#दुश्मन_को_भी_न_देखना_पड़े_ये_मंजर!
भरतपुर। धौलपुर का चंबल मुक्तिधाम बुधवार को एक ऐसे दर्दनाक मंजर का गवाह बना, जिसने हर शहरवासी की आत्मा को झकझोर कर रख दिया। दो अलग-अलग सड़क हादसों में जान गंवाने वाले छह अपनों की अर्थियां जब एक साथ निकलीं, तो पूरे शहर की आंखें नम हो गईं। जानकारी के अनुसार, महाकाल के दर्शन को जा रहे पुरानी सब्जी मंडी निवासी कपड़ा व्यवसायी सुनील त्रिवेदी के परिवार की कार डंपर से टकरा गई, जिसमें उनकी पत्नी सोमा, बेटा अंकुर और बहू अर्चना काल के गाल में समा गए। खुशियों से भरा यह घर देखते ही देखते मातम में डूब गया। चंबल तट पर जब सुनील त्रिवेदी ने पत्नी को और छोटे बेटे ने भाई-भाभी को मुखाग्नि दी, तो वहां मौजूद हर शख्स बिलख पड़ा। इस घर में अब कोई महिला जीवित नहीं बची है।दूसरी तरफ, धौलपुर-भरतपुर हाईवे पर हुए हादसे ने जैन परिवार की खुशियां छीन लीं। पदमपुरा से दर्शन कर लौट रहे सरिया व्यवसायी राजकुमार जैन, उनके भतीजे विजय जैन और मासूम आदी की मौत हो गई। मुक्तिधाम में जब कांपते हाथों से बेटे ने अपने पिता राजकुमार जैन को मुखाग्नि दी, तो उपस्थित जनसमूह का कलेजा मुंह को आ गया। एक ही दिन में चंबल किनारे जलती छह चिताओं और परिजनों की चीखों ने 29 साल पुराने 12 अक्टूबर 1997 के उस काले दिन की यादें ताजा कर दीं, जब ऐसे ही एक हादसे में शहर ने छह अपनों को खोया था। एक झटके में उजड़ी इन गृहस्थियों के गम में आज पूरा धौलपुर रो पड़ा।