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Ambala, Ambala | Jul 31, 2026

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गुरु भक्ति ही साधक के जीवन को सही दिशा प्रदान करती है : साध्वी भावना भारती जी

जगाधरी, हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया, जिसके दौरान परम पूजनीय दिव्य गुरु आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री भावना भारती जी ने गुरु भक्ति से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण भक्ति सूत्रों को उद्घाटित करते हुए कहा कि गुरु के प्रति श्रद्धा और समर्पण साधक के आध्यात्मिक जीवन की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि गुरु वे दिव्य शक्ति हैं जो अज्ञान के अंधकार से निकालकर शिष्य को आत्मज्ञान और सत्य के प्रकाश की ओर ले जाती है। गुरु के प्रति सच्ची भक्ति उनके द्वारा बताए गए ज्ञान और मार्ग को अपने जीवन में धारण करना है। साध्वी जी ने कहा कि एक सच्चे शिष्य के हृदय में गुरु के प्रति श्रद्धा, विश्वास, प्रेम और समर्पण की भावना होती है। जब साधक अपने अहंकार और अपनी सीमित बुद्धि को गुरु चरणों में समर्पित करता है, तभी उसके भीतर आध्यात्मिक परिवर्तन की प्रक्रिया प्रारंभ होती है। गुरु की कृपा और मार्गदर्शन से साधक जीवन की वास्तविकता को समझने तथा अपने भीतर स्थित दिव्य चेतना का अनुभव करने की दिशा में आगे बढ़ता है। उन्होंने आगे बताया कि गुरु भक्ति केवल भावनाओं तक सीमित ना हो अपितु इसका प्रतिबिंब शिष्य के आचरण में भी दिखाई देना चाहिए। गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा वही है, जब शिष्य अपने जीवन में सत्य, सेवा, संयम, प्रेम और करुणा जैसे गुणों को अपनाता है तथा गुरु द्वारा दिखाए गए मार्ग पर निरंतर चलने का प्रयास करता है। साध्वी भावना भारती जी ने कहा कि आज के भौतिकतावादी युग में मनुष्य अनेक प्रकार के आकर्षणों और तनावों से घिरा हुआ है। ऐसे समय में आध्यात्मिक ज्ञान ही मनुष्य को भीतर से मजबूत  बनाता है।

गुरु भक्ति ही साधक के जीवन को सही दिशा प्रदान करती है : साध्वी भावना भारती जी जगाधरी, हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया, जिसके दौरान परम पूजनीय दिव्य गुरु आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री भावना भारती जी ने गुरु भक्ति से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण भक्ति सूत्रों को उद्घाटित करते हुए कहा कि गुरु के प्रति श्रद्धा और समर्पण साधक के आध्यात्मिक जीवन की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि गुरु वे दिव्य शक्ति हैं जो अज्ञान के अंधकार से निकालकर शिष्य को आत्मज्ञान और सत्य के प्रकाश की ओर ले जाती है। गुरु के प्रति सच्ची भक्ति उनके द्वारा बताए गए ज्ञान और मार्ग को अपने जीवन में धारण करना है। साध्वी जी ने कहा कि एक सच्चे शिष्य के हृदय में गुरु के प्रति श्रद्धा, विश्वास, प्रेम और समर्पण की भावना होती है। जब साधक अपने अहंकार और अपनी सीमित बुद्धि को गुरु चरणों में समर्पित करता है, तभी उसके भीतर आध्यात्मिक परिवर्तन की प्रक्रिया प्रारंभ होती है। गुरु की कृपा और मार्गदर्शन से साधक जीवन की वास्तविकता को समझने तथा अपने भीतर स्थित दिव्य चेतना का अनुभव करने की दिशा में आगे बढ़ता है। उन्होंने आगे बताया कि गुरु भक्ति केवल भावनाओं तक सीमित ना हो अपितु इसका प्रतिबिंब शिष्य के आचरण में भी दिखाई देना चाहिए। गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा वही है, जब शिष्य अपने जीवन में सत्य, सेवा, संयम, प्रेम और करुणा जैसे गुणों को अपनाता है तथा गुरु द्वारा दिखाए गए मार्ग पर निरंतर चलने का प्रयास करता है। साध्वी भावना भारती जी ने कहा कि आज के भौतिकतावादी युग में मनुष्य अनेक प्रकार के आकर्षणों और तनावों से घिरा हुआ है। ऐसे समय में आध्यात्मिक ज्ञान ही मनुष्य को भीतर से मजबूत बनाता है।

Ambala, Ambala | Aug 9, 2026

मीडिया साक्षरता से फेक न्यूज की पहचान में युवाओं को मिलेगी मदद : डॉ. परमेश कुमार

डिजिटल दौर में फेक न्यूज से बचाएगी मीडिया साक्षरता, युवाओं को सही सूचना पहचानने में मिलेगी मदद

यमुनानगर। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव के बीच फेक न्यूज समाज के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। लोग जाने-अनजाने में रोजाना किसी न किसी रूप में भ्रामक और अपुष्ट सूचनाओं के संपर्क में आ रहे हैं। ऐसे में मीडिया साक्षरता लोगों को फेक न्यूज की पहचान करने और उसके दुष्प्रभावों से बचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसी विषय पर डीएवी गर्ल्स कॉलेज, यमुनानगर के जनसंचार विभागाध्यक्ष डॉ. परमेश कुमार ने ‘डिजिटल युग में मीडिया साक्षरता एवं फेक न्यूज जागरूकता’ विषय पर पीएचडी शोध किया है।

डॉ. परमेश कुमार ने यह शोध नॉर्दर्न इंस्टीट्यूट फॉर इंटीग्रेटेड लर्निंग इन मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी, कैथल से पूरा किया है। उन्होंने बताया कि डिजिटल युग में सूचना तक पहुंच आसान होने के साथ-साथ गलत सूचनाओं का प्रसार भी तेजी से बढ़ा है। विशेष रूप से सोशल मीडिया पर बिना सत्यापन के सूचनाएं साझा किए जाने से फेक न्यूज का प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि उनके शोध का मुख्य उद्देश्य युवाओं में फेक न्यूज की पहचान करने, सूचना की सत्यता जांचने और भ्रामक सामग्री से बचने के प्रति जागरूकता का अध्ययन करना था। शोध में यह सामने आया कि मीडिया साक्षरता के माध्यम से युवाओं में सूचना के स्रोत की विश्वसनीयता जांचने, तथ्यों का सत्यापन करने और सही-गलत खबर में अंतर करने की क्षमता विकसित की जा सकती है।

डॉ. परमेश कुमार के अनुसार, पत्रकारिता एवं जनसंचार के क्षेत्र में फेक न्यूज आज गंभीर विषय बन चुका है। हरियाणा के संदर्भ में इस विषय पर शोध की आवश्यकता को देखते हुए उन्होंने इसे अपने शोध का विषय बनाया। उन्होंने कहा कि मीडिया साक्षरता को शिक्षा का हिस्सा बनाकर युवाओं को जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनाया जा सकता है। इससे वे न केवल फेक न्यूज की पहचान कर सकेंगे, बल्कि बिना सत्यापन के भ्रामक सूचनाओं को आगे प्रसारित करने से भी बचेंगे।

फोटो कैप्शनः 1.यूनिवर्सिटी की आर्ट फैक्लटी की डीन डॉ एकता चहल के साथ 
2. शोध कार्य व)वाइवा के उपरांत एक्सपर्ट डॉ अमित सांगवान व अन्य के साथ

मीडिया साक्षरता से फेक न्यूज की पहचान में युवाओं को मिलेगी मदद : डॉ. परमेश कुमार डिजिटल दौर में फेक न्यूज से बचाएगी मीडिया साक्षरता, युवाओं को सही सूचना पहचानने में मिलेगी मदद यमुनानगर। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव के बीच फेक न्यूज समाज के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। लोग जाने-अनजाने में रोजाना किसी न किसी रूप में भ्रामक और अपुष्ट सूचनाओं के संपर्क में आ रहे हैं। ऐसे में मीडिया साक्षरता लोगों को फेक न्यूज की पहचान करने और उसके दुष्प्रभावों से बचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसी विषय पर डीएवी गर्ल्स कॉलेज, यमुनानगर के जनसंचार विभागाध्यक्ष डॉ. परमेश कुमार ने ‘डिजिटल युग में मीडिया साक्षरता एवं फेक न्यूज जागरूकता’ विषय पर पीएचडी शोध किया है। डॉ. परमेश कुमार ने यह शोध नॉर्दर्न इंस्टीट्यूट फॉर इंटीग्रेटेड लर्निंग इन मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी, कैथल से पूरा किया है। उन्होंने बताया कि डिजिटल युग में सूचना तक पहुंच आसान होने के साथ-साथ गलत सूचनाओं का प्रसार भी तेजी से बढ़ा है। विशेष रूप से सोशल मीडिया पर बिना सत्यापन के सूचनाएं साझा किए जाने से फेक न्यूज का प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि उनके शोध का मुख्य उद्देश्य युवाओं में फेक न्यूज की पहचान करने, सूचना की सत्यता जांचने और भ्रामक सामग्री से बचने के प्रति जागरूकता का अध्ययन करना था। शोध में यह सामने आया कि मीडिया साक्षरता के माध्यम से युवाओं में सूचना के स्रोत की विश्वसनीयता जांचने, तथ्यों का सत्यापन करने और सही-गलत खबर में अंतर करने की क्षमता विकसित की जा सकती है। डॉ. परमेश कुमार के अनुसार, पत्रकारिता एवं जनसंचार के क्षेत्र में फेक न्यूज आज गंभीर विषय बन चुका है। हरियाणा के संदर्भ में इस विषय पर शोध की आवश्यकता को देखते हुए उन्होंने इसे अपने शोध का विषय बनाया। उन्होंने कहा कि मीडिया साक्षरता को शिक्षा का हिस्सा बनाकर युवाओं को जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनाया जा सकता है। इससे वे न केवल फेक न्यूज की पहचान कर सकेंगे, बल्कि बिना सत्यापन के भ्रामक सूचनाओं को आगे प्रसारित करने से भी बचेंगे। फोटो कैप्शनः 1.यूनिवर्सिटी की आर्ट फैक्लटी की डीन डॉ एकता चहल के साथ 2. शोध कार्य व)वाइवा के उपरांत एक्सपर्ट डॉ अमित सांगवान व अन्य के साथ

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