नेत्र देखभाल, नेत्रदान, सर्पदंश, कैंसर एवं एचपीवी टीकाकरण को लेकर जागरूकता कार्यशाला आयोजित ।
“आंखों की देखभाल करें, नेत्रदान का संकल्प लें—किसी के जीवन में रोशनी लाने का उपहार दें”
“सर्पदंश की स्थिति में पीड़ित को तुरंत अस्पताल पहुंचाएं”
“जोनल अस्पताल धर्मशाला में कैंसर के फॉलो-अप उपचार की सुविधा उपलब्ध”
“14 वर्ष पूर्ण कर चुकी तथा 15 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं को एचपीवी टीकाकरण करवाने की अपील”
-डॉ. ओमेश भारती
41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के अंतर्गत जोनल अस्पताल धर्मशाला के सम्मेलन कक्ष में जिला स्तरीय स्वास्थ्य जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ओमेश भारती ने की। इस अवसर पर वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुराधा शर्मा, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.के. सूद, जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अनुराधा तथा जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. दुष्यंत कुमार सहित स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ओमेश भारती ने कहा कि इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य लोगों को आंखों की देखभाल, नेत्रदान, सर्पदंश की स्थिति में समय पर उपचार, कैंसर के फॉलो-अप उपचार तथा एचपीवी टीकाकरण के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि जन-जागरूकता के माध्यम से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से होने वाली मृत्यु एवं जटिलताओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
*आंखों की सुरक्षा के लिए नियमित जांच जरूरी*
इस अवसर पर जोनल अस्पताल धर्मशाला के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र ने आंखों की उचित देखभाल एवं सुरक्षा के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों तथा मधुमेह से पीड़ित मरीजों को वर्ष में कम से कम एक बार आंखों की जांच करवानी चाहिए।
उन्होंने डिजिटल स्क्रीन के अधिक उपयोग से आंखों पर पड़ने वाले प्रभाव से बचने के लिए 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह दी। इसके तहत प्रत्येक 20 मिनट बाद कम से कम 20 फीट दूर किसी वस्तु को 20 सेकंड तक देखने की सलाह दी गई। उन्होंने स्क्रीन टाइम को सीमित करने, संतुलित आहार लेने तथा विटामिन-ए युक्त खाद्य पदार्थ जैसे गाजर, हरी पत्तेदार सब्जियां, दूध एवं पपीता आहार में शामिल करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि धूल एवं तेज धूप से आंखों की सुरक्षा के लिए अच्छी गुणवत्ता के धूप के चश्मे का प्रयोग करें तथा चिकित्सकीय परामर्श के बिना किसी भी प्रकार की आई ड्रॉप का इस्तेमाल न करें। पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और नियमित नेत्र जांच आंखों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण हैं।
*नेत्रदान से किसी के जीवन में आ सकती है रोशनी*
डॉ. शैलेंद्र ने बताया कि मृत्यु के बाद मृतक की आंखें बंद रखनी चाहिए तथा सिर के नीचे तकिया रखकर उसे थोड़ा ऊंचा रखना चाहिए। आंखों को साफ, नम सूती कपड़े से ढककर नमी बनाए रखी जा सकती है।
उन्होंने बताया कि मृत्यु के बाद आंखें निकालने की प्रक्रिया में सामान्यतः 10 से 15 मिनट लगते हैं और इससे चेहरे पर कोई निशान या विकृति नहीं आती।
उन्होंने कहा कि मृत्यु के छह से आठ घंटे के भीतर नेत्रदान किया जा सकता है। नेत्रदाता की मृत्यु के बाद पंखा बंद कर देना चाहिए, पलकों को धीरे से बंद करना चाहिए तथा निकटतम आई बैंक से जल्द संपर्क करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि किसी भी आयु, लिंग अथवा रक्त समूह का व्यक्ति नेत्रदान कर सकता है। कॉर्निया दान के माध्यम से कॉर्नियल अंधत्व से पीड़ित लोगों को दृष्टि प्रदान करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे ग्रामीण एवं जमीनी स्तर तक पहुंचकर लोगों को मोतियाबिंद, ग्लूकोमा तथा कॉर्नियल अंधत्व के बारे में जागरूक करें।
उन्होंने कहा कि नेत्रदान को लेकर समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करना और लोगों को स्वेच्छा से नेत्रदान का संकल्प लेने के लिए प्रेरित करना इस पखवाड़े का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने यह भी सलाह दी कि जो व्यक्ति नेत्रदान का संकल्प लेते हैं, वे अपने परिवार, रिश्तेदारों एवं पड़ोसियों को भी इसकी जानकारी दें, ताकि मृत्यु के बाद समय पर आई बैंक से संपर्क कर नेत्रदान सुनिश्चित किया जा सके।
इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों को नेत्रदान की शपथ भी दिलाई गई। स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता से अपील की कि वे नेत्रदान का संकल्प लेकर किसी जरूरतमंद के जीवन में दृष्टि की रोशनी लाने में अपना योगदान दें।
*जोनल अस्पताल धर्मशाला में कैंसर के फॉलो-अप उपचार की सुविधा*
कार्यशाला के दौरान सीएमओ डॉ. ओमेश भारती ने बताया कि जोनल अस्पताल धर्मशाला तथा सिविल अस्पताल नूरपुर में डे-केयर कैंसर सेंटर की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय, टांडा में कैंसर का उपचार करवा रहे मरीज इन केंद्रों में भी अपने उपचार को जारी रख सकते हैं।
वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुराधा शर्मा ने बताया कि कैंसर के फॉलो-अप उपचार के लिए अस्पताल आने वाले मरीज टांडा से प्राप्त अपनी दवाइयां लेकर अस्पताल आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि मरीजों की सुविधा के लिए वे कमरा नंबर 208 में संपर्क कर सकते हैं, ताकि उपचार के दौरान उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो।
*सर्पदंश की स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचाएं*
कार्यशाला में सर्पा प्रोजेक्ट की श्रीमती अर्चना फुल्ल ने सर्पदंश से बचाव, क्या करें और क्या न करें तथा उपचार के बारे में प्रतिभागियों को विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सर्पदंश की स्थिति में समय बर्बाद किए बिना पीड़ित को तुरंत अस्पताल पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि सर्पदंश की स्थिति में प्रभावित अंग को स्थिर रखें, पीड़ित को शांत रखें तथा हाथ या पैर में पहनी हुई अंगूठी, चूड़ी अथवा अन्य कसने वाली वस्तुओं को तुरंत हटा दें। यदि मरीज बेहोश हो जाए तो उसे बाईं करवट रिकवरी पोजीशन में रखें। आपात स्थिति में 108 एंबुलेंस सेवा की सहायता लेते हुए पीड़ित को नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं।
उन्होंने बताया कि जहरीले सर्प के काटने की स्थिति में एंटी-स्नेक वेनम (ASV) ही प्रमाणित उपचार है, जो सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क उपलब्ध है।
उन्होंने लोगों को आगाह किया कि सर्पदंश के स्थान पर चीरा न लगाएं, जहर चूसने का प्रयास न करें और घाव पर क्रीम, जड़ी-बूटी अथवा किसी रसायन का प्रयोग न करें। प्रभावित अंग पर कसकर कपड़ा या टूर्निकेट न बांधें। घरेलू उपचार, झाड़-फूंक अथवा अन्य अप्रमाणित उपचारों में समय न गंवाएं। उन्होंने कहा कि सांप को पकड़ने अथवा मारने के प्रयास में समय बर्बाद न करें और पीड़ित को चलने न दें, बल्कि सीधे अस्पताल पहुंचाएं।
*एचपीवी टीकाकरण से सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम*
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. दुष्यंत कुमार ने मानव पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) टीके के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि एचपीवी टीकाकरण सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने बताया कि 14 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुकी तथा 15 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क लगाई जा सकती है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ओमेश भारती ने सभी से अपील की कि वे एचपीवी टीकाकरण की उपयोगिता एवं सुरक्षा के बारे में अधिक से अधिक जागरूकता फैलाएं, ताकि अधिक से अधिक पात्र बालिकाएं इस सुविधा का लाभ उठा सकें।
कार्यशाला में रोटरी क्लब, इनरव्हील तथा जागोरी संस्था के सदस्यों ने भी भाग लिया। प्रतिभागियों ने स्वास्थ्य संबंधी इन महत्वपूर्ण विषयों पर प्राप्त जानकारी एवं संदेशों को गांव-गांव तक पहुंचाने तथा समुदाय में जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया, ताकि समय पर उपचार, रोकथाम और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से लोगों की जान बचाई जा सके।