DGP के आदेश के बाद भी सतना ट्रैफिक पुलिस को लगा ‘रील का रोग’!
आम जनता का बिना सीट बेल्ट चालान, खाकी पर नियमों की अनदेखी का आरोप—सवाल: दूसरों का चालान काटने वालों का चालान कौन काटेगा?
सतना। सड़क पर नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई का जिम्मा संभालने वाली सतना ट्रैफिक पुलिस ही अब सवालों के घेरे में है। आरोप है कि आम जनता का बिना सीट बेल्ट वाहन चलाने पर चालान काटने वाली पुलिस खुद ही यातायात नियमों की अनदेखी करती नजर आ रही है। मामला तब और गंभीर हो जाता है, जब प्रदेश के डीजीपी द्वारा पुलिसकर्मियों को वर्दी की गरिमा और विभागीय अनुशासन बनाए रखने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आती है।
बताया जा रहा है कि इसके बावजूद पुलिसकर्मियों द्वारा बिना सीट बेल्ट वाहन चलाते हुए सोशल मीडिया पर रील्स अपलोड की जा रही हैं। यदि सामने आया वीडियो इसी अवधि का है, तो यह महज सोशल मीडिया पर रील बनाने का मामला नहीं, बल्कि नियमों के पालन और पुलिस की जवाबदेही से जुड़ा सवाल बन जाता है।
जनता के लिए नियम, खाकी के लिए अलग पैमाना?
ट्रैफिक पुलिस का काम लोगों को यातायात नियमों का पालन कराना और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करना है। लेकिन जब वही पुलिसकर्मी कथित तौर पर नियमों का पालन करते नजर न आएं, तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है कि क्या कानून सबके लिए बराबर है?
आम वाहन चालक का बिना सीट बेल्ट पकड़े जाने पर चालान किया जाता है, तो फिर नियमों की अनदेखी करने वाले पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी कौन तय करेगा?
“दूसरों का चालान काटने वालों का चालान कौन काटेगा?”
इस पूरे मामले को लेकर लोगों के बीच दोहरे मापदंड को लेकर चर्चा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ऐसी तस्वीरें और रील्स पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं। जनता का सीधा सवाल है—अगर नियम तोड़ना अपराध है तो वर्दी देखकर नियम क्यों बदल जाएं?
फिलहाल स्थिति कुछ ऐसी दिखाई दे रही है कि आम जनता के लिए “यातायात नियम सर्वोपरि” और रील बनाने वालों के लिए शायद “VIP ड्यूटी चल रही है भैया!”
अब देखना यह होगा कि DGP के निर्देशों और यातायात नियमों की कथित अनदेखी पर विभाग अपने ही कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई करता है या मामला सिर्फ सोशल मीडिया की रील बनकर रह जाता है।
तलाश न्यूज | सतना
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Gopadbanas, Sidhi | Sep 10, 2026