जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों से मारपीट के वीडियो वायरल, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल!
नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच कथित मारपीट, अभद्रता और लाठी-डंडों से धमकाने के वीडियो सामने आने के बाद घटनास्थल की स्थिति और पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
वायरल वीडियो में कथित तौर पर कुछ लोग प्रदर्शनकारियों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। कुछ वीडियो में नाबालिग बच्चों के साथ भी मारपीट किए जाने के आरोप हैं। हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और पूरे घटनाक्रम की जांच आवश्यक है।
सबसे बड़ा सवाल पुलिस की कार्रवाई को लेकर उठ रहा है। आरोप है कि मौके पर मौजूद कुछ लोग पुलिसकर्मियों के सामने आक्रामक व्यवहार करते दिखाई दिए, लेकिन क्या उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की गई? यदि किसी ने कानून हाथ में लिया है, तो उसके खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई होना जरूरी है।
वायरल वीडियो के एक अन्य हिस्से में एक व्यक्ति पत्थर उठाता दिखाई देता है, जबकि वीडियो बना रही युवती उससे पत्थर फेंकने को कहती नजर आती है। बातचीत के दौरान वहां मौजूद कुछ लोग कथित तौर पर ऐसा करने से इनकार करते हैं। वहीं, कुछ अन्य दृश्यों में लोग लाठी-डंडे लेकर धमकाते हुए दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।
इन दृश्यों के बाद कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं—क्या प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई? क्या मारपीट करने के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी? क्या पुलिस ने सभी पक्षों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की? और यदि किसी ने भीड़ को उकसाया या हिंसा की, तो उसकी जिम्मेदारी तय होगी या नहीं?
कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। किसी को भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर हमला करने का अधिकार नहीं है। इसी तरह, किसी भी पक्ष की ओर से हिंसा या उकसावे की स्थिति में कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
अब जरूरत है कि वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों की पहचान की जाए और पुलिस अपनी कार्रवाई के तथ्यों को सार्वजनिक करे। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार भी सुरक्षित रहना चाहिए और कानून-व्यवस्था भी—दोनों की जिम्मेदारी प्रशासन की है।