🚨 मेरठ में पुलिस हिरासत में कथित बर्बरता पर गंभीर सवाल
मेरठ में मोहित जाटव और दिग्विजय भाटी के साथ पुलिस हिरासत में कथित मारपीट और यातना के आरोप बेहद गंभीर हैं। पीड़ितों द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, तत्कालीन SSP अविनाश पांडेय ने दोनों को अपने कार्यालय बुलाकर कथित रूप से गाली-गलौज की और चैंबर बंद कर मारपीट की। इसके बाद SOG के हवाले किए जाने तथा पैर बांधकर उल्टा लटकाकर फट्टों-लाठियों से पीटने के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह कानून-व्यवस्था और पुलिस जवाबदेही पर बेहद गंभीर प्रश्न खड़े करता है। किसी भी अधिकारी को कानून से ऊपर होकर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग है कि:
🔹 CCTV फुटेज तत्काल सुरक्षित कराई जाए।
🔹 पीड़ितों का स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मेडिकल परीक्षण कराया जाए।
🔹 पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए।
🔹 जांच में दोषी पाए जाने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
🔹 हिरासत में मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों की गंभीरता से जांच हो।
वर्दी कानून से बड़ी नहीं है।
किसी भी नागरिक के साथ हिरासत में अमानवीय व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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Hardoi, Hardoi | Aug 21, 2026