ऐतिहासिक पल : दनला शिरगुल मंदिर के शिखर पर हुई कुरूड़ की स्थापना, उमड़ा आस्था का सैलाब
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रिपोर्ट श्यामलाल पुंडीर
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पांवटा साहिब: कुरूड़ हिमाचल प्रदेश के शिमला सिरमौर सोलन और जौनसार के कुछ क्षेत्रों के मन्दिर निर्माण की प्रक्रिया के सम्पन्न होने के बाद मन्दिर के ऊपर छत पर लगाई जाने वाली लकड़ी होती है जिसे कुरूड़ कहा जाता है।यह देवदार की लंबी शहतीर होती है जिसे बीच में कुरेद कर बनाया जाता है ताकि ढलान दार छत की चोटी के किनारों पर फिट आ जाए।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मन्दिर के ऊपर ये चिन्ह या शिखर इसलिए ऊंचे लगाए जाते हैं ताकि दूर से ही दिखाई पड़े। ऐसा इसलिए होता है कि यदि कोई मन्दिर न भी जा सके तो दूर से ही मंदिर शिखर के दर्शन करने से वही पुण्य मिलता है जो मूर्ति दर्शन से मिलता है। इसीलिए शास्त्रों में कहा गया है
कुरूड़ की लकड़ी काटने से पहले पेड़ का पूजन किया जाता है उसके बाद काट कर कुरूड़ बनाई जाती है बनाने के बाद उसे फिर धरती पर नहीं रखा जाता।अगर कहीं रखना भी पड़ तो धरती से ऊपर उठे आसन पर रखा जाता है। फिर मंत्रोच्चार के साथ इसे मन्दिर के शीर्ष पर स्थापित कर दिया जाता है।
Ronhat, Sirmaur | Jun 17, 2026