अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियाँ: माहिष्मती घाट पर नियमित योग अभ्यास
आगामी 21 जून को आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के सफल आयोजन एवं व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा माहिष्मती घाट पर विशेष योग अभ्यास सत्र संचालित किया जा रहा है। रविवार 14 जून को भी प्रशासनिक अधिकारी एवं कर्मचारी प्रतिदिन की भाँति योग अभ्यास सत्र में शामिल हुए और विभिन्न योग क्रियाओं का अभ्यास किया।
आयुष विभाग के मार्गदर्शन में 1 जून से जिला प्रशासन के सभी विभाग प्रमुखों एवं अधिकारियों के लिए विशेष योग प्रशिक्षण एवं अभ्यास सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इन सत्रों में प्रतिभागियों को अनुलोम-विलोम, ज्ञान मुद्रा, ध्यान मुद्रा, वज्रासन, श्वासन, नाड़ी शोधन, नाड़ी विभाजन तथा सूर्य नमस्कार सहित अनेक महत्वपूर्ण योगासन एवं प्राणायाम का नियमित अभ्यास कराया जा रहा है।
योग विशेषज्ञों द्वारा योग के शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक लाभों की जानकारी भी दी जा रही है। अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बताया जा रहा है कि नियमित योगाभ्यास से तनाव कम होता है, कार्यक्षमता में वृद्धि होती है तथा स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने में सहायता मिलती है।
जिला प्रशासन ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने तथा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले सामूहिक योग कार्यक्रम में अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया है। यह पहल न केवल स्वास्थ्य संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि समाज में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी प्रभावी साबित हो रही है।
ज्ञान मुद्रा
योग और ध्यान में सबसे प्रसिद्ध हस्तमुद्राओं में से एक है। इसे ज्ञान, एकाग्रता और मानसिक शांति की मुद्रा माना जाता है।
करने की विधि
1. आराम से बैठें (पद्मासन, सुखासन या कुर्सी पर भी बैठ सकते हैं)।
2. तर्जनी (इंडेक्स फिंगर) के अग्रभाग को अंगूठे के अग्रभाग से हल्के से मिलाएँ।
3. बाकी तीन उंगलियाँ सीधी और सहज रखें।
4. हथेलियाँ ऊपर की ओर रखते हुए हाथों को घुटनों पर रखें।
5. सामान्य श्वास लेते हुए ध्यान करें।
संभावित लाभ
’ एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ाने में सहायक।
’ ध्यान के दौरान मन को शांत करने में मददगार।
’ तनाव और मानसिक बेचौनी कम करने में सहायक।
’ आत्म-जागरूकता और ध्यान की गहराई बढ़ाने के लिए पारंपरिक रूप से उपयोग की जाती है।
अवधि
’ प्रतिदिन 15-30 मिनट तक अभ्यास किया जा सकता है।
’ ध्यान या प्राणायाम के साथ करने पर कई लोग इसे अधिक लाभकारी मानते हैं।
सावधानी
ज्ञान मुद्रा सामान्यतः सुरक्षित मानी जाती है। यदि बैठने में असुविधा हो तो कुर्सी पर बैठकर भी इसका अभ्यास किया जा सकता है।
ज्ञान मुद्रा का स्वरूप
अंगूठे और तर्जनी के सिरों को मिलाकर एक छोटा वृत्त बनता है, जबकि बाकी तीन उंगलियाँ सीधी रहती हैं।
Jansampark Madhya Pradesh
CM Madhya Pradesh
#mandla
Department of Ayush, Madhya Pradesh
25 views | Mandla, Madhya Pradesh | Jun 14, 2026