#खुशियों_की_दांस्ता
सीआरपी के रूप में पहचान बनाई, बढी नेतृत्व क्षमता
कृषि और किराना व्यवसाय से कमा रही 20 हजार मासिक
समूहो से जुडकर आत्मनिर्भर बन रही जनजातीय महिलाएं
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#श्योपुर-/ मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत संचालित स्वसहायता समूहों से जुडकर महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही है, बल्कि सामाजिक रूप से भी आत्मनिर्भर होकर अपनी नेतृत्व क्षमता के माध्यम से अन्य महिलाओं को आगे बढने का हौसला दे रही है। आदिवासी विकासखण्ड कराहल में जनजातीय महिलाओं के जीवन में इन समूहों से जुडने के बाद आर्थिक बदलाव आया है और अब यह महिलाएं परिवार की मुख्य धुरी बन गई है। अपने व्यवसाय को संभालने के साथ ही परिवार की जिम्मेदारियां भी बखूबी निभा रही है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयास फलीभूत होते नजर आ रहे है।
श्योपुर जिले के आदिवासी विकासखण्ड कराहल के ग्राम करियादेह निवासी श्रीमती कमली पटेलिया की कहानी ऐसी ही है, जिन्होंने सीआरपी के रूप में अपनी पहचान बनाई तथा जिला एवं राज्य स्तर पर विभिन्न प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी नेतृत्व क्षमता को बढाया। आज छोटे से गांव में रहने वाली श्रीमती कमली पटेलिया किराना व्यवसाय और कृषि क्षेत्र के माध्यम से 20 हजार रूपये प्रतिमाह कमा रही है। 10वी क्लास तक पढी श्रीमती कमली पटेलिया के परिवार में पांच सदस्य है, परिवार की खेतीबाडी पर निर्भर होने से आर्थिक तंगी का सामना करना पडता था। बाद में वे एनआरएलएम अंतर्गत संचालित स्वसहायता समूह राधाकृष्ण से जुडी और सीआरपी ड्राइव के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने समूह संचालन की बारिकीयों को सीखा तथा आजीविकामूलक गतिविधियों को स्थापित करने के संबंध में प्रशिक्षण प्राप्त किया।
ग्राम संगठन के माध्यम से उन्होंने एक लाख रूपये का लोन लेकर किराने की दुकान शुरू की और कृषि क्षेत्र में उन्नत तकनीक को अपनाया, इससे उन्हें 20 हजार रूपये की अतिरिक्त मासिक आमदनी प्राप्त होने लगी। अपनी नेतृत्व क्षमता के चलते आज वे ग्राम संगठन में सीआरपी के रूप में अपनी भूमिका निभा रही है, साथ ही लोक अधिकार केन्द्र कराहल के संचालन में भी सहयोग प्रदान कर रही है।
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Sheopur, Madhya Pradesh | Jun 8, 2026