68 साल बाद भी मिसाल बनीं पं. यशोधर शास्त्री के कार्यकाल की सड़कें
नई सड़क के निर्माण का स्थानीय लोगों ने किया विरोध, बोले—पुरानी सड़क आज भी मजबूत, इसे तोड़ने की जरूरत नहीं
सोरों, कासगंज। तीर्थ नगरी सोरों शूकर क्षेत्र में नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष पं. यशोधर शास्त्री का कार्यकाल आज भी विकास कार्यों की मजबूती के लिए याद किया जाता है। उनका कार्यकाल 9 दिसंबर 1958 से 21 फरवरी 1960 तक रहा। लगभग 68 वर्ष बीत जाने के बाद भी उनके कार्यकाल में बनवाई गईं पक्की सड़कें आज कई स्थानों पर मजबूती के साथ मौजूद हैं।
इसी की एक मिसाल हाल ही में **सोरों के वार्ड नंबर 23, मोहल्ला मढ़ई ** में देखने को मिली। यहां करीब सात दिनों से पुरानी सड़क के ऊपर नई सड़क बनाने के लिए निर्माण सामग्री डाली गई है। स्थानीय लोगों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि करीब सात दशक पुरानी सड़क आज भी मजबूत है, ऐसे में इसके ऊपर नई सड़क बनाने की आवश्यकता नहीं है।
स्थानीय लोगों ने पुराने समय में बनी सड़कों की गुणवत्ता को याद करते हुए कहा कि उस दौर में बालू, सीमेंट और ईंटों से बनाई गई सड़कें दशकों बाद भी मजबूती से टिकी हुई हैं। लोगों का कहना है कि आज बनने वाली कई सड़कें गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में रहती हैं और कुछ ही समय में खराब होने लगती हैं।
छतरी लेकर निर्माण कार्य की निगरानी करते थे पं. यशोधर शास्त्री
पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष पं. यशोधर शास्त्री के नाती पं. शशिधर शास्त्री ने बताया कि उनकी दादी मां अक्सर बताया करती थीं कि जब सड़कों का निर्माण कराया जा रहा था, तब पं. यशोधर शास्त्री स्वयं छतरी लेकर निर्माण कार्यों की निगरानी करने पहुंचते थे।
उन्होंने नगर के अलग-अलग क्षेत्रों के स्थानीय लोगों को भी निर्माण कार्य की निगरानी की जिम्मेदारी दी थी। उन्हें स्पष्ट निर्देश था कि निर्माण में किसी प्रकार की कमी दिखाई दे तो तत्काल उन्हें इसकी सूचना दी जाए।
करीब 14 माह के कार्यकाल में नगर में कराए गए सड़क निर्माण आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय हैं। वार्ड नंबर 23 में पुरानी सड़क को बचाने की मांग को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रहा है कि दशकों पहले बनी सड़कें आज भी मजबूत हैं तो आज के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता आखिर कैसी होनी चाहिए?