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ईटो गौशाला में गोवंश की बदहाली, दो गायों की मौत का दावा! कुठौंद ब्लॉक की ग्राम पंचायत ईटो स्थित अस्थाई गौवंश आश्रय स्थल की तस्वीरें व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं। यहां दो गायों के मृत पाए जाने और दो बछिया समेत एक गाय के बीमार होने की बात सामने आई है। बीमार गोवंश की हालत देखकर देखरेख और इलाज की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। गौशाला के गेट के पास से लेकर अंदर तक गंदगी का अंबार दिखाई दे रहा है। सैकड़ों गोवंश के बीच साफ-सफाई और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि गोवंश के संरक्षण और चारे-पानी के लिए आने वाला सरकारी धन आखिर कहां खर्च हो रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारी गौशालाओं का नियमित निरीक्षण कर रहे हैं? बीमार और मृत गोवंश को लेकर जिम्मेदारी किसकी है? अब जरूरत है कि संबंधित अधिकारी मौके की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाएं और यदि लापरवाही मिली तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो। आपकी क्या राय है? क्या गौशालाओं की ऐसी स्थिति पर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए और इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। #जालौन #कुठौंद #ईटो #ईटोगौशाला #ग्रामपंचायत #कुठौंदब्लॉक #जालौनन्यूज #उरई #कोंच #कालपी #UPNews #JalaunNews #BreakingNews #ViralNews #NewsUpdate #प्रशासन #डीएम #सीडीओ

Kalpi, Jalaun | Aug 11, 2026

MORE NEWS

19 लाख का मरघट, साल भर भी नहीं टिका और उसी की फोटो लगाकर फिर 24.50 लाख का खेल?

छिरिया सलेमपुर में सरकारी निर्माण पर बड़ा सवाल—पहले 19.43 लाख खर्च, अब उसी मरघट की फोटो लगाकर फिर लाखों की धनराशि का प्रस्ताव; रकम फिलहाल पेंडिंग

जनपद जालौन के जालौन ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत छिरिया सलेमपुर में सरकारी धन से बनाए गए अंत्येष्टि स्थल की हालत और सरकारी रिकॉर्ड ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
 जिस मरघट के निर्माण पर करीब 19.43 लाख रुपये खर्च होना दर्ज है, उसमें निर्माण के कुछ ही समय बाद दरारें दिखाई दे रही हैं।
 सवाल यह है कि जब निर्माण अभी नया है और उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं, तो उसी मरघट की तस्वीर लगाकर दोबारा लगभग 20 से 24.50 लाख रुपये की धनराशि के लिए रिकॉर्ड क्यों तैयार किया गया?

पहले 19.43 लाख खर्च, अब उसी जगह फिर लाखों का प्रस्ताव!

मेरी पंचायत पर उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार छिरिया सलेमपुर ग्राम पंचायत में अंत्येष्टि स्थल से जुड़े निर्माण कार्य में 19,43,879 रुपये का व्यय दर्ज है, जबकि अनुमानित लागत 20 लाख रुपये दिखाई गई है।
 कार्य को पूर्ण भी दर्शाया गया है।

लेकिन मौके पर निर्माण की स्थिति देखकर गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
 लैंटर के नीचे की पट्टियों और निर्माण के कुछ हिस्सों में दरारें दिखाई दे रही हैं।

यानी निर्माण पुराना होने की बात नहीं, बल्कि सवाल यह है कि साल भर भी पूरा नहीं हुआ और निर्माण में दरारें कैसे आ गईं?

 सबसे बड़ा सवाल—उसी मरघट की फोटो फिर क्यों?

मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिस मरघट का निर्माण पहले ही हो चुका है, उसी स्थान की फोटो लगाकर ग्राम पंचायत के ऑनलाइन रिकॉर्ड में फिर एक नए कार्य के लिए लगभग 20 से 24.50 लाख रुपये की अनुमानित धनराशि दिखाई गई है।

उपलब्ध स्क्रीनशॉट में दूसरे कार्य की अनुमानित लागत 24,50,000 रुपये, पंजीकरण की तारीख 28 जुलाई 2026 और व्यय ₹0 दर्ज है।
 कार्य वर्तमान में चल रहा/प्रस्तावित स्थिति में दिखाई दे रहा है।

इसका मतलब यह है कि फिलहाल इस नए कार्य की धनराशि खर्च होना रिकॉर्ड में नहीं दिख रहा और रकम पेंडिंग स्थिति में है।

यहीं से बड़ा सवाल पैदा होता है—
जब उसी जगह पहले से करीब 19 लाख रुपये खर्च करके मरघट बनाया जा चुका है, तो फिर उसी मरघट की फोटो लगाकर दोबारा 20-24 लाख रुपये के नए कार्य का रिकॉर्ड क्यों तैयार किया गया?

अगर समय रहते सवाल नहीं उठता तो...?
आज अगर इस मामले पर सवाल नहीं उठाया जाता और रिकॉर्ड की पड़ताल नहीं की जाती, तो आशंका थी कि आने वाले दिनों में उसी स्थान पर दोबारा लाखों रुपये की धनराशि स्वीकृत या खर्च की दिशा में आगे बढ़ सकती थी।

फिलहाल उपलब्ध रिकॉर्ड में इस नए कार्य पर ₹0 व्यय दिखाई दे रहा है। 
इसलिए अब जरूरत है कि संबंधित अधिकारी धनराशि जारी होने से पहले ही पूरे मामले की जांच करें।

क्या पहले से बने अंत्येष्टि स्थल की तकनीकी जांच हुई है?

क्या पुराने कार्य की एमबी और भुगतान की जांच हुई?

क्या नए प्रस्ताव में उसी पुराने निर्माण की फोटो इस्तेमाल की गई?

क्या दोनों कार्यों का एस्टीमेट अलग-अलग है?

और सबसे महत्वपूर्ण—जब पुराना निर्माण मौजूद है तो उसी स्थान पर फिर 24.50 लाख रुपये का नया काम आखिर किस आधार पर प्रस्तावित किया गया?

जांच हुई तो खुल सकती है पूरी तस्वीर
इस मामले में सीधे तौर पर किसी को दोषी ठहराने के बजाय जरूरी है कि प्रशासन रिकॉर्ड और मौके की संयुक्त जांच कराए। 
पुराने कार्य की एमबी, एस्टीमेट, भुगतान वाउचर, पूर्णता प्रमाणपत्र और नए कार्य के प्रस्ताव की तकनीकी फाइल की जांच की जाए।

अगर जांच में सामने आता है कि एक ही निर्माण को अलग-अलग नाम या फोटो के जरिए दोबारा धनराशि लेने का प्रयास किया गया, तो यह बेहद गंभीर मामला होगा और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के साथ सरकारी धन की सुरक्षा भी जरूरी होगी।

जनता से सीधा सवाल

19 लाख रुपये में बना मरघट, साल भर भी नहीं हुआ और दरारें सामने आ गईं। 
अब उसी मरघट की फोटो लगाकर फिर करीब 20 से 24.50 लाख रुपये का काम रिकॉर्ड में दिखाई दे रहा है, जबकि फिलहाल खर्च ₹0 दर्ज है।

आखिर एक ही मरघट पर बार-बार सरकारी धन क्यों?

अगर समय रहते यह मामला सामने नहीं आता तो क्या आने वाले दिनों में फिर लाखों रुपये उसी जगह खर्च हो जाते?

आपकी क्या राय है?
 क्या यह सिर्फ रिकॉर्ड की गलती है या इसके पीछे कोई बड़ा खेल हो सकता है? 
अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए।

कागजों में कुछ और, जमीन पर कुछ और—अब जांच बताएगी असली सच।

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19 लाख का मरघट, साल भर भी नहीं टिका और उसी की फोटो लगाकर फिर 24.50 लाख का खेल? छिरिया सलेमपुर में सरकारी निर्माण पर बड़ा सवाल—पहले 19.43 लाख खर्च, अब उसी मरघट की फोटो लगाकर फिर लाखों की धनराशि का प्रस्ताव; रकम फिलहाल पेंडिंग जनपद जालौन के जालौन ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत छिरिया सलेमपुर में सरकारी धन से बनाए गए अंत्येष्टि स्थल की हालत और सरकारी रिकॉर्ड ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस मरघट के निर्माण पर करीब 19.43 लाख रुपये खर्च होना दर्ज है, उसमें निर्माण के कुछ ही समय बाद दरारें दिखाई दे रही हैं। सवाल यह है कि जब निर्माण अभी नया है और उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं, तो उसी मरघट की तस्वीर लगाकर दोबारा लगभग 20 से 24.50 लाख रुपये की धनराशि के लिए रिकॉर्ड क्यों तैयार किया गया? पहले 19.43 लाख खर्च, अब उसी जगह फिर लाखों का प्रस्ताव! मेरी पंचायत पर उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार छिरिया सलेमपुर ग्राम पंचायत में अंत्येष्टि स्थल से जुड़े निर्माण कार्य में 19,43,879 रुपये का व्यय दर्ज है, जबकि अनुमानित लागत 20 लाख रुपये दिखाई गई है। कार्य को पूर्ण भी दर्शाया गया है। लेकिन मौके पर निर्माण की स्थिति देखकर गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। लैंटर के नीचे की पट्टियों और निर्माण के कुछ हिस्सों में दरारें दिखाई दे रही हैं। यानी निर्माण पुराना होने की बात नहीं, बल्कि सवाल यह है कि साल भर भी पूरा नहीं हुआ और निर्माण में दरारें कैसे आ गईं? सबसे बड़ा सवाल—उसी मरघट की फोटो फिर क्यों? मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिस मरघट का निर्माण पहले ही हो चुका है, उसी स्थान की फोटो लगाकर ग्राम पंचायत के ऑनलाइन रिकॉर्ड में फिर एक नए कार्य के लिए लगभग 20 से 24.50 लाख रुपये की अनुमानित धनराशि दिखाई गई है। उपलब्ध स्क्रीनशॉट में दूसरे कार्य की अनुमानित लागत 24,50,000 रुपये, पंजीकरण की तारीख 28 जुलाई 2026 और व्यय ₹0 दर्ज है। कार्य वर्तमान में चल रहा/प्रस्तावित स्थिति में दिखाई दे रहा है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल इस नए कार्य की धनराशि खर्च होना रिकॉर्ड में नहीं दिख रहा और रकम पेंडिंग स्थिति में है। यहीं से बड़ा सवाल पैदा होता है— जब उसी जगह पहले से करीब 19 लाख रुपये खर्च करके मरघट बनाया जा चुका है, तो फिर उसी मरघट की फोटो लगाकर दोबारा 20-24 लाख रुपये के नए कार्य का रिकॉर्ड क्यों तैयार किया गया? अगर समय रहते सवाल नहीं उठता तो...? आज अगर इस मामले पर सवाल नहीं उठाया जाता और रिकॉर्ड की पड़ताल नहीं की जाती, तो आशंका थी कि आने वाले दिनों में उसी स्थान पर दोबारा लाखों रुपये की धनराशि स्वीकृत या खर्च की दिशा में आगे बढ़ सकती थी। फिलहाल उपलब्ध रिकॉर्ड में इस नए कार्य पर ₹0 व्यय दिखाई दे रहा है। इसलिए अब जरूरत है कि संबंधित अधिकारी धनराशि जारी होने से पहले ही पूरे मामले की जांच करें। क्या पहले से बने अंत्येष्टि स्थल की तकनीकी जांच हुई है? क्या पुराने कार्य की एमबी और भुगतान की जांच हुई? क्या नए प्रस्ताव में उसी पुराने निर्माण की फोटो इस्तेमाल की गई? क्या दोनों कार्यों का एस्टीमेट अलग-अलग है? और सबसे महत्वपूर्ण—जब पुराना निर्माण मौजूद है तो उसी स्थान पर फिर 24.50 लाख रुपये का नया काम आखिर किस आधार पर प्रस्तावित किया गया? जांच हुई तो खुल सकती है पूरी तस्वीर इस मामले में सीधे तौर पर किसी को दोषी ठहराने के बजाय जरूरी है कि प्रशासन रिकॉर्ड और मौके की संयुक्त जांच कराए। पुराने कार्य की एमबी, एस्टीमेट, भुगतान वाउचर, पूर्णता प्रमाणपत्र और नए कार्य के प्रस्ताव की तकनीकी फाइल की जांच की जाए। अगर जांच में सामने आता है कि एक ही निर्माण को अलग-अलग नाम या फोटो के जरिए दोबारा धनराशि लेने का प्रयास किया गया, तो यह बेहद गंभीर मामला होगा और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के साथ सरकारी धन की सुरक्षा भी जरूरी होगी। जनता से सीधा सवाल 19 लाख रुपये में बना मरघट, साल भर भी नहीं हुआ और दरारें सामने आ गईं। अब उसी मरघट की फोटो लगाकर फिर करीब 20 से 24.50 लाख रुपये का काम रिकॉर्ड में दिखाई दे रहा है, जबकि फिलहाल खर्च ₹0 दर्ज है। आखिर एक ही मरघट पर बार-बार सरकारी धन क्यों? अगर समय रहते यह मामला सामने नहीं आता तो क्या आने वाले दिनों में फिर लाखों रुपये उसी जगह खर्च हो जाते? आपकी क्या राय है? क्या यह सिर्फ रिकॉर्ड की गलती है या इसके पीछे कोई बड़ा खेल हो सकता है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए। कागजों में कुछ और, जमीन पर कुछ और—अब जांच बताएगी असली सच। #Jalaun #JalaunNews #ChhiriyaSalempur #GramPanchayat #JalaunBlock #GovernmentFund #PanchayatVibhag #PanchayatiRaj #BDOJalaun #DPROJalaun #CDOJalaun #DMJalaun #JalaunAdministration #GramPanchayatSecretary #GramPradhan #DevelopmentWork #GovernmentConstruction #Corruption #Accountability #JalaunCorruption #BreakingNews #LocalNews

Kalpi, Jalaun | Aug 10, 2026

गरीब की झोपड़ी पर कब पड़ेगी सरकार की नजर?

 आवास योजना के दावों के बीच कच्चे मकान में जिंदगी काट रहा भूमिहीन परिवार!

नदीगांव ब्लॉक के कुठौंदा गांव से गरीब परिवार की दर्दनाक दास्तान

सरकार की योजनाओं में गरीबों को पक्का आशियाना देने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। 
प्रधानमंत्री आवास योजना से लेकर तमाम सरकारी योजनाओं के जरिए जरूरतमंद परिवारों को छत उपलब्ध कराने की बात कही जाती है। 
लेकिन नदीगांव ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुठौंदा से सामने आई एक तस्वीर इन दावों पर कई सवाल खड़े कर रही है।

गांव की रहने वाली मुन्नी देवी पत्नी स्वर्गीय बाबूराम लुहार का परिवार आज भी कच्चे मकान में रहने को मजबूर बताया जा रहा है। 
परिवार के मुताबिक उनके चार बच्चे थे, जिनमें एक बच्चे की मृत्यु हो चुकी है, जबकि तीन बच्चे मेहनत-मजदूरी कर किसी तरह परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।

बताया गया कि परिवार भूमिहीन भी है।
 ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब परिवार के पास अपनी जमीन तक नहीं है और आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर बताई जा रही है, तो आखिर उसे सरकारी आवास योजना का लाभ क्यों नहीं मिल सका?

 सबसे बड़ा सवाल—आखिर गरीब की सुनवाई क्यों नहीं?

क्या गरीब परिवार वास्तव में आवास योजना के मानकों में पात्र नहीं है?

अगर पात्र है तो अब तक आवास क्यों नहीं मिला?

क्या जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों ने परिवार की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया?

क्या ग्राम पंचायत स्तर पर आवास के लिए परिवार का नाम पात्रता सूची में शामिल किया गया?

अगर नाम शामिल नहीं किया गया तो उसका कारण क्या है?

क्या किसी जिम्मेदार अधिकारी ने इस परिवार के घर पहुंचकर उसकी स्थिति देखी?

सरकार गरीबों को पक्की छत देने की बात कर रही है, लेकिन अगर वास्तव में कोई भूमिहीन और जरूरतमंद परिवार आज भी कच्चे मकान में रहने को मजबूर है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

यह मामला केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंद तक पहुंच रहा है या नहीं, इस सवाल से भी जुड़ा है।

 वीडियो को अंत तक जरूर देखिए और सुनिए मुन्नी देवी के परिवार की पूरी दास्तान।

आप भी वीडियो देखने के बाद अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें।

 क्या आपके गांव में भी ऐसा कोई गरीब परिवार है, जिसे पात्र होने के बावजूद अभी तक आवास नहीं मिला?
कमेंट में गांव का नाम और समस्या जरूर बताइए।
 हमारी टीम मामले को सामने लाने का प्रयास करेगी।

हो सकता है आपकी एक आवाज किसी जरूरतमंद परिवार के सिर पर पक्की छत दिलाने की वजह बन जाए।

 अब सवाल सिर्फ आवास का नहीं, सरकारी योजनाओं के वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचने का है।

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गरीब की झोपड़ी पर कब पड़ेगी सरकार की नजर? आवास योजना के दावों के बीच कच्चे मकान में जिंदगी काट रहा भूमिहीन परिवार! नदीगांव ब्लॉक के कुठौंदा गांव से गरीब परिवार की दर्दनाक दास्तान सरकार की योजनाओं में गरीबों को पक्का आशियाना देने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना से लेकर तमाम सरकारी योजनाओं के जरिए जरूरतमंद परिवारों को छत उपलब्ध कराने की बात कही जाती है। लेकिन नदीगांव ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुठौंदा से सामने आई एक तस्वीर इन दावों पर कई सवाल खड़े कर रही है। गांव की रहने वाली मुन्नी देवी पत्नी स्वर्गीय बाबूराम लुहार का परिवार आज भी कच्चे मकान में रहने को मजबूर बताया जा रहा है। परिवार के मुताबिक उनके चार बच्चे थे, जिनमें एक बच्चे की मृत्यु हो चुकी है, जबकि तीन बच्चे मेहनत-मजदूरी कर किसी तरह परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। बताया गया कि परिवार भूमिहीन भी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब परिवार के पास अपनी जमीन तक नहीं है और आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर बताई जा रही है, तो आखिर उसे सरकारी आवास योजना का लाभ क्यों नहीं मिल सका? सबसे बड़ा सवाल—आखिर गरीब की सुनवाई क्यों नहीं? क्या गरीब परिवार वास्तव में आवास योजना के मानकों में पात्र नहीं है? अगर पात्र है तो अब तक आवास क्यों नहीं मिला? क्या जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों ने परिवार की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया? क्या ग्राम पंचायत स्तर पर आवास के लिए परिवार का नाम पात्रता सूची में शामिल किया गया? अगर नाम शामिल नहीं किया गया तो उसका कारण क्या है? क्या किसी जिम्मेदार अधिकारी ने इस परिवार के घर पहुंचकर उसकी स्थिति देखी? सरकार गरीबों को पक्की छत देने की बात कर रही है, लेकिन अगर वास्तव में कोई भूमिहीन और जरूरतमंद परिवार आज भी कच्चे मकान में रहने को मजबूर है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है? यह मामला केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंद तक पहुंच रहा है या नहीं, इस सवाल से भी जुड़ा है। वीडियो को अंत तक जरूर देखिए और सुनिए मुन्नी देवी के परिवार की पूरी दास्तान। आप भी वीडियो देखने के बाद अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें। क्या आपके गांव में भी ऐसा कोई गरीब परिवार है, जिसे पात्र होने के बावजूद अभी तक आवास नहीं मिला? कमेंट में गांव का नाम और समस्या जरूर बताइए। हमारी टीम मामले को सामने लाने का प्रयास करेगी। हो सकता है आपकी एक आवाज किसी जरूरतमंद परिवार के सिर पर पक्की छत दिलाने की वजह बन जाए। अब सवाल सिर्फ आवास का नहीं, सरकारी योजनाओं के वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचने का है। #कुठौंदा #नदीगांव #जालौन #आवासयोजना #प्रधानमंत्रीआवासयोजना #PMAY #सरकारीयोजना #जालौनन्यूज #नदीगांवब्लॉक #ग्रामपंचायत #ग्रामीणभारत #ग्रामीणन्यूज #गरीबोंकीआवाज #सरकारकीयोजना #विकासकेदावे #ग्राउंडरिपोर्ट #ग्राउंडजीरो #बड़ीखबर #ब्रेकिंगन्यूज #लेटेस्टन्यूज #हिंदीसमाचार #यूपी_न्यूज #UPNews #JalaunNews #NewsUpdate #ViralNews #TrendingNews

Kalpi, Jalaun | Aug 10, 2026

उरई में गूंजा वंदे मातरम्, पुलिस लाइन से निकली भव्य तिरंगा यात्रा

उरई, जालौन हर घर तिरंगा अभियान-2026 के तहत सोमवार को पुलिस लाइन उरई से भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। 
यात्रा में विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएं, शिक्षक, पुलिसकर्मी, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। 
करीब तीन किलोमीटर लंबी यात्रा के दौरान देशभक्ति के नारों से माहौल गूंजता रहा।

तिरंगा यात्रा पुलिस लाइन से निकलकर अंबेडकर चौराहे पहुंची, जहां उरई सदर विधायक, कालपी विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम ने डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। 
यात्रा में डीजे पर देशभक्ति गीत बजते रहे और लोग हाथों में तिरंगा लेकर पैदल चलते हुए ‘वंदे मातरम्’ के नारे लगाते रहे।

यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। 
यात्रा के आगे-पीछे पुलिस बल तैनात रहा, जबकि आपात स्थिति के लिए एंबुलेंस भी साथ रही। पूरे आयोजन में राष्ट्रभक्ति और उत्साह का माहौल नजर आया।

#हरघर_तिरंगा #TirangaYatra #HarGharTiranga2026 #Jalaun #Orai #Urai #TirangaYatra2026 #VandeMataram #Deshbhakti #JalaunNews #OraiNews #BreakingNews #UPNews #तिरंगा_यात्रा

उरई में गूंजा वंदे मातरम्, पुलिस लाइन से निकली भव्य तिरंगा यात्रा उरई, जालौन हर घर तिरंगा अभियान-2026 के तहत सोमवार को पुलिस लाइन उरई से भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। यात्रा में विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएं, शिक्षक, पुलिसकर्मी, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। करीब तीन किलोमीटर लंबी यात्रा के दौरान देशभक्ति के नारों से माहौल गूंजता रहा। तिरंगा यात्रा पुलिस लाइन से निकलकर अंबेडकर चौराहे पहुंची, जहां उरई सदर विधायक, कालपी विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम ने डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। यात्रा में डीजे पर देशभक्ति गीत बजते रहे और लोग हाथों में तिरंगा लेकर पैदल चलते हुए ‘वंदे मातरम्’ के नारे लगाते रहे। यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। यात्रा के आगे-पीछे पुलिस बल तैनात रहा, जबकि आपात स्थिति के लिए एंबुलेंस भी साथ रही। पूरे आयोजन में राष्ट्रभक्ति और उत्साह का माहौल नजर आया। #हरघर_तिरंगा #TirangaYatra #HarGharTiranga2026 #Jalaun #Orai #Urai #TirangaYatra2026 #VandeMataram #Deshbhakti #JalaunNews #OraiNews #BreakingNews #UPNews #तिरंगा_यात्रा

Kalpi, Jalaun | Aug 10, 2026

डकैती से पहले ही पुलिस ने कसा शिकंजा, पांच आरोपी असलहों और औजारों समेत गिरफ्तार

उरई में वारदात की योजना बनाते दबोचे गए पांच आरोपी; दो तमंचे, चार जिंदा कारतूस, हथौड़ी, प्लास, पेचकस, छेनी और आरी ब्लेड बरामद—पुलिस के मुताबिक कई आरोपियों पर पहले से दर्ज हैं मुकदमे

जालौन पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए डकैती की कथित योजना बना रहे पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
 कोतवाली उरई पुलिस की कार्रवाई में आरोपियों के कब्जे से अवैध असलहे, जिंदा कारतूस और वारदात में इस्तेमाल किए जाने वाले औजार बरामद होने का दावा किया गया है। 
पुलिस की इस कार्रवाई से संभावित बड़ी वारदात टलने की बात सामने आई है।

पुलिस के मुताबिक 9 अगस्त 2026 को कोतवाली उरई पुलिस टीम क्षेत्र में चेकिंग कर रही थी। 
इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि कुछ लोग डकैती की योजना बना रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को दबोच लिया।

गिरफ्तार आरोपियों में शाहिद पुत्र हबीब खान उम्र करीब 22 वर्ष निवासी ग्राम गलिया थाना राठ, हमीरपुर, फिरोज पुत्र सैय्यददीन उम्र करीब 23 वर्ष निवासी बुधौलियाना नई बस्ती रामबाग मंदिर के पीछे थाना राठ, नीतेन्द्र उर्फ नीतू पुत्र चरन सिंह उम्र करीब 24 वर्ष निवासी ग्राम औता थाना राठ, हाल निवासी बाहिदपुरा पावरहाउस के सामने राठ, इम्तियाज मंसूरी पुत्र रहीस खान उम्र करीब 21 वर्ष निवासी पठानपुरा थाना राठ तथा राजू ठाकुर पुत्र जगदेव सिंह उम्र करीब 42 वर्ष निवासी बुधौलियाना नई बस्ती रामबाग मंदिर के पीछे थाना राठ शामिल हैं।

असलहों के साथ वारदात के औजार भी बरामद

पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे से दो अवैध तमंचे 315 बोर और चार जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं।
 इसके अलावा पुलिस ने एक हथौड़ी, एक प्लास, दो छोटे-बड़े पेचकस, एक छेनी और एक आरी ब्लेड बरामद करने की बात कही है। 
आरोपियों के पास से आर्टिगा कार संख्या UP 32 ME 5426 भी बरामद होने का पुलिस ने उल्लेख किया है।

बरामद सामान को देखकर पुलिस का दावा है कि आरोपियों के पास केवल हथियार ही नहीं, बल्कि ताला अथवा अन्य सामान तोड़ने-काटने में इस्तेमाल होने वाले औजार भी मौजूद थे।
 पुलिस ने इसे डकैती की तैयारी से जोड़ते हुए कार्रवाई की है।

कई आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी सामने आया

पुलिस की जारी जानकारी में गिरफ्तार आरोपियों के आपराधिक इतिहास का भी उल्लेख किया गया है।
 शाहिद के खिलाफ राठ थाने में चोरी, आर्म्स एक्ट और गैंगस्टर एक्ट समेत कई मुकदमों का उल्लेख है।

वहीं फिरोज के खिलाफ मुस्करा और राठ थानों में चोरी/लूट एवं आर्म्स एक्ट से संबंधित मुकदमों का पुलिस रिकॉर्ड में उल्लेख किया गया है।

सबसे लंबा आपराधिक इतिहास नीतेन्द्र उर्फ नीतू का बताया गया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ चिकासी और राठ थाने में चोरी, नकबजनी, आर्म्स एक्ट तथा गैंगस्टर एक्ट समेत कई मुकदमे दर्ज होने का उल्लेख है।

पुलिस के अनुसार पांचों आरोपियों के खिलाफ वर्तमान मामले में मु0अ0सं0 459/2026, धारा 313 बीएनएस एवं 3/25 आर्म्स एक्ट, थाना कोतवाली उरई के तहत कार्रवाई की जा रही है।

बड़ी वारदात से पहले पुलिस की दबिश ने रोका खेल?

अगर पुलिस के दावे सही पाए जाते हैं तो हथियारों के साथ डकैती में इस्तेमाल होने वाले औजारों की बरामदगी गंभीर सवाल खड़े करती है कि आखिर आरोपी किस वारदात को अंजाम देने की तैयारी में थे और उनका निशाना कौन था? पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर संभावित वारदात, उनके साथियों और उनके संपर्कों की जानकारी जुटा सकती है।

फिलहाल पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजे जाने की कार्रवाई की गई है। 
पुलिस की इस कार्रवाई से यह भी उम्मीद जगी है कि पूछताछ के दौरान क्षेत्र में हुई अन्य आपराधिक घटनाओं से जुड़े सुराग सामने आ सकते हैं।

पुलिस की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

अब देखने वाली बात होगी कि पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में क्या-क्या खुलासा करती है। 
क्या यह गिरोह केवल उरई में वारदात की तैयारी कर रहा था या इसके तार हमीरपुर समेत आसपास के जिलों तक जुड़े हैं? क्या इनके अन्य साथी भी सक्रिय हैं? इन सवालों के जवाब पुलिस की आगे की जांच में सामने आएंगे।

पुलिस टीम की इस कार्रवाई को संभावित डकैती से पहले की गई महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।

नोट: आपराधिक इतिहास और डकैती की योजना से जुड़े तथ्य पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट/दस्तावेज में बताए गए हैं।
 आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।

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डकैती से पहले ही पुलिस ने कसा शिकंजा, पांच आरोपी असलहों और औजारों समेत गिरफ्तार उरई में वारदात की योजना बनाते दबोचे गए पांच आरोपी; दो तमंचे, चार जिंदा कारतूस, हथौड़ी, प्लास, पेचकस, छेनी और आरी ब्लेड बरामद—पुलिस के मुताबिक कई आरोपियों पर पहले से दर्ज हैं मुकदमे जालौन पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए डकैती की कथित योजना बना रहे पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कोतवाली उरई पुलिस की कार्रवाई में आरोपियों के कब्जे से अवैध असलहे, जिंदा कारतूस और वारदात में इस्तेमाल किए जाने वाले औजार बरामद होने का दावा किया गया है। पुलिस की इस कार्रवाई से संभावित बड़ी वारदात टलने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक 9 अगस्त 2026 को कोतवाली उरई पुलिस टीम क्षेत्र में चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि कुछ लोग डकैती की योजना बना रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपियों में शाहिद पुत्र हबीब खान उम्र करीब 22 वर्ष निवासी ग्राम गलिया थाना राठ, हमीरपुर, फिरोज पुत्र सैय्यददीन उम्र करीब 23 वर्ष निवासी बुधौलियाना नई बस्ती रामबाग मंदिर के पीछे थाना राठ, नीतेन्द्र उर्फ नीतू पुत्र चरन सिंह उम्र करीब 24 वर्ष निवासी ग्राम औता थाना राठ, हाल निवासी बाहिदपुरा पावरहाउस के सामने राठ, इम्तियाज मंसूरी पुत्र रहीस खान उम्र करीब 21 वर्ष निवासी पठानपुरा थाना राठ तथा राजू ठाकुर पुत्र जगदेव सिंह उम्र करीब 42 वर्ष निवासी बुधौलियाना नई बस्ती रामबाग मंदिर के पीछे थाना राठ शामिल हैं। असलहों के साथ वारदात के औजार भी बरामद पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे से दो अवैध तमंचे 315 बोर और चार जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं। इसके अलावा पुलिस ने एक हथौड़ी, एक प्लास, दो छोटे-बड़े पेचकस, एक छेनी और एक आरी ब्लेड बरामद करने की बात कही है। आरोपियों के पास से आर्टिगा कार संख्या UP 32 ME 5426 भी बरामद होने का पुलिस ने उल्लेख किया है। बरामद सामान को देखकर पुलिस का दावा है कि आरोपियों के पास केवल हथियार ही नहीं, बल्कि ताला अथवा अन्य सामान तोड़ने-काटने में इस्तेमाल होने वाले औजार भी मौजूद थे। पुलिस ने इसे डकैती की तैयारी से जोड़ते हुए कार्रवाई की है। कई आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी सामने आया पुलिस की जारी जानकारी में गिरफ्तार आरोपियों के आपराधिक इतिहास का भी उल्लेख किया गया है। शाहिद के खिलाफ राठ थाने में चोरी, आर्म्स एक्ट और गैंगस्टर एक्ट समेत कई मुकदमों का उल्लेख है। वहीं फिरोज के खिलाफ मुस्करा और राठ थानों में चोरी/लूट एवं आर्म्स एक्ट से संबंधित मुकदमों का पुलिस रिकॉर्ड में उल्लेख किया गया है। सबसे लंबा आपराधिक इतिहास नीतेन्द्र उर्फ नीतू का बताया गया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ चिकासी और राठ थाने में चोरी, नकबजनी, आर्म्स एक्ट तथा गैंगस्टर एक्ट समेत कई मुकदमे दर्ज होने का उल्लेख है। पुलिस के अनुसार पांचों आरोपियों के खिलाफ वर्तमान मामले में मु0अ0सं0 459/2026, धारा 313 बीएनएस एवं 3/25 आर्म्स एक्ट, थाना कोतवाली उरई के तहत कार्रवाई की जा रही है। बड़ी वारदात से पहले पुलिस की दबिश ने रोका खेल? अगर पुलिस के दावे सही पाए जाते हैं तो हथियारों के साथ डकैती में इस्तेमाल होने वाले औजारों की बरामदगी गंभीर सवाल खड़े करती है कि आखिर आरोपी किस वारदात को अंजाम देने की तैयारी में थे और उनका निशाना कौन था? पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर संभावित वारदात, उनके साथियों और उनके संपर्कों की जानकारी जुटा सकती है। फिलहाल पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजे जाने की कार्रवाई की गई है। पुलिस की इस कार्रवाई से यह भी उम्मीद जगी है कि पूछताछ के दौरान क्षेत्र में हुई अन्य आपराधिक घटनाओं से जुड़े सुराग सामने आ सकते हैं। पुलिस की कार्रवाई पर टिकी निगाहें अब देखने वाली बात होगी कि पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में क्या-क्या खुलासा करती है। क्या यह गिरोह केवल उरई में वारदात की तैयारी कर रहा था या इसके तार हमीरपुर समेत आसपास के जिलों तक जुड़े हैं? क्या इनके अन्य साथी भी सक्रिय हैं? इन सवालों के जवाब पुलिस की आगे की जांच में सामने आएंगे। पुलिस टीम की इस कार्रवाई को संभावित डकैती से पहले की गई महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। नोट: आपराधिक इतिहास और डकैती की योजना से जुड़े तथ्य पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट/दस्तावेज में बताए गए हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। #BreakingNews #Urai #UraiNews #Jalaun #JalaunNews #JalaunPolice #UraiPolice #CrimeNews #CrimeBreaking #Dacoity #DacoityPlan #PoliceAction #PoliceRaid #Arrested #IllegalArms #315Bore #ArmsAct #BNS #Hamirpur #Rath #HamirpurNews #UPPolice #UPNews #BundelkhandNews #Bundelkhand #LatestNews #HindiNews #BigBreaking #JalaunBreaking #CrimeUpdate

Kalpi, Jalaun | Aug 9, 2026