नवरात्रि में गूंजे मां हरियाली देवी के जयकारे!!! नवमी पर मिलेगा जौ की हरियाली का पवित्र प्रसाद… आखिर क्या है हरियाली देवी सिद्धपीठ की इस अनूठी परंपरा का धार्मिक महत्व?
नौ दिन की आराधना… मां के जयकारे… दुर्गा सप्तशती का पाठ और अटूट आस्था का अद्भुत संगम!
उत्तराखंड के प्रसिद्ध शक्तिस्थलों में शामिल हरियाली देवी सिद्धपीठ में शारदीय नवरात्रि की धूम है। मां के दर्शन के लिए श्रद्धालु दूर-दराज से पहुंच रहे हैं और सुख-समृद्धि, शांति व खुशहाली की कामना कर रहे हैं।
पहले दिन बोए जाते हैं जौ, नवमी पर यही हरियाली बनती है श्रद्धालुओं का विशेष प्रसाद!
नौ दिनों तक सहेजी जाने वाली जौ की हरियाली यहां की सदियों पुरानी लोकआस्था और धार्मिक परंपरा का प्रतीक है। नवमी पर विधि-विधान से इसे निकालकर भक्तों में वितरित किया जाता है। श्रद्धालु इसे मां का आशीर्वाद मानकर ग्रहण करते हैं।
🔱 योगमाया और त्रिपुरसुंदरी के स्वरूप में पूजित मां हरियाली देवी!
🚩 बचणस्यूं 🚩 शिवचरण 🚩 सिरवाड़ीगढ़ 🚩 धनपुर
इन चार पट्टियों की आराध्य देवी के दरबार में पीढ़ियों से अटूट श्रद्धा की परंपरा कायम है।
चारों ओर पर्वतीय सौंदर्य, मंदिर में भक्ति की गूंज और मां के चरणों में शीश नवाते श्रद्धालु—हरियाली देवी सिद्धपीठ में नवरात्रि का दृश्य आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम है।
❤️ देवभूमि की इस अनूठी परंपरा को कितने लोग जानते हैं? कमेंट में लिखें—जय मां हरियाली देवी! 🙏🚩
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Rudraprayag, Rudraprayag | Oct 12, 2026