विश्वप्रसिद्ध 75 दिवसीय बस्तर दशहरा के सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में शुमार पारंपरिक ‘काछनगादी रस्म’ विधि-विधान से संपन्न हुई।
12 वर्षीय बालिका पीहू श्रीवास्तव के ऊपर सवार हुई माँ काछनदेवी, जिन्होंने कांटों के आसन पर विराजमान होकर पर्व के निर्विघ्न संपन्न होने की स्वीकृति प्रदान की।काछनगादी के पश्चात नगर के गोलबाजार में ‘रैला पूजा’ संपन्न हुई।
बस्तर की यह अनूठी संस्कृति और परंपराएं हम सभी को गौरवान्वित करती हैं।
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3 views | Bastar, Chhattisgarh | Oct 11, 2026