*निर्जला एकादशी पर भक्ति के सागर में डूबा कोटड़ी*
*पंचम नौका विहार महोत्सव में उमड़ा आस्था का जनसैलाब*
*विशाल कुंड में विराजे श्री कोटड़ी श्याम*
*501 किलो आम, 108 थाल मठरी मनोरथ, 150 किलो मोगरे की सुगंध और भजनों की स्वर लहरियों से देर रात तक गूंजता रहा मंदिर परिसर*
भीलवाड़ा/आकोला :रमेश चन्द डाड
निर्जला एकादशी के पावन पर्व पर गुरुवार को श्री कोटड़ी श्याम के दरबार में आयोजित पंचम नौका विहार महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के अद्भुत संगम का साक्षी बना। दोपहर 12.15 बजे से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी और दिनभर भगवान श्री कोटड़ी श्याम के दर्शन, सेवा एवं विभिन्न धार्मिक मनोरथों का सिलसिला चलता रहा। देर रात तक हजारों श्रद्धालुओं ने नौका विहार के दिव्य दर्शन कर धर्मलाभ प्राप्त किया। महोत्सव का शुभारंभ कन्नौज से मंगवाए गए सुगंधित इत्र से भगवान के इत्र अभिषेक के साथ हुआ। इसके बाद प्रभु का विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर परिसर को वृंदावन से मंगाई गई लगभग 150 किलो मोगरे की लड़ियों से सजाकर भव्य मोगरा महल का स्वरूप दिया गया। चारों ओर फैली मोगरे की मनमोहक सुगंध और इत्र के फव्वारों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
दोपहर 12:15 बजे भगवान श्री कोटड़ी श्याम को आकर्षक रूप से सुसज्जित नौका में विराजमान कर विशाल कृत्रिम कुंड में नौका विहार कराया गया। कुंड को वृंदावन से लाए गए यमुना जल, ऋषिकेश के गंगाजल तथा एकलिंगजी से मंगाए गए कमल पुष्पों से सजाया गया था। जैसे ही प्रभु की नौका जल में उतरी, पूरा मंदिर परिसर *"कोटड़ी श्याम बाबा की जय"* के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर प्रभु का स्वागत किया और दिव्य झांकी के दर्शन किए।
*हर 15 मिनट में लगा अलग-अलग व्यंजनों का भोग*
पूरे दिन प्रभु की सेवा में विशेष मनोरथ आयोजित किए गए। प्रत्येक 15 मिनट के अंतराल में भगवान को अलग-अलग प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया। माखन-मिश्री, श्रीखंड, मैंगो क्रीम, मैसूर पाक, ठंडाई, गुलाब शरबत, रबड़ी, पंजीरी, रसगुल्ला, बेसन चक्की, मेसुरपाक सहित लगभग 50 प्रकार की मिठाइयों एवं व्यंजनों को चंगेरी और मिट्टी के पारंपरिक पात्रों में आकर्षक ढंग से सजाकर प्रभु के श्रीचरणों में अर्पित किया गया।
*108 थालों का मठरी मनोरथ बना आकर्षण का केंद्र*
दोपहर 1 बजे सात प्रकार की मठरियों से सुसज्जित 108 थालों का भव्य मठरी मनोरथ सजाया गया। भगवान को अर्पित किए गए इस मनोरथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ लगी रहीं। श्रद्धालुओं ने बड़ी श्रद्धा के साथ प्रभु के दर्शन कर प्रसाद ग्रहण किया।
*501 किलो आमों से सजा भव्य आम मनोरथ*
शाम 4 बजे विभिन्न किस्मों के 501 किलो आमों से भव्य आम मनोरथ सजाया गया। केसर, हाफुस, तोतापुरी, कलमी सहित अनेक किस्मों के आमों से सजे इस मनोरथ ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। श्रद्धालु आम मनोरथ के साथ प्रभु के दर्शन कर स्वयं को धन्य मानते रहे।
*भजन संध्या में भक्ति रस में सराबोर हुए श्रद्धालु*
नौका विहार कार्यक्रम की शुरुआत के साथ ही आयोजित भजन सरिता में वृंदावन से पधारे नंदरायदास (चैतन्य शर्मा) ने अपनी मधुर भजनों की प्रस्तुतियों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उनके साथ भीलवाड़ा के जिम्मी दाधीच एवं कोटड़ी के लखन टेलर एंड पार्टी ने भी एक से बढ़कर एक श्याम भजन प्रस्तुत किए। श्रद्धालु शयन आरती तक भजनों पर झूमते रहे और पूरा मंदिर परिसर श्याम नाम के जयघोष से गूंजता रहा।
*इत्र के फव्वारे, पुष्प सज्जा और आतिशबाजी बनी विशेष आकर्षण*
मंदिर परिसर में नौका विहार के लिए तैयार अस्थाई कुण्ड के चारों ओर लगाए गए इत्र के फव्वारों ने श्रद्धालुओं को अनूठा अनुभव कराया। शाम की संध्या आरती के बाद कुंड के चारों ओर भव्य आतिशबाजी की गई, जिसने पूरे आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया। रंग-बिरंगी रोशनी और आतिशबाजी के बीच नौका में विराजमान प्रभु का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय बन गया।
*ठंडाई प्रसाद से मिली राहत*
भीषण गर्मी और उमस को देखते हुए आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए ठंडाई प्रसाद की विशेष व्यवस्था की गई। संध्या आरती के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
*भक्तों के सहयोग से सफल हुआ आयोजन*
महोत्सव को सफल बनाने में श्री चारभुजा मंदिर ट्रस्ट, आयोजन समिति, युवा भक्त मंडल तथा अनेक सेवाभावी श्रद्धालुओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।व्यवस्थाओं से लेकर सजावट, प्रसाद वितरण, सुरक्षा एवं दर्शन व्यवस्था तक सभी कार्य सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुए।
आयोजन समिति ने बताया कि पंचम नौका विहार महोत्सव में अपेक्षा से अधिक श्रद्धालु पहुंचे और पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्ति, सेवा और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बना रहा। समिति ने सभी श्रद्धालुओं, सेवाभावियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भगवान श्री कोटड़ी श्याम की कृपा से यह महोत्सव ऐतिहासिक, भव्य और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।