हर ब्लैक स्पॉट पर अब होंगे "पथ प्रहरी", सड़क हादसों में मौत रोकने देवास पुलिस का बड़ा अभियान
360 डिग्री रोड सेफ्टी मॉडल के तहत नागरिकों को दिया जा रहा सीपीआर और फर्स्ट एड प्रशिक्षण
देवास। सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के लिए देवास पुलिस ने जिलेभर में "360 डिग्री रोड सेफ्टी अभियान" शुरू किया है। इसके तहत जिले के सभी ब्लैक स्पॉट पर आसपास रहने वाले नागरिकों और दुकानदारों को "पथ प्रहरी" बनाकर उन्हें दुर्घटना पीड़ितों की त्वरित मदद के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की मंशानुरूप एडीजी उज्जैन जोन राकेश गुप्ता एवं डीआईजी उज्जैन रेंज नवनीत भसीन के निर्देशन में संचालित इस अभियान के तहत पथ प्रहरियों को सीपीआर, घायल व्यक्ति की सुरक्षित बॉडी हैंडलिंग, प्राथमिक उपचार तथा आपातकालीन सेवाओं से तत्काल संपर्क करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें फर्स्ट एड किट भी वितरित की जा रही है।
गुरुवार को डीआईजी नवनीत भसीन स्वयं देवास शहर के थाना औद्योगिक क्षेत्र स्थित ब्लैक स्पॉट पर पहुंचे और प्रशिक्षण कार्यक्रम का अवलोकन किया।
एसपी पुनीत गेहलोद ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में मौत का एक बड़ा कारण घायलों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचा पाना और नागरिकों में कानूनी प्रक्रियाओं को लेकर बनी झिझक है। इसी को दूर करने के लिए प्रत्येक ब्लैक स्पॉट पर स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित कर "पथ प्रहरी" बनाया जा रहा है।
प्रशिक्षण के दौरान पथ प्रहरियों को केंद्र सरकार की "राह वीर योजना" की जानकारी भी दी जा रही है, जिसके तहत दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपए तक का नकद पुरस्कार दिया जाता है। साथ ही प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत दुर्घटना पीड़ितों को 1.5 लाख रुपए तक के निशुल्क उपचार की जानकारी भी दी जा रही है।
देवास पुलिस जिलेभर के प्रशिक्षित पथ प्रहरियों को व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से एक मंच पर भी जोड़ रही है, जिससे किसी भी दुर्घटना की सूचना कुछ ही सेकंड में साझा कर तत्काल सहायता पहुंचाई जा सके।
दुर्घटनाओं में दिखा सकारात्मक असर
देवास पुलिस के अनुसार "360 डिग्री रोड सेफ्टी मॉडल" के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। वर्ष 2026 में सड़क दुर्घटनाओं में 18 प्रतिशत और दुर्घटना जनित मौतों में 25 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। पुलिस का मानना है कि प्रशिक्षित पथ प्रहरियों का यह नेटवर्क भविष्य में सड़क हादसों में घायलों को समय पर उपचार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
पथ प्रहरी को क्या सिखाया जा रहा है?
• सीपीआर (CPR) देना
• फर्स्ट एड किट का उपयोग
• घायल की सुरक्षित बॉडी हैंडलिंग
• एम्बुलेंस, पुलिस और अस्पताल से तत्काल संपर्क
• राह वीर योजना एवं राहत योजनाओं की जानकारी
अभियान का उद्देश्य
• गोल्डन ऑवर में घायल को सहायता
• सड़क दुर्घटना में मौतों में कमी
• नागरिकों की सक्रिय भागीदारी
• ब्लैक स्पॉट पर त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम विकसित करना।