देश के विभाजन की ऐतिहासिक त्रासदी और 14 अगस्त 1947 की उस दौर की असहनीय पीडा को याद करते हुए आज सैक्टर-1 स्थित लघु सचिवालय के सभागार में ’’विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’’ का आयोजन किया गया। उपायुक्त श्री सतपाल शर्मा ने मुख्यअतिथि के रूप में कार्यक्रम का शुभांरभ किया। इस अवसर पर पंचकूला के मेयर श्री शाम लाल बंसल, हरियाणा राज्य अनुसूचित जाति आयोग की चेयरपर्सन श्रीमती बंतो कटारिया और हरियाणा शिवालिक विकास बोर्ड के कार्यकारी उपाध्यक्ष श्री ओमप्रकाश देवीनगर विशेष रूप से उपस्थित रहे।
इस मौके पर सभी अतिथियों ने सूचना ,जनसंपर्क एवं भाषा विभाग की ओर से विभाजन के दौर की घटनाओं, संघर्षो और विस्थापन की वेदना को दर्शाती प्रदर्शनी का अवलोकन किया और उन लाखों लोगों को अपनी श्रद्वांजलि अर्पित की जिन्होने देश के बटवारे के दौरान अपना घर परिवार और जीवन खो दिया था। कार्यक्रम के दौरान ’’विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’’ के तहत विभाजन के दौरान घटित घटनाओं पर आधारित डाक्यूमेंट्री भी दिखाई गई।
मुख्यअतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उपायुक्त श्री सतपाल शर्मा ने कहा कि आज का दिन उन सभी निर्दोष नागरिकों को नमन करने का अवसर है, जिन्होंने विभाजन की विभीषिका में अपने प्राण गंवाए। हम उन परिवारों के साहस, धैर्य और संघर्ष को भी नमन करते हैं, जिन्होंने अपना सब कुछ खोने के बावजूद हार नहीं मानी। उन्होंने नए स्थानों पर कठिन परिस्थितियों में अपना जीवन फिर से शुरू किया और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
मेयर श्री शाम लाल बंसल ने कहा कि आज हम ’’विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’’ के अवसर पर उन लाखों लोगों को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं, जिन्होंने वर्ष 1947 में देश के विभाजन की त्रासदी को झेला। यह दिन हमें उस दर्दनाक दौर की याद दिलाता है, जब देश का विभाजन केवल सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन, परिवारों और सपनों का भी बिखराव था। उन्होने कहा कि विभाजन के समय लाखों लोगों को अपना घर-बार, जमीन-जायदाद और अपनी जन्मभूमि छोड़कर अनजान स्थानों की ओर पलायन करना पड़ा। असंख्य परिवार अपने प्रियजनों से बिछड़ गए। अनेक लोगों ने हिंसा और संघर्ष में अपने प्राण गंवाए। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने भी इस त्रासदी की भयंकर पीड़ा सहन की। रेलगाड़ियों, सड़कों और शरणार्थी शिविरों में दिखाई देने वाले दर्दनाक दृश्य उस समय की भयावहता को दर्शाते हैं।
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