मिठाई खरीदने से पहले जांचें शेल्फ लाइफ: बासी मिठाइयां परोसना कानूनी जुर्म, सेहत से खिलवाड़ करने वाले विक्रेताओं पर होगी सख्त कार्रवाई
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पीलीबंगा/हनुमानगढ़। लालबहादुर भाखर:-
त्योहारों और आम दिनों में मिठास घोलने वाली मिठाइयां यदि बासी या अमानक हों, तो वे सीधे तौर पर सेहत के लिए धीमा जहर साबित हो सकती हैं। भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के कड़े दिशा-निर्देशों के बावजूद कई विक्रेता लंबे समय तक रखी बासी मिठाइयों को खपाने से बाज नहीं आते। खाद्य सुरक्षा कानून के अनुसार खुले काउंटर पर रखी मिठाइयों पर निर्माण तिथि और 'बेस्ट बिफोर डेट' (उपभोग की अंतिम तारीख) प्रदर्शित करना अनिवार्य है, जिसका उल्लंघन करने पर भारी जुर्माने से लेकर जेल तक का प्रावधान है।
कौन-सी मिठाई कितने दिन तक खाने योग्य?
FSSAI के मानकों और विशेषज्ञों के अनुसार नमी व सामग्री के आधार पर मिठाइयों की शेल्फ लाइफ इस प्रकार तय है:
छेना व दूध की पतली चाशनी वाली मिठाइयां (रसगुल्ला, रसमलाई, राजभोग, चमचम): कमरे के सामान्य तापमान पर 24 से 36 घंटे तथा फ्रिज में 2 से 3 दिन।
मावा/खोया आधारित मिठाइयां (पेड़ा, कलाकंद, मावा बर्फी, मिल्क केक): सामान्य तापमान पर 2 से 3 दिन (कलाकंद 24 घंटे में खट्टा हो सकता है), फ्रिज में 4 से 5 दिन।
घी, बेसन व मैदे की मिठाइयां (मोतीचूर लड्डू, बेसन चक्की, बालूशाही): सामान्य तापमान पर 5 से 7 दिन।
सूखे मेवे की मिठाइयां (काजू कतली, पिस्ता लौंज): सामान्य तापमान पर 7 से 10 दिन।
सूखी मिठाइयां (सोन पापड़ी, गजक, सूखा पेठा): 20 से 30 दिन या अधिक।
बासी मिठाई खाने के गंभीर नुकसान
तय समय सीमा बीतने के बाद मिठाइयों में नमी के कारण साल्मोनेला, ई-कोलाई और स्टैफिलोकोकस जैसे घातक बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपते हैं:
फूड पॉइजनिंग: बासी मावा और छेना खाने से उल्टी, दस्त, पेट में तेज मरोड़ और डिहाइड्रेशन का खतरा रहता है।
बैक्टीरियल टॉक्सिन्स: बैक्टीरिया द्वारा छोड़े गए विषैले तत्व शरीर में जाकर तुरंत लिवर और आंतों पर असर डालते हैं, जिससे 2 से 6 घंटे के भीतर तबीयत बिगड़ सकती है।
फंगस और इंफेक्शन: फफूंद लगी या बासी चाशनी वाली मिठाइयों से आंतों में सूजन (Gastroenteritis) और गंभीर संक्रमण हो सकता है।
नियम तोड़ने वाले विक्रेताओं पर कानूनी शिकंजा
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 (FSS Act) के तहत बासी, अमानक या असुरक्षित खाद्य सामग्री बेचना गंभीर अपराध है:
अमानक या बासी खाद्य (Substandard Food - धारा 51): खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा सैंपल फेल पाए जाने पर विक्रेता पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
असुरक्षित खाद्य पदार्थ (Unsafe Food - धारा 59): यदि बासी या दूषित मिठाई खाने से उपभोक्ता बीमार पड़ता है या स्वास्थ्य को गंभीर खतरा होता है, तो विक्रेता को 6 महीने से लेकर आजीवन कारावास और 1 लाख से 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
'बेस्ट बिफोर' तिथि न दर्शाना: काउंटर पर ट्रे में रखी खुली मिठाइयों पर अंतिम तारीख की पर्ची न लगाने पर FSSAI नियमों के तहत विधिक नोटिस और आर्थिक दंड लगाया जाता है।
उपभोक्ता संरक्षण कानून: उपभोक्ता को बासी वस्तु बेचकर ठगने पर उपभोक्ता आयोग द्वारा हर्जाना और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशासन की अपील: उपभोक्ता मिठाई खरीदते समय रंग, गंध और लिसलिसेपन की जांच अवश्य करें। बासी या संदिग्ध मिठाई दिखने पर तुरंत खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचित करें।
Pilibanga, Hanumangarh | Oct 19, 2026