आज के दौर में भी जीवित है राम-राम सा की प्राचीन परंपरा।
दैनिक वीरधरा राजस्थान। श्री श्रद्धा ओम त्रिवेदी।
सवाई माधोपुर। उपखंड बौंली की ग्राम पंचायत लाखनपुर में दशहरे के अवसर पर मंगलवार शाम 8 बजे भगवान नरसिंह जी के मंदिर से जयकारों के साथ सदियों पुराना 'राम-राम सा' कार्यक्रम शुरू हुआ।
यह अनूठी परंपरा साल में दो बार होली और दशहरे के अवसर पर निभाई जाती है। इसमें सभी ग्रामवासी अपने आपसी बैर-भाव और द्वेष को भूलकर एक-दूसरे को राम-राम करते हैं। इस दौरान ग्रामीण गांव के सभी मंदिरों में जाकर धोक लगाते हैं और प्रणाम करते हैं। देर रात तक पूरे गांव में 'राम-राम सा' की आवाज गूंजती रहती है।
इस परंपरा की खास बात यह है कि एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से दो बार राम-राम करता है। एक बार वह स्वयं उसके द्वार पर जाता है, जहां परिवार के सदस्य द्वार पर हाथ जोड़कर खड़े रहते हैं, और दूसरी बार दूसरा व्यक्ति उसके घर जाकर राम-राम करता है। इसके बाद सभी ग्रामीण हथाई पर बैठकर गांव की प्रमुख समस्याओं पर चर्चा करते हैं और उनके समाधान का प्रयास करते हैं।
ग्रामीण सेवानिवृत्त प्राचार्य शंभुदयाल शर्मा, मुकेश जांगिड़, श्रीराम गुर्जर, जगराम माली, देवीसिंह राठौड़ और सेवानिवृत्त अध्यापक प्यारचंद जैन ने बताया कि गांव में किसी को भी यह पता नहीं है कि यह परंपरा कब से चली आ रही है। हम भी इसे बचपन से ऐसे ही देखते आ रहे हैं। यह कार्यक्रम सामाजिक, धार्मिक और पारंपरिक महत्व वाला है और आधुनिक युग के दिखावे से दूर पूरी सादगी से मनाया जाता है।
कार्यक्रम को दुर्गाशंकर मिश्र, शिवराज हर्षाना और प्रशासक सियाराम मीणा ने संबोधित किया।
इस बार सरपंच चुनाव नजदीक होने से कार्यक्रम में अधिक भीड़ देखने को मिली। सभी सरपंच प्रत्याशी भी 'राम-राम सा' कार्यक्रम में नजर आए।