बलरामपुर जिले के खड़ियाडामर गांव में शासकीय उचित मूल्य दुकान से गरीबों को बांटे जा रहे राशन ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है। दीप राइस मिल से सप्लाई किए गए चावल के हर बोरे से दो से ढाई किलो तक कंकड़-पत्थर निकल रहे हैं, जिससे आक्रोशित होकर 502 हितग्राहियों ने राशन लेने से साफ इनकार कर दिया। ग्रामीणों के विरोध के बाद जिला पंचायत उपाध्यक्ष धीरज सिंह देव ने मौके पर पहुंचकर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल से सीधे फोन पर बात की और शिकायत दर्ज कराई, जिस पर मंत्री ने कार्रवाई का भरोसा दिया है। वहीं खाद्य विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर खराब चावल वापस लौटाने के निर्देश दिए हैं।
पीडीएस व्यवस्था, जिसने कभी छत्तीसगढ़ को देश भर में 'चाउर वाले राज्य' के रूप में पहचान दिलाई थी, आज भारी प्रशासनिक लापरवाही और कमीशनखोरी के आरोपों से घिर गई है। नागरिक आपूर्ति निगम में गुणवत्ता जांचने वाले अमले की मौजूदगी के बावजूद राइस मिल से कंकड़ भरा अनाज सीधे गरीबों की दहलीज तक कैसे पहुंच गया, यह अपने आप में बड़ा सवाल है। एक तरफ सरकार 'जीरो टॉलरेंस' और सुशासन का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ गरीबों के निवाले में मिलावट का यह खेल स्थानीय निगरानी तंत्र और मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
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