टिहरी के पांचवें धाम सेम मुखेम में भक्ति की बयार: कथा व्यास भरत किशोर जी ने किया भव्य श्रीराम कथा का श्रीगणेश
टिहरी गढ़वाल: उत्तराखंड के प्रसिद्ध पौराणिक तीर्थ और 'पांचवें धाम' के रूप में प्रतिष्ठित सेम मुखेम नागराजा मंदिर परिसर में दिव्य श्रीराम कथा का श्रद्धापूर्वक शुभारंभ हो गया है। अध्यात्म और आस्था के इस अनूठे संगम में क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है।
कलश यात्रा के साथ हुआ मंगलमय आगाज
कथा के प्रथम दिन का प्रारंभ एक भव्य एवं विशाल कलश यात्रा के साथ हुआ। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मंगल ध्वनि और जयकारों के बीच निकाली गई इस यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। सिर पर मंगल कलश धारण किए हुए भक्त जब मंदिर परिसर पहुंचे, तो समूचा वातावरण 'जय श्रीराम' और 'जय नागराजा' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
कथा व्यास श्री भरत किशोर जी का दिव्य उद्बोधन
कार्यक्रम के मुख्य कथा व्यास, परम आदरणीय श्री भरत किशोर जी ने व्यास पीठ से कथा का श्रीगणेश करने से पूर्व नागराजा भगवान के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। विशेष बात यह है कि श्री भरत किशोर जी द्वारा इस पावन और ऐतिहासिक स्थल पर यह तीसरी बार कथा का वाचन किया जा रहा है।अपने संबोधन में उन्होंने श्रीराम कथा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्तराखंड की यह देवभूमि न केवल तपस्वियों की स्थली है, बल्कि यहां के कण-कण में भगवान का वास है। उन्होंने सेम मुखेम की दिव्यता का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को जीवन में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों को उतारने का आह्वान किया।
सेम मुखेम: आस्था का केंद्र
टिहरी जनपद के ऊंचे शिखर पर स्थित सेम मुखेम मंदिर को उत्तराखंड के चार धामों के बाद पांचवें धाम के रूप में अत्यधिक मान्यता प्राप्त है। समुद्र तल से लगभग 2,648 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के नागराजा स्वरूप को समर्पित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह वही स्थान है जहाँ भगवान कृष्ण ने कालीय नाग का उद्धार कर उसे निवास स्थान प्रदान किया था।कथा के प्रथम दिन से ही श्रद्धालुओं में जो उत्साह देखा जा रहा है, वह इस धार्मिक आयोजन की सफलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। आगामी दिनों में कथा के विभिन्न प्रसंगों जैसे राम जन्म, सीता स्वयंवर और राम राज्य अभिषेक के माध्यम से भक्तों को भक्ति रस का आनंद प्राप्त होगा।