए अनुदान राशि भी बढ़ाई गई है। गोपाल योजना के तहत भी करोड़ों रुपये की राशि गौशालाओं के संचालन और रखरखाव पर खर्च की जा रही है। इसके बावजूद यदि मनाली जैसे पर्यटन क्षेत्र के व्यस्त फोरलेन हाईवे पर भराड़ी के पास गोवंश खुले में सड़क पर घूमता दिखाई दे रहा है, तो व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
प्रदेश में बड़ी संख्या में पंजीकृत गौशालाएं और गौ अभयारण्य संचालित होने के बावजूद निराश्रित गोवंश की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। हाईवे पर बेसहारा पशुओं की मौजूदगी केवल पशुओं के लिए खतरा नहीं, बल्कि वाहन चालकों और यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती है।
कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर कुछ संवेदनशील स्थानों पर गोवंश को सड़क से हटाकर सुरक्षित रखने के लिए गौसदन जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। ऐसे में भराड़ी जैसे संवेदनशील स्थानों पर भी स्थायी व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है।
सवाल सीधा है—जब गोवंश संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये सेस और अनुदान के रूप में जुटाए और खर्च किए जा रहे हैं, तो हाईवे पर बेसहारा गोवंश क्यों घूम रहा है?
जरूरत केवल अनुदान बढ़ाने की नहीं, बल्कि हर संवेदनशील फोरलेन खंड पर स्थायी शेल्टर, नियमित पशु रेस्क्यू, निगरानी और रखरखाव की ठोस व्यवस्था करने की है। ताकि गोवंश भी सुरक्षित रहे और हाईवे पर सफर करने वाले हजारों वाहन चालक और यात्री भी।
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