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पडकुला 48 लाख का मुर्दाघाट या भ्रष्टाचार का स्मारक? पडकुला में सरकारी रिकॉर्ड में बना अंत्येष्टि स्थल, जमीन पर पहुंचने का रास्ता तक नहीं! जनपद जालौन में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। माधौगढ़ ब्लाक की ग्राम पंचायत पडकुला (LGD Code 68941) में बनाए गए अंत्येष्टि स्थल को लेकर ग्रामीणों और मौके पर पहुंची पत्रकारों की टीम ने कई सवाल उठाए हैं। मेरी पंचायत पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार Antesthi Sthal Ka Nirman नाम से दर्ज इस कार्य की अनुमानित लागत ₹48 लाख दिखाई गई है। रिकॉर्ड में ₹25,66,250 व्यय भी दर्ज है। वहीं भुगतान विवरण में अलग-अलग मदों में ठेकेदार/सप्लायर सहित अन्य भुगतान दर्ज दिखाई दे रहे हैं। यानी सरकारी पोर्टल पर काम और भुगतान का पूरा हिसाब नजर आ रहा है, लेकिन मौके की तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है। सबसे बड़ा सवाल—अंत्येष्टि स्थल तक रास्ता कहां है? मौके पर पहुंची टीम के अनुसार अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचने के लिए कोई सुगम रास्ता नजर नहीं आया। बरसात के मौसम में आसपास खेतों में पानी और घास-फूस के बीच पत्रकारों की टीम को भी बेहद कठिनाई से मौके तक पहुंचना पड़ा। टीम को तार की फेंसिंग, खेतों की मेड़ों और पानी भरे रास्तों के बीच से होकर जाना पड़ा। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर गांव में किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो शव को इस अंत्येष्टि स्थल तक आखिर ले जाया कैसे जाएगा? स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण आज भी मजबूरी में अपने-अपने खेतों या पुराने स्थानों पर अंतिम संस्कार करते हैं। यदि यह स्थिति सही है तो इतनी बड़ी धनराशि खर्च करके बनाया गया अंत्येष्टि स्थल आखिर किस उपयोग के लिए है? निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल मौके पर निर्माण में दरारें दिखाई देने की बात सामने आई है। करीब 40–48 लाख रुपये की लागत वाले कार्य में यदि निर्माण कुछ ही समय में खराब होने लगे तो उसकी गुणवत्ता की जांच की आवश्यकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रिकॉर्ड में निर्माण कार्य Completion of work यानी पूर्ण दर्शाया गया है, जबकि जमीनी स्थिति और उपयोगिता को लेकर सवाल बने हुए हैं। भुगतान के रिकॉर्ड ने बढ़ाए सवाल पोर्टल के स्क्रीनशॉट में MS FOUJI CONTRACTER AND SUPPLAYER के नाम से कई भुगतान दिखाई दे रहे हैं। एक भुगतान ₹10,05,515, दूसरा ₹2,50,000, इसके अलावा ₹1,00,000, ₹4,50,000 और अन्य भुगतान भी रिकॉर्ड में दिखाई देते हैं। एक अन्य प्रविष्टि में ₹24,360 इंजीनियर के नाम से दर्ज है। अब सवाल यह है कि कुल कितना भुगतान हुआ, किस-किस मद में हुआ, कौन-कौन से कार्य कराए गए और मौके पर वास्तव में कितना निर्माण हुआ? इन सभी बिंदुओं की तकनीकी एवं वित्तीय जांच ही तस्वीर साफ कर सकती है। सवाल सीधे जिम्मेदारों से ₹48 लाख की अनुमानित लागत क्यों? अंत्येष्टि स्थल तक पक्का रास्ता क्यों नहीं? निर्माण पूरा दिखाने के बाद भी स्थल उपयोगी क्यों नहीं? निर्माण में दरारें क्यों आईं? भुगतान की अलग-अलग किस्तों का पूरा विवरण क्या है? क्या कार्य का तकनीकी सत्यापन और गुणवत्ता जांच हुई? क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया? यह खबर उपलब्ध सरकारी पोर्टल के रिकॉर्ड और मौके की स्थिति पर आधारित सवालों को सामने रखती है। भ्रष्टाचार हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि सक्षम विभाग की जांच के बाद ही होगी। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सरकारी धन के एक-एक रुपये का हिसाब सामने लाता है या फिर फाइलों में काम पूरा लिखकर मामला बंद कर दिया जाता है। वीडियो को अंत तक जरूर देखें और कमेंट बॉक्स में अपनी राय बताएं—क्या आपके गांव में भी अंत्येष्टि स्थल बना है? अगर बना है तो उसकी हालत कैसी है? और आपके आसपास किसी सरकारी निर्माण में गड़बड़ी है तो हमें जानकारी दें। ₹48 लाख के अंत्येष्टि स्थल पर उठ रहे सवालों पर @जालौन_प्रशासन संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराए—आखिर सरकारी धन का हिसाब कौन देगा? #जिलाधिकारीजालौन #DMJalaun #राजेश_कुमार_पाण्डेय #मुख्यविकासअधिकारीजालौन #CDOJalaun #जिलापंचायत_राज_अधिकारी #DPROJalaun #खंडविकासअधिकारी #BDOमाधौगढ़ #उपजिलाधिकारीमाधौगढ़ #SDMमाधौगढ़ #तहसीलदारमाधौगढ़ #ग्रामपंचायतपटकुला #ग्रामप्रधानमधुदेवी #ग्रामसचिवसुमितकुमार #पंचायतसचिव #ग्रामपंचायतअधिकारी #पंचायतीराजविभाग #विकासखंडमाधौगढ़ #जालौनप्रशासन #जालौनपुलिस #JalaunNews #MadhogarhNews #JalaunAdministration #GroundReport #CorruptionExposed #BreakingNews

Kalpi, Jalaun | Aug 12, 2026

MORE NEWS

दो महीने का वेतन अटका, 4 महीने से EPF भी गायब! स्वास्थ्य विभाग के आउटसोर्स कर्मचारियों का फूटा आक्रोश

गणपति एसोसिएट्स पर कर्मचारियों के भुगतान में लापरवाही के आरोप, CMO को ज्ञापन देकर जनवरी-फरवरी का वेतन और EPF दिलाने की मांग; बोले—वेतन न मिलने से परिवार का भरण-पोषण मुश्किल

उरई, जालौन जनपद के स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न सीएचसी और पीएचसी में कार्यरत आउटसोर्स मल्टीटास्किंग स्टाफ एवं स्वीपर कर्मचारियों ने वेतन भुगतान को लेकर गंभीर शिकायत उठाई है। 
कर्मचारियों ने 12 अगस्त 2026 को मुख्य चिकित्सा अधिकारी, उरई को ज्ञापन सौंपकर जनवरी और फरवरी 2026 का बकाया वेतन दिलाए जाने की मांग की है। 
कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें करीब दो माह का वेतन नहीं मिला, जबकि चार माह से EPF जमा नहीं होने की भी शिकायत सामने आई है।

ज्ञापन में कर्मचारियों ने बताया कि उनकी नियुक्ति गणपति एसोसिएट्स के माध्यम से हुई थी और वे स्वास्थ्य विभाग के सीएचसी एवं पीएचसी में लगातार सेवाएं दे रहे हैं।
 कर्मचारियों के मुताबिक जब उन्होंने संबंधित ठेकेदार से बकाया वेतन को लेकर बात की तो कथित तौर पर उन्हें जनवरी और फरवरी का वेतन नहीं मिलने की बात कही गई। इससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई है।

कर्मचारियों का कहना है कि वेतन ही परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई का मुख्य सहारा है।
 कई माह से भुगतान और EPF को लेकर स्थिति स्पष्ट न होने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

कर्मचारियों ने सीएमओ से पूरे मामले की जांच कराकर बकाया वेतन का तत्काल भुगतान कराने तथा EPF की स्थिति स्पष्ट कर संबंधित कर्मचारियों के खातों में नियमानुसार जमा कराने की मांग की है।

ज्ञापन देने वालों में मोंटी वर्मा, गजेंद्र, विजय कुमार, धर्मेंद्र, रितिक, निखिल, जयवीर पाल, मुकेश, शिवप्रसाद, अमित, लोकेंद्र, राजू, प्रदीप, मोहित, मनोज, परमात्मा शरण, राहुल सहित अन्य आउटसोर्स कर्मचारी शामिल रहे।

अब सवाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को जब समय से वेतन और EPF नहीं मिलेगा तो उनके परिवारों का गुजारा कैसे चलेगा? 
क्या जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों की इस समस्या पर तत्काल संज्ञान लेकर भुगतान सुनिश्चित कराएंगे?

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दो महीने का वेतन अटका, 4 महीने से EPF भी गायब! स्वास्थ्य विभाग के आउटसोर्स कर्मचारियों का फूटा आक्रोश गणपति एसोसिएट्स पर कर्मचारियों के भुगतान में लापरवाही के आरोप, CMO को ज्ञापन देकर जनवरी-फरवरी का वेतन और EPF दिलाने की मांग; बोले—वेतन न मिलने से परिवार का भरण-पोषण मुश्किल उरई, जालौन जनपद के स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न सीएचसी और पीएचसी में कार्यरत आउटसोर्स मल्टीटास्किंग स्टाफ एवं स्वीपर कर्मचारियों ने वेतन भुगतान को लेकर गंभीर शिकायत उठाई है। कर्मचारियों ने 12 अगस्त 2026 को मुख्य चिकित्सा अधिकारी, उरई को ज्ञापन सौंपकर जनवरी और फरवरी 2026 का बकाया वेतन दिलाए जाने की मांग की है। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें करीब दो माह का वेतन नहीं मिला, जबकि चार माह से EPF जमा नहीं होने की भी शिकायत सामने आई है। ज्ञापन में कर्मचारियों ने बताया कि उनकी नियुक्ति गणपति एसोसिएट्स के माध्यम से हुई थी और वे स्वास्थ्य विभाग के सीएचसी एवं पीएचसी में लगातार सेवाएं दे रहे हैं। कर्मचारियों के मुताबिक जब उन्होंने संबंधित ठेकेदार से बकाया वेतन को लेकर बात की तो कथित तौर पर उन्हें जनवरी और फरवरी का वेतन नहीं मिलने की बात कही गई। इससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई है। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन ही परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई का मुख्य सहारा है। कई माह से भुगतान और EPF को लेकर स्थिति स्पष्ट न होने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कर्मचारियों ने सीएमओ से पूरे मामले की जांच कराकर बकाया वेतन का तत्काल भुगतान कराने तथा EPF की स्थिति स्पष्ट कर संबंधित कर्मचारियों के खातों में नियमानुसार जमा कराने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में मोंटी वर्मा, गजेंद्र, विजय कुमार, धर्मेंद्र, रितिक, निखिल, जयवीर पाल, मुकेश, शिवप्रसाद, अमित, लोकेंद्र, राजू, प्रदीप, मोहित, मनोज, परमात्मा शरण, राहुल सहित अन्य आउटसोर्स कर्मचारी शामिल रहे। अब सवाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को जब समय से वेतन और EPF नहीं मिलेगा तो उनके परिवारों का गुजारा कैसे चलेगा? क्या जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों की इस समस्या पर तत्काल संज्ञान लेकर भुगतान सुनिश्चित कराएंगे? #उरई #जालौन #स्वास्थ्यविभाग #CMOJalaun #आउटसोर्सकर्मचारी #मल्टीटास्किंगस्टाफ #स्वीपरकर्मचारी #गणपतिएसोसिएट्स #EPF #EPFभुगतान #सीएचसी #पीएचसी #स्वास्थ्यविभागजालौन #कर्मचारीसमस्या #ज्ञापन #जालौनन्यूज #उरईन्यूज #ब्रेकिंगन्यूज #प्रशासन #जिलाधिकारीजालौन #सीएमओजालौन

Kalpi, Jalaun | Aug 12, 2026

ईटो गौशाला में गोवंश की बदहाली, दो गायों की मौत का दावा! 

कुठौंद ब्लॉक की ग्राम पंचायत ईटो स्थित अस्थाई गौवंश आश्रय स्थल की तस्वीरें व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं।
 यहां दो गायों के मृत पाए जाने और दो बछिया समेत एक गाय के बीमार होने की बात सामने आई है। 
बीमार गोवंश की हालत देखकर देखरेख और इलाज की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

गौशाला के गेट के पास से लेकर अंदर तक गंदगी का अंबार दिखाई दे रहा है। 
सैकड़ों गोवंश के बीच साफ-सफाई और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

 सवाल यह है कि गोवंश के संरक्षण और चारे-पानी के लिए आने वाला सरकारी धन आखिर कहां खर्च हो रहा है?

 क्या जिम्मेदार अधिकारी गौशालाओं का नियमित निरीक्षण कर रहे हैं?

 बीमार और मृत गोवंश को लेकर जिम्मेदारी किसकी है?

अब जरूरत है कि संबंधित अधिकारी मौके की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाएं और यदि लापरवाही मिली तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो।

 आपकी क्या राय है?
 क्या गौशालाओं की ऐसी स्थिति पर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए और इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।

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ईटो गौशाला में गोवंश की बदहाली, दो गायों की मौत का दावा! कुठौंद ब्लॉक की ग्राम पंचायत ईटो स्थित अस्थाई गौवंश आश्रय स्थल की तस्वीरें व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं। यहां दो गायों के मृत पाए जाने और दो बछिया समेत एक गाय के बीमार होने की बात सामने आई है। बीमार गोवंश की हालत देखकर देखरेख और इलाज की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। गौशाला के गेट के पास से लेकर अंदर तक गंदगी का अंबार दिखाई दे रहा है। सैकड़ों गोवंश के बीच साफ-सफाई और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि गोवंश के संरक्षण और चारे-पानी के लिए आने वाला सरकारी धन आखिर कहां खर्च हो रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारी गौशालाओं का नियमित निरीक्षण कर रहे हैं? बीमार और मृत गोवंश को लेकर जिम्मेदारी किसकी है? अब जरूरत है कि संबंधित अधिकारी मौके की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाएं और यदि लापरवाही मिली तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो। आपकी क्या राय है? क्या गौशालाओं की ऐसी स्थिति पर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए और इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। #जालौन #कुठौंद #ईटो #ईटोगौशाला #ग्रामपंचायत #कुठौंदब्लॉक #जालौनन्यूज #उरई #कोंच #कालपी #UPNews #JalaunNews #BreakingNews #ViralNews #NewsUpdate #प्रशासन #डीएम #सीडीओ

Kalpi, Jalaun | Aug 11, 2026

19 लाख का मरघट, साल भर भी नहीं टिका और उसी की फोटो लगाकर फिर 24.50 लाख का खेल?

छिरिया सलेमपुर में सरकारी निर्माण पर बड़ा सवाल—पहले 19.43 लाख खर्च, अब उसी मरघट की फोटो लगाकर फिर लाखों की धनराशि का प्रस्ताव; रकम फिलहाल पेंडिंग

जनपद जालौन के जालौन ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत छिरिया सलेमपुर में सरकारी धन से बनाए गए अंत्येष्टि स्थल की हालत और सरकारी रिकॉर्ड ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
 जिस मरघट के निर्माण पर करीब 19.43 लाख रुपये खर्च होना दर्ज है, उसमें निर्माण के कुछ ही समय बाद दरारें दिखाई दे रही हैं।
 सवाल यह है कि जब निर्माण अभी नया है और उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं, तो उसी मरघट की तस्वीर लगाकर दोबारा लगभग 20 से 24.50 लाख रुपये की धनराशि के लिए रिकॉर्ड क्यों तैयार किया गया?

पहले 19.43 लाख खर्च, अब उसी जगह फिर लाखों का प्रस्ताव!

मेरी पंचायत पर उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार छिरिया सलेमपुर ग्राम पंचायत में अंत्येष्टि स्थल से जुड़े निर्माण कार्य में 19,43,879 रुपये का व्यय दर्ज है, जबकि अनुमानित लागत 20 लाख रुपये दिखाई गई है।
 कार्य को पूर्ण भी दर्शाया गया है।

लेकिन मौके पर निर्माण की स्थिति देखकर गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
 लैंटर के नीचे की पट्टियों और निर्माण के कुछ हिस्सों में दरारें दिखाई दे रही हैं।

यानी निर्माण पुराना होने की बात नहीं, बल्कि सवाल यह है कि साल भर भी पूरा नहीं हुआ और निर्माण में दरारें कैसे आ गईं?

 सबसे बड़ा सवाल—उसी मरघट की फोटो फिर क्यों?

मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिस मरघट का निर्माण पहले ही हो चुका है, उसी स्थान की फोटो लगाकर ग्राम पंचायत के ऑनलाइन रिकॉर्ड में फिर एक नए कार्य के लिए लगभग 20 से 24.50 लाख रुपये की अनुमानित धनराशि दिखाई गई है।

उपलब्ध स्क्रीनशॉट में दूसरे कार्य की अनुमानित लागत 24,50,000 रुपये, पंजीकरण की तारीख 28 जुलाई 2026 और व्यय ₹0 दर्ज है।
 कार्य वर्तमान में चल रहा/प्रस्तावित स्थिति में दिखाई दे रहा है।

इसका मतलब यह है कि फिलहाल इस नए कार्य की धनराशि खर्च होना रिकॉर्ड में नहीं दिख रहा और रकम पेंडिंग स्थिति में है।

यहीं से बड़ा सवाल पैदा होता है—
जब उसी जगह पहले से करीब 19 लाख रुपये खर्च करके मरघट बनाया जा चुका है, तो फिर उसी मरघट की फोटो लगाकर दोबारा 20-24 लाख रुपये के नए कार्य का रिकॉर्ड क्यों तैयार किया गया?

अगर समय रहते सवाल नहीं उठता तो...?
आज अगर इस मामले पर सवाल नहीं उठाया जाता और रिकॉर्ड की पड़ताल नहीं की जाती, तो आशंका थी कि आने वाले दिनों में उसी स्थान पर दोबारा लाखों रुपये की धनराशि स्वीकृत या खर्च की दिशा में आगे बढ़ सकती थी।

फिलहाल उपलब्ध रिकॉर्ड में इस नए कार्य पर ₹0 व्यय दिखाई दे रहा है। 
इसलिए अब जरूरत है कि संबंधित अधिकारी धनराशि जारी होने से पहले ही पूरे मामले की जांच करें।

क्या पहले से बने अंत्येष्टि स्थल की तकनीकी जांच हुई है?

क्या पुराने कार्य की एमबी और भुगतान की जांच हुई?

क्या नए प्रस्ताव में उसी पुराने निर्माण की फोटो इस्तेमाल की गई?

क्या दोनों कार्यों का एस्टीमेट अलग-अलग है?

और सबसे महत्वपूर्ण—जब पुराना निर्माण मौजूद है तो उसी स्थान पर फिर 24.50 लाख रुपये का नया काम आखिर किस आधार पर प्रस्तावित किया गया?

जांच हुई तो खुल सकती है पूरी तस्वीर
इस मामले में सीधे तौर पर किसी को दोषी ठहराने के बजाय जरूरी है कि प्रशासन रिकॉर्ड और मौके की संयुक्त जांच कराए। 
पुराने कार्य की एमबी, एस्टीमेट, भुगतान वाउचर, पूर्णता प्रमाणपत्र और नए कार्य के प्रस्ताव की तकनीकी फाइल की जांच की जाए।

अगर जांच में सामने आता है कि एक ही निर्माण को अलग-अलग नाम या फोटो के जरिए दोबारा धनराशि लेने का प्रयास किया गया, तो यह बेहद गंभीर मामला होगा और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के साथ सरकारी धन की सुरक्षा भी जरूरी होगी।

जनता से सीधा सवाल

19 लाख रुपये में बना मरघट, साल भर भी नहीं हुआ और दरारें सामने आ गईं। 
अब उसी मरघट की फोटो लगाकर फिर करीब 20 से 24.50 लाख रुपये का काम रिकॉर्ड में दिखाई दे रहा है, जबकि फिलहाल खर्च ₹0 दर्ज है।

आखिर एक ही मरघट पर बार-बार सरकारी धन क्यों?

अगर समय रहते यह मामला सामने नहीं आता तो क्या आने वाले दिनों में फिर लाखों रुपये उसी जगह खर्च हो जाते?

आपकी क्या राय है?
 क्या यह सिर्फ रिकॉर्ड की गलती है या इसके पीछे कोई बड़ा खेल हो सकता है? 
अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए।

कागजों में कुछ और, जमीन पर कुछ और—अब जांच बताएगी असली सच।

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19 लाख का मरघट, साल भर भी नहीं टिका और उसी की फोटो लगाकर फिर 24.50 लाख का खेल? छिरिया सलेमपुर में सरकारी निर्माण पर बड़ा सवाल—पहले 19.43 लाख खर्च, अब उसी मरघट की फोटो लगाकर फिर लाखों की धनराशि का प्रस्ताव; रकम फिलहाल पेंडिंग जनपद जालौन के जालौन ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत छिरिया सलेमपुर में सरकारी धन से बनाए गए अंत्येष्टि स्थल की हालत और सरकारी रिकॉर्ड ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस मरघट के निर्माण पर करीब 19.43 लाख रुपये खर्च होना दर्ज है, उसमें निर्माण के कुछ ही समय बाद दरारें दिखाई दे रही हैं। सवाल यह है कि जब निर्माण अभी नया है और उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं, तो उसी मरघट की तस्वीर लगाकर दोबारा लगभग 20 से 24.50 लाख रुपये की धनराशि के लिए रिकॉर्ड क्यों तैयार किया गया? पहले 19.43 लाख खर्च, अब उसी जगह फिर लाखों का प्रस्ताव! मेरी पंचायत पर उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार छिरिया सलेमपुर ग्राम पंचायत में अंत्येष्टि स्थल से जुड़े निर्माण कार्य में 19,43,879 रुपये का व्यय दर्ज है, जबकि अनुमानित लागत 20 लाख रुपये दिखाई गई है। कार्य को पूर्ण भी दर्शाया गया है। लेकिन मौके पर निर्माण की स्थिति देखकर गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। लैंटर के नीचे की पट्टियों और निर्माण के कुछ हिस्सों में दरारें दिखाई दे रही हैं। यानी निर्माण पुराना होने की बात नहीं, बल्कि सवाल यह है कि साल भर भी पूरा नहीं हुआ और निर्माण में दरारें कैसे आ गईं? सबसे बड़ा सवाल—उसी मरघट की फोटो फिर क्यों? मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिस मरघट का निर्माण पहले ही हो चुका है, उसी स्थान की फोटो लगाकर ग्राम पंचायत के ऑनलाइन रिकॉर्ड में फिर एक नए कार्य के लिए लगभग 20 से 24.50 लाख रुपये की अनुमानित धनराशि दिखाई गई है। उपलब्ध स्क्रीनशॉट में दूसरे कार्य की अनुमानित लागत 24,50,000 रुपये, पंजीकरण की तारीख 28 जुलाई 2026 और व्यय ₹0 दर्ज है। कार्य वर्तमान में चल रहा/प्रस्तावित स्थिति में दिखाई दे रहा है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल इस नए कार्य की धनराशि खर्च होना रिकॉर्ड में नहीं दिख रहा और रकम पेंडिंग स्थिति में है। यहीं से बड़ा सवाल पैदा होता है— जब उसी जगह पहले से करीब 19 लाख रुपये खर्च करके मरघट बनाया जा चुका है, तो फिर उसी मरघट की फोटो लगाकर दोबारा 20-24 लाख रुपये के नए कार्य का रिकॉर्ड क्यों तैयार किया गया? अगर समय रहते सवाल नहीं उठता तो...? आज अगर इस मामले पर सवाल नहीं उठाया जाता और रिकॉर्ड की पड़ताल नहीं की जाती, तो आशंका थी कि आने वाले दिनों में उसी स्थान पर दोबारा लाखों रुपये की धनराशि स्वीकृत या खर्च की दिशा में आगे बढ़ सकती थी। फिलहाल उपलब्ध रिकॉर्ड में इस नए कार्य पर ₹0 व्यय दिखाई दे रहा है। इसलिए अब जरूरत है कि संबंधित अधिकारी धनराशि जारी होने से पहले ही पूरे मामले की जांच करें। क्या पहले से बने अंत्येष्टि स्थल की तकनीकी जांच हुई है? क्या पुराने कार्य की एमबी और भुगतान की जांच हुई? क्या नए प्रस्ताव में उसी पुराने निर्माण की फोटो इस्तेमाल की गई? क्या दोनों कार्यों का एस्टीमेट अलग-अलग है? और सबसे महत्वपूर्ण—जब पुराना निर्माण मौजूद है तो उसी स्थान पर फिर 24.50 लाख रुपये का नया काम आखिर किस आधार पर प्रस्तावित किया गया? जांच हुई तो खुल सकती है पूरी तस्वीर इस मामले में सीधे तौर पर किसी को दोषी ठहराने के बजाय जरूरी है कि प्रशासन रिकॉर्ड और मौके की संयुक्त जांच कराए। पुराने कार्य की एमबी, एस्टीमेट, भुगतान वाउचर, पूर्णता प्रमाणपत्र और नए कार्य के प्रस्ताव की तकनीकी फाइल की जांच की जाए। अगर जांच में सामने आता है कि एक ही निर्माण को अलग-अलग नाम या फोटो के जरिए दोबारा धनराशि लेने का प्रयास किया गया, तो यह बेहद गंभीर मामला होगा और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के साथ सरकारी धन की सुरक्षा भी जरूरी होगी। जनता से सीधा सवाल 19 लाख रुपये में बना मरघट, साल भर भी नहीं हुआ और दरारें सामने आ गईं। अब उसी मरघट की फोटो लगाकर फिर करीब 20 से 24.50 लाख रुपये का काम रिकॉर्ड में दिखाई दे रहा है, जबकि फिलहाल खर्च ₹0 दर्ज है। आखिर एक ही मरघट पर बार-बार सरकारी धन क्यों? अगर समय रहते यह मामला सामने नहीं आता तो क्या आने वाले दिनों में फिर लाखों रुपये उसी जगह खर्च हो जाते? आपकी क्या राय है? क्या यह सिर्फ रिकॉर्ड की गलती है या इसके पीछे कोई बड़ा खेल हो सकता है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए। कागजों में कुछ और, जमीन पर कुछ और—अब जांच बताएगी असली सच। #Jalaun #JalaunNews #ChhiriyaSalempur #GramPanchayat #JalaunBlock #GovernmentFund #PanchayatVibhag #PanchayatiRaj #BDOJalaun #DPROJalaun #CDOJalaun #DMJalaun #JalaunAdministration #GramPanchayatSecretary #GramPradhan #DevelopmentWork #GovernmentConstruction #Corruption #Accountability #JalaunCorruption #BreakingNews #LocalNews

Kalpi, Jalaun | Aug 10, 2026

गरीब की झोपड़ी पर कब पड़ेगी सरकार की नजर?

 आवास योजना के दावों के बीच कच्चे मकान में जिंदगी काट रहा भूमिहीन परिवार!

नदीगांव ब्लॉक के कुठौंदा गांव से गरीब परिवार की दर्दनाक दास्तान

सरकार की योजनाओं में गरीबों को पक्का आशियाना देने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। 
प्रधानमंत्री आवास योजना से लेकर तमाम सरकारी योजनाओं के जरिए जरूरतमंद परिवारों को छत उपलब्ध कराने की बात कही जाती है। 
लेकिन नदीगांव ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुठौंदा से सामने आई एक तस्वीर इन दावों पर कई सवाल खड़े कर रही है।

गांव की रहने वाली मुन्नी देवी पत्नी स्वर्गीय बाबूराम लुहार का परिवार आज भी कच्चे मकान में रहने को मजबूर बताया जा रहा है। 
परिवार के मुताबिक उनके चार बच्चे थे, जिनमें एक बच्चे की मृत्यु हो चुकी है, जबकि तीन बच्चे मेहनत-मजदूरी कर किसी तरह परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।

बताया गया कि परिवार भूमिहीन भी है।
 ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब परिवार के पास अपनी जमीन तक नहीं है और आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर बताई जा रही है, तो आखिर उसे सरकारी आवास योजना का लाभ क्यों नहीं मिल सका?

 सबसे बड़ा सवाल—आखिर गरीब की सुनवाई क्यों नहीं?

क्या गरीब परिवार वास्तव में आवास योजना के मानकों में पात्र नहीं है?

अगर पात्र है तो अब तक आवास क्यों नहीं मिला?

क्या जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों ने परिवार की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया?

क्या ग्राम पंचायत स्तर पर आवास के लिए परिवार का नाम पात्रता सूची में शामिल किया गया?

अगर नाम शामिल नहीं किया गया तो उसका कारण क्या है?

क्या किसी जिम्मेदार अधिकारी ने इस परिवार के घर पहुंचकर उसकी स्थिति देखी?

सरकार गरीबों को पक्की छत देने की बात कर रही है, लेकिन अगर वास्तव में कोई भूमिहीन और जरूरतमंद परिवार आज भी कच्चे मकान में रहने को मजबूर है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

यह मामला केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंद तक पहुंच रहा है या नहीं, इस सवाल से भी जुड़ा है।

 वीडियो को अंत तक जरूर देखिए और सुनिए मुन्नी देवी के परिवार की पूरी दास्तान।

आप भी वीडियो देखने के बाद अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें।

 क्या आपके गांव में भी ऐसा कोई गरीब परिवार है, जिसे पात्र होने के बावजूद अभी तक आवास नहीं मिला?
कमेंट में गांव का नाम और समस्या जरूर बताइए।
 हमारी टीम मामले को सामने लाने का प्रयास करेगी।

हो सकता है आपकी एक आवाज किसी जरूरतमंद परिवार के सिर पर पक्की छत दिलाने की वजह बन जाए।

 अब सवाल सिर्फ आवास का नहीं, सरकारी योजनाओं के वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचने का है।

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गरीब की झोपड़ी पर कब पड़ेगी सरकार की नजर? आवास योजना के दावों के बीच कच्चे मकान में जिंदगी काट रहा भूमिहीन परिवार! नदीगांव ब्लॉक के कुठौंदा गांव से गरीब परिवार की दर्दनाक दास्तान सरकार की योजनाओं में गरीबों को पक्का आशियाना देने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना से लेकर तमाम सरकारी योजनाओं के जरिए जरूरतमंद परिवारों को छत उपलब्ध कराने की बात कही जाती है। लेकिन नदीगांव ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुठौंदा से सामने आई एक तस्वीर इन दावों पर कई सवाल खड़े कर रही है। गांव की रहने वाली मुन्नी देवी पत्नी स्वर्गीय बाबूराम लुहार का परिवार आज भी कच्चे मकान में रहने को मजबूर बताया जा रहा है। परिवार के मुताबिक उनके चार बच्चे थे, जिनमें एक बच्चे की मृत्यु हो चुकी है, जबकि तीन बच्चे मेहनत-मजदूरी कर किसी तरह परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। बताया गया कि परिवार भूमिहीन भी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब परिवार के पास अपनी जमीन तक नहीं है और आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर बताई जा रही है, तो आखिर उसे सरकारी आवास योजना का लाभ क्यों नहीं मिल सका? सबसे बड़ा सवाल—आखिर गरीब की सुनवाई क्यों नहीं? क्या गरीब परिवार वास्तव में आवास योजना के मानकों में पात्र नहीं है? अगर पात्र है तो अब तक आवास क्यों नहीं मिला? क्या जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों ने परिवार की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया? क्या ग्राम पंचायत स्तर पर आवास के लिए परिवार का नाम पात्रता सूची में शामिल किया गया? अगर नाम शामिल नहीं किया गया तो उसका कारण क्या है? क्या किसी जिम्मेदार अधिकारी ने इस परिवार के घर पहुंचकर उसकी स्थिति देखी? सरकार गरीबों को पक्की छत देने की बात कर रही है, लेकिन अगर वास्तव में कोई भूमिहीन और जरूरतमंद परिवार आज भी कच्चे मकान में रहने को मजबूर है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है? यह मामला केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंद तक पहुंच रहा है या नहीं, इस सवाल से भी जुड़ा है। वीडियो को अंत तक जरूर देखिए और सुनिए मुन्नी देवी के परिवार की पूरी दास्तान। आप भी वीडियो देखने के बाद अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें। क्या आपके गांव में भी ऐसा कोई गरीब परिवार है, जिसे पात्र होने के बावजूद अभी तक आवास नहीं मिला? कमेंट में गांव का नाम और समस्या जरूर बताइए। हमारी टीम मामले को सामने लाने का प्रयास करेगी। हो सकता है आपकी एक आवाज किसी जरूरतमंद परिवार के सिर पर पक्की छत दिलाने की वजह बन जाए। अब सवाल सिर्फ आवास का नहीं, सरकारी योजनाओं के वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचने का है। #कुठौंदा #नदीगांव #जालौन #आवासयोजना #प्रधानमंत्रीआवासयोजना #PMAY #सरकारीयोजना #जालौनन्यूज #नदीगांवब्लॉक #ग्रामपंचायत #ग्रामीणभारत #ग्रामीणन्यूज #गरीबोंकीआवाज #सरकारकीयोजना #विकासकेदावे #ग्राउंडरिपोर्ट #ग्राउंडजीरो #बड़ीखबर #ब्रेकिंगन्यूज #लेटेस्टन्यूज #हिंदीसमाचार #यूपी_न्यूज #UPNews #JalaunNews #NewsUpdate #ViralNews #TrendingNews

Kalpi, Jalaun | Aug 10, 2026