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➡️ समान नागरिक संहिता पर जन-विमर्श: जिले के प्रबुद्धजनों ने रखे अपने विचार ➡️ यूसीसी पर सागर से उठी आवाज: "संवाद से ही बढ़ेंगे कदम, सुरक्षित रहेंगे सबके अधिकार" मध्य प्रदेश शासन द्वारा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संबंध में अध्ययन एवं परीक्षण हेतु गठित उच्च स्तरीय समिति प्रदेश के विभिन्न जिलों में जनपरामर्श बैठकें आयोजित कर रही है। इसी कड़ी में सागर में समाज के विभिन्न वर्गों, विधि विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों के साथ सीधे संवाद का महत्वपूर्ण कार्यक्रम संपन्न हुआ। कानूनविद और उच्च स्तरीय समिति के सदस्य श्री अनूप नायर की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक का मुख्य उद्देश्य समान नागरिक संहिता लागू करने से पहले समाज के हर वर्ग की आकांक्षाओं, विचारों और सुझावों को संकलित करना है ताकि समिति अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप सके। श्री नायर ने बताया कि देश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच, सागर में प्रबुद्ध नागरिकों और बुद्धिजीवियों, समाज के विभिन्न वर्गों के प्रबुद्धजनों से विचार आमंत्रित किए गए हैं। सभी नागरिकों के बहुमूल्य सुझाव समिति के माध्यम से शासन स्तर तक प्रेषित किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि यह समिति विवाह, भरण-पोषण, विवाह विच्छेद (तलाक), उत्तराधिकार तथा अन्य पारिवारिक कानूनों से जुड़े तमाम विधिक, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का बेहद गहराई से और विस्तृत अध्ययन कर रही है। इन सभी बिंदुओं की समीक्षा करने के बाद ही समिति समान नागरिक संहिता के संबंध में अपनी उपयुक्त और व्यावहारिक अनुशंसाएं शासन को सौंपेगी। श्री नायर ने जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए आगे बताया कि इन जनपरामर्श बैठकों के आयोजन का मुख्य उद्देश्य यही है कि इस कानून के निर्माण में समाज के हर वर्ग की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जा सके। बैठक में मौजूद सागर विधायक श्री शैलेंद्र जैन ने यूसीसी को आज की आवश्यकता बताया। उन्होंने देश की वर्तमान स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि, "मैं समझता हूँ कि जिस तरह पूरे देश में एक समान कानून और संविधान पूरी तरह से लागू है वैसे ही वर्तमान परिस्थितियों में, समान नागरिक संहिता (UCC) आज के समय की एक बेहद महत्वपूर्ण आवश्यकता और जरूरत बन गई है।" उन्होंने संवाद और संवेदनशीलता पर जोर देते हुए कहा कि सरकार को सभी से विचार-विमर्श करके इसे लागू करना चाहिए और किसी की भावनाएं आहत न हों, इसका ख्याल अवश्य रखना चाहिए। नरयावली विधायक श्री प्रदीप लारिया ने बैठक में हो रहे 'विचार विनिमय' की सराहना की और इसे एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए जरूरी बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूसीसी आज की आवश्यकता है। उन्होंने आश्वस्त किया कि 'संविधान में हम सभी के अधिकार सुरक्षित हैं', और इस नए कानून से किसी भी समुदाय के मौलिक अधिकारों को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि 'हमारे देश में संसाधनों पर सभी का समान अधिकार है', और एक समान कानून सभी नागरिकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करेगा। उन्होंने सभी के लिए समान नियम होने की बात की और उल्लेख किया कि 'भारतीय दंड संहिता' (IPC) एक समान कानून का ही एक रूप है, जिसे सब मानते हैं। जिले के प्रबुद्ध जनों में श्री सुखदेव मिश्रा ने यूसीसी का समर्थन और सामाजिक समरसता की बात करते हुए कहा कि ऐसी प्रथा जो समाज को विभाजित करें वह समाज हित या देशहित में नहीं। श्री अनिल तिवार ने कहा कि यूसीसी की जो बैठक जिले स्तर पर आयोजित हो रही हैं वे गाँव में भी आवश्यक रूप से हों साथ ही इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए जिससे सभी व्यक्तिय यूसीसी के बारे में जागरूक हों। डॉ ज्योति चौहान ने यूसीसी लागू होने पर मातृ और शिशु स्वास्थ्य पर होने वाले सकारात्मक प्रभाव के बारे में सभी को अवगत कराया। श्री शैलेश केसरवानी ने कहा कि हर एक व्यक्ति का बराबर का अधिकार होना ही चाहिए और वे समान नागरिक संहिता का समर्थन करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि गाँव और ब्लॉक स्तर तक ऐसी बैठकें आयोजित होनी चाहिए। श्री पप्पू तिवारी ने कहा कि इस प्रकार के संवाद स्कूलों और कॉलेज में भी होने चाहिए जिससे इसकी जानकारी जन जन तक पहुंचे। सुश्री स्तुति जैन ने यूसीसी लागू होने के पर उत्तराधिकार विषय संबंधी निर्णय पर अपने विचार रखे। बैठक में जिले के विभिन्न वर्गों, क्षेत्रों से शामिल हुए अन्य प्रबुद्धजनों ने भी अपने विचार रखे। कई व्यक्तियों ने यूसीसी को 'मातृशक्ति के लिए समानता और उनके सम्मान के लिये भी आवश्यक बताया। महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान देने के साथ ही यह सामाजिक न्याय के लिए भी जरूरी है। बैठक में विभिन्न समुदायों के लिए यूसीसी के संभावित प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की। कुछ लोगों ने इसे एक प्रगतिशील कदम बताया जो लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करेगा, जबकि कुछ अन्य ने अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए सावधानी बरतने की आवश्यकता व्यक्त की। समग्र रूप से, बैठक में सभी पक्षों ने एक सौहार्दपूर्ण वातावरण में चर्चा की और अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर प्रभारी कलेक्टर श्रीअविनाश रावत जिला पंचायत सीईओ श्री विवेक केवी, नगर निगम अध्यक्ष श्री वृन्दावन अहिरवार, जिला अध्यक्ष श्री श्याम तिवारी, सुश्री रानी कुशवाहा सहित अन्य जनप्रतिनिधि, शांति समिति के सदस्य, अन्य प्रबुद्धजन एवं गणमान्य नागरिक मौजूद थे। कार्यक्रम संचालन डॉ अमर जैन ने किया। आम नागरिक 15 जून तक https://Ucc.mp वेबसाइट पर भी दे सकते हैं अपने सुझाव समिति के सदस्य श्री अनूप नायर ने बैठक में स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश शासन समाज के हर वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित करना चाहता है। जो नागरिक इन बैठकों में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो पाए हैं, वे सीधे शासन की आधिकारिक वेबसाइट ucc.mp.gov.in पर जाकर ऑनलाइन माध्यम से समान नागरिक संहिता के संबंध में अपने बहुमूल्य विचार और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Jansampark Madhya Pradesh #JansamparkMP #sagar

1 views | Sagar, Madhya Pradesh | Jun 4, 2026

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➡️ समान नागरिक संहिता अध्ययन एवं परीक्षण हेतु गठित उच्च स्तरीय समिति की बैठक में श्री अनूप नायर ने  मूल्यवान सुझाव प्रस्तुत करने हेतु अनुरोध किया।

CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Jansampark Madhya Pradesh #JansamparkMP #sagar

➡️ समान नागरिक संहिता अध्ययन एवं परीक्षण हेतु गठित उच्च स्तरीय समिति की बैठक में श्री अनूप नायर ने मूल्यवान सुझाव प्रस्तुत करने हेतु अनुरोध किया। CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Jansampark Madhya Pradesh #JansamparkMP #sagar

Sagar, Madhya Pradesh | Jun 4, 2026

➡️ कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के निर्देश पर बड़ी कार्रवाई: शाहगढ़ में श्मशान घाट की शासकीय भूमि से हटाया गया अवैध कब्जा

➡️ शासकीय जमीनों पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं, राजस्व अमला पूरी मुस्तैदी से करे कार्यवाही: कलेक्टर

जिला प्रशासन द्वारा शासकीय भूमियों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत आज एक बड़ी कार्रवाई की गई। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के सख्त रुख और स्पष्ट निर्देशों के बाद शाहगढ़ अनुभाग के ग्राम सेमरा रामचंद्र में श्मशान घाट की भूमि पर किए गए अवैध कब्जे को प्रशासनिक अमले द्वारा हटा दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि विगत दिनों आयोजित समय-सीमा बैठक में कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने जिले के सभी राजस्व अधिकारियों को भू-माफियाओं और शासकीय जमीनों पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के निर्देश दिए थे।

कलेक्टर श्रीमती पाल ने निर्देश दिए थे कि सार्वजनिक उपयोग की भूमियों, गोचर, नदी-नालों और श्मशान घाट जैसी संवेदनशील शासकीय जमीनों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कहीं भी ऐसी शिकायत आती है, तो संबंधित अनुभाग के अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचकर बेदखली की कार्रवाई सुनिश्चित करें। कलेक्टर के इन्हीं निर्देशों के परिपालन में शाहगढ़ एसडीएम श्री नवीन सिंह ठाकुर के साथ राजस्व अमले ने ग्राम सेमरा रामचंद्र पहुंचकर श्मशान घाट की आरक्षित शासकीय भूमि का सीमांकन किया और उसे अतिक्रमण मुक्त कराया।

CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Jansampark Madhya Pradesh #JansamparkMP #sagar

➡️ कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के निर्देश पर बड़ी कार्रवाई: शाहगढ़ में श्मशान घाट की शासकीय भूमि से हटाया गया अवैध कब्जा ➡️ शासकीय जमीनों पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं, राजस्व अमला पूरी मुस्तैदी से करे कार्यवाही: कलेक्टर जिला प्रशासन द्वारा शासकीय भूमियों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत आज एक बड़ी कार्रवाई की गई। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के सख्त रुख और स्पष्ट निर्देशों के बाद शाहगढ़ अनुभाग के ग्राम सेमरा रामचंद्र में श्मशान घाट की भूमि पर किए गए अवैध कब्जे को प्रशासनिक अमले द्वारा हटा दिया गया है। उल्लेखनीय है कि विगत दिनों आयोजित समय-सीमा बैठक में कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने जिले के सभी राजस्व अधिकारियों को भू-माफियाओं और शासकीय जमीनों पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के निर्देश दिए थे। कलेक्टर श्रीमती पाल ने निर्देश दिए थे कि सार्वजनिक उपयोग की भूमियों, गोचर, नदी-नालों और श्मशान घाट जैसी संवेदनशील शासकीय जमीनों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कहीं भी ऐसी शिकायत आती है, तो संबंधित अनुभाग के अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचकर बेदखली की कार्रवाई सुनिश्चित करें। कलेक्टर के इन्हीं निर्देशों के परिपालन में शाहगढ़ एसडीएम श्री नवीन सिंह ठाकुर के साथ राजस्व अमले ने ग्राम सेमरा रामचंद्र पहुंचकर श्मशान घाट की आरक्षित शासकीय भूमि का सीमांकन किया और उसे अतिक्रमण मुक्त कराया। CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Jansampark Madhya Pradesh #JansamparkMP #sagar

Sagar, Madhya Pradesh | Jun 3, 2026

➡️ जिले के समस्त स्कूल बस संचालक एवं स्कूल प्रबंधन की बैठक संपन्न

 कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के निर्देश पर अपर कलेक्टर, सागर की अध्यक्षता में सागर जिले के समस्त स्कूल बस संचालकों एवं स्कूल प्रबंधन की बैठक आज कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में आयोजित की गई। बैठक का संचालन क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, सागर द्वारा किया गया। बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी, सागर एवं उप पुलिस अधीक्षक (यातायात), सागर उपस्थित थे।

बैठक में अपर कलेक्टर द्वारा समस्त स्कूल बस संचालकों को मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों के तहत संचालन करने हेतु निर्देशित किया गया। उन्होंने ऐसे सभी स्कूली वाहनों, जिनमें छात्राएं स्कूल आती-जाती हैं, उनमें महिला अध्यापिका अथवा महिला अटेंडर की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, सागर द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के निर्देशों के आधार पर परिवहन विभाग द्वारा जारी परिपत्र की जानकारी से सभी को अवगत कराया गया, जिसमें स्कूल बस संचालक, स्कूल प्रबंधन, अभिभावक एवं जिला प्रशासन की जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
स्कूल बस संचालकों द्वारा निम्नलिखित मापदंडों की पूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

स्कूल बस का रंग पीला होना चाहिए। केंद्रीय मोटरयान नियम, 1989 के प्रावधानों के अनुसार बसों के आगे एवं पीछे बड़े और स्पष्ट अक्षरों में “स्कूल बस” लिखा होना चाहिए। यदि स्कूल बस किराये की है तो उस पर आगे एवं पीछे “ऑन स्कूल ड्यूटी” लिखा होना चाहिए। विद्यालय द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली किसी भी बस में निर्धारित सीटों से अधिक संख्या में बच्चों को नहीं बैठाया जाए। प्रत्येक बस में प्राथमिक चिकित्सा हेतु फर्स्ट एड बॉक्स होना अनिवार्य है। बसों की खिड़कियों में आड़ी पट्टियां (ग्रिल) अनिवार्य रूप से लगी हों। प्रत्येक बस में अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था हो। बस में स्कूल का नाम एवं टेलीफोन नंबर बड़े अक्षरों में लिखा हो। बस चालक को भारी वाहन चलाने का न्यूनतम 5 वर्ष का अनुभव होना चाहिए तथा वह पूर्व में यातायात नियमों के उल्लंघन का दोषी न पाया गया हो।

केंद्रीय मोटरयान नियम, 1989 के नियम 17 के अनुसार बस में वाहन चालक के अतिरिक्त एक अन्य वयस्क व्यक्ति भी हो। यदि बस में छात्राएं हों तो महिला अध्यापक अथवा सहायिका की व्यवस्था सुनिश्चित हो। बच्चों के बस्ते रखने के लिए सीट के नीचे पर्याप्त स्थान होना चाहिए। बसों में नियमानुसार दो दरवाजे (प्रवेश एवं निर्गम) तथा आपातकालीन खिड़की हो। बस में गति नियंत्रक यंत्र 40 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति पर निर्धारित हो।

बसों के दरवाजों पर लगे ताले सही स्थिति में हों।
किसी भी शिक्षक अथवा पालक को बस की सुरक्षा जांच हेतु निरीक्षण करने की सुविधा हो। यह सुनिश्चित किया जाए कि स्कूल बस चालक का नेत्र परीक्षण एवं स्वास्थ्य परीक्षण नियमित रूप से हो तथा वह मादक पदार्थों के सेवन का आदी न हो। नियमानुसार प्रत्येक 6 माह में चिकित्सकीय परीक्षण कराया जाना आवश्यक है।

स्कूल प्रबंधन द्वारा स्कूल के स्वामित्व अथवा अनुबंधित स्कूल वाहनों में निम्नलिखित मापदंडों की पूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। स्कूल प्रबंधन द्वारा यह संपूर्ण विवरण रखा जाए कि कौन सा बच्चा किस वाहन से स्कूल आता एवं जाता है। स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने वाले सभी वाहनों के दस्तावेज जैसे ड्राइविंग लाइसेंस, पुलिस सत्यापन, वाहन पंजीयन, फिटनेस, परमिट, बीमा एवं पीयूसी प्रमाण पत्र की प्रतियां सुरक्षित रखी जाएं।

स्कूली वाहन के रूप में एलपीजी से संचालित वाहन का उपयोग सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत जोखिमपूर्ण है। अतः यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी बच्चा एलपीजी संचालित वाहन से स्कूल न आए। ऐसा पाए जाने पर तत्काल पुलिस प्रशासन एवं परिवहन विभाग को सूचना दी जाए। प्रत्येक वाहन में निर्धारित संख्या के अनुसार ही बच्चों का परिवहन किया जाए।
स्कूल परिसर में सुरक्षित स्थान पर सीसीटीवी निगरानी के अंतर्गत बच्चों को वाहन से उतारने एवं चढ़ाने की व्यवस्था की जाए। वाहनों में अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड किट, जीपीएस, स्पीड गवर्नर एवं सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।

स्कूली वाहनों में लगे जीपीएस की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। प्रत्येक स्कूल में “शाला परिवहन समन्वय समिति” का गठन किया जाए। बच्चों के माता-पिता (अभिभावकों) का दायित्व निम्नानुसार होगा।
अभिभावक बच्चों की सुरक्षा के प्रति स्वयं भी उत्तरदायी हैं तथा यह सुनिश्चित करें कि स्कूली वाहनों में सभी सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है। चालक, परिचालक अथवा अन्य कर्मचारियों द्वारा नियमों के उल्लंघन की जानकारी तत्काल संबंधित स्कूल एवं राज्य प्राधिकरणों को दें। अभिभावक-शिक्षक बैठक (Parent-Teacher Meeting) में भाग लेकर बच्चों की सुरक्षा संबंधी विषयों पर चर्चा करें।

ऐसे वाहनों का उपयोग न करें जिनके पास वैध परमिट अथवा वैध ड्राइविंग लाइसेंस धारक चालक न हो।
ऐसे वाहनों में बच्चों को न बैठाएं जिनमें निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चे बैठे हों, जैसे ऑटो रिक्शा में अधिकतम 5 बच्चे। इस संवेदनशील विषय पर सतर्क पर्यवेक्षक की भूमिका निभाएं। ऐसे अभिभावकों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई प्रस्तावित की जा सकती है जो न्यायालय द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन न करने वाले वाहनों से बच्चों को स्कूल भेजते हैं। पुलिस एवं परिवहन विभाग का दायित्व निम्नानुसार होगा।

स्कूल बस संचालकों एवं स्कूल प्रबंधन द्वारा उच्चतम न्यायालय तथा केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के पालन की नियमित जांच, भौतिक सत्यापन एवं उल्लंघन की स्थिति में वैधानिक कार्रवाई करना तथा स्कूलों एवं कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना।

समस्त अभिभावकों से अपील की गई कि वे बच्चों को ऐसे स्कूली वाहनों से स्कूल न भेजें जो एलपीजी गैस किट से संचालित हों अथवा अनफिट प्रतीत होते हों।
क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने समस्त स्कूल बस संचालकों को निर्देशित किया कि वे उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप स्कूल बसों का संचालन करें तथा वाहन में स्पीड गवर्नर, बीमा, फिटनेस, प्रदूषण प्रमाण पत्र, मोटरयान कर भुगतान प्रमाण, फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र एवं वैध भारी वाहन ड्राइविंग लाइसेंस सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। साथ ही बैठक क्षमता के अनुसार ही छात्र-छात्राओं को बैठाया जाए। चेकिंग के दौरान कमियां पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा निर्देशित किया गया कि सभी स्कूल प्रबंधन तत्काल “शाला परिवहन समन्वय समिति” का गठन करें, जो परिवहन व्यवस्था की निगरानी करेगी।

उप पुलिस अधीक्षक (यातायात), सागर द्वारा नियमित चेकिंग करने तथा सभी चालकों को निर्धारित गणवेश में वाहन संचालन करने के निर्देश दिए गए।

अपर कलेक्टर, सागर द्वारा सभी से अपील की गई कि किसी भी वाहन चालक अथवा अटेंडर का चरित्र सत्यापन एवं आवश्यक जांच अवश्य कराई जाए। वर्तमान में स्कूलों में अवकाश होने के कारण 15 जून तक सभी स्कूली वाहनों को मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप तैयार कर लिया जाए। 15 जून के पश्चात नियमित रूप से स्कूली वाहनों की जांच की जाएगी।

CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Jansampark Madhya Pradesh #JansamparkMP #sagar

➡️ जिले के समस्त स्कूल बस संचालक एवं स्कूल प्रबंधन की बैठक संपन्न कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के निर्देश पर अपर कलेक्टर, सागर की अध्यक्षता में सागर जिले के समस्त स्कूल बस संचालकों एवं स्कूल प्रबंधन की बैठक आज कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में आयोजित की गई। बैठक का संचालन क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, सागर द्वारा किया गया। बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी, सागर एवं उप पुलिस अधीक्षक (यातायात), सागर उपस्थित थे। बैठक में अपर कलेक्टर द्वारा समस्त स्कूल बस संचालकों को मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों के तहत संचालन करने हेतु निर्देशित किया गया। उन्होंने ऐसे सभी स्कूली वाहनों, जिनमें छात्राएं स्कूल आती-जाती हैं, उनमें महिला अध्यापिका अथवा महिला अटेंडर की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, सागर द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के निर्देशों के आधार पर परिवहन विभाग द्वारा जारी परिपत्र की जानकारी से सभी को अवगत कराया गया, जिसमें स्कूल बस संचालक, स्कूल प्रबंधन, अभिभावक एवं जिला प्रशासन की जिम्मेदारियां तय की गई हैं। स्कूल बस संचालकों द्वारा निम्नलिखित मापदंडों की पूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। स्कूल बस का रंग पीला होना चाहिए। केंद्रीय मोटरयान नियम, 1989 के प्रावधानों के अनुसार बसों के आगे एवं पीछे बड़े और स्पष्ट अक्षरों में “स्कूल बस” लिखा होना चाहिए। यदि स्कूल बस किराये की है तो उस पर आगे एवं पीछे “ऑन स्कूल ड्यूटी” लिखा होना चाहिए। विद्यालय द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली किसी भी बस में निर्धारित सीटों से अधिक संख्या में बच्चों को नहीं बैठाया जाए। प्रत्येक बस में प्राथमिक चिकित्सा हेतु फर्स्ट एड बॉक्स होना अनिवार्य है। बसों की खिड़कियों में आड़ी पट्टियां (ग्रिल) अनिवार्य रूप से लगी हों। प्रत्येक बस में अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था हो। बस में स्कूल का नाम एवं टेलीफोन नंबर बड़े अक्षरों में लिखा हो। बस चालक को भारी वाहन चलाने का न्यूनतम 5 वर्ष का अनुभव होना चाहिए तथा वह पूर्व में यातायात नियमों के उल्लंघन का दोषी न पाया गया हो। केंद्रीय मोटरयान नियम, 1989 के नियम 17 के अनुसार बस में वाहन चालक के अतिरिक्त एक अन्य वयस्क व्यक्ति भी हो। यदि बस में छात्राएं हों तो महिला अध्यापक अथवा सहायिका की व्यवस्था सुनिश्चित हो। बच्चों के बस्ते रखने के लिए सीट के नीचे पर्याप्त स्थान होना चाहिए। बसों में नियमानुसार दो दरवाजे (प्रवेश एवं निर्गम) तथा आपातकालीन खिड़की हो। बस में गति नियंत्रक यंत्र 40 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति पर निर्धारित हो। बसों के दरवाजों पर लगे ताले सही स्थिति में हों। किसी भी शिक्षक अथवा पालक को बस की सुरक्षा जांच हेतु निरीक्षण करने की सुविधा हो। यह सुनिश्चित किया जाए कि स्कूल बस चालक का नेत्र परीक्षण एवं स्वास्थ्य परीक्षण नियमित रूप से हो तथा वह मादक पदार्थों के सेवन का आदी न हो। नियमानुसार प्रत्येक 6 माह में चिकित्सकीय परीक्षण कराया जाना आवश्यक है। स्कूल प्रबंधन द्वारा स्कूल के स्वामित्व अथवा अनुबंधित स्कूल वाहनों में निम्नलिखित मापदंडों की पूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। स्कूल प्रबंधन द्वारा यह संपूर्ण विवरण रखा जाए कि कौन सा बच्चा किस वाहन से स्कूल आता एवं जाता है। स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने वाले सभी वाहनों के दस्तावेज जैसे ड्राइविंग लाइसेंस, पुलिस सत्यापन, वाहन पंजीयन, फिटनेस, परमिट, बीमा एवं पीयूसी प्रमाण पत्र की प्रतियां सुरक्षित रखी जाएं। स्कूली वाहन के रूप में एलपीजी से संचालित वाहन का उपयोग सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत जोखिमपूर्ण है। अतः यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी बच्चा एलपीजी संचालित वाहन से स्कूल न आए। ऐसा पाए जाने पर तत्काल पुलिस प्रशासन एवं परिवहन विभाग को सूचना दी जाए। प्रत्येक वाहन में निर्धारित संख्या के अनुसार ही बच्चों का परिवहन किया जाए। स्कूल परिसर में सुरक्षित स्थान पर सीसीटीवी निगरानी के अंतर्गत बच्चों को वाहन से उतारने एवं चढ़ाने की व्यवस्था की जाए। वाहनों में अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड किट, जीपीएस, स्पीड गवर्नर एवं सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। स्कूली वाहनों में लगे जीपीएस की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। प्रत्येक स्कूल में “शाला परिवहन समन्वय समिति” का गठन किया जाए। बच्चों के माता-पिता (अभिभावकों) का दायित्व निम्नानुसार होगा। अभिभावक बच्चों की सुरक्षा के प्रति स्वयं भी उत्तरदायी हैं तथा यह सुनिश्चित करें कि स्कूली वाहनों में सभी सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है। चालक, परिचालक अथवा अन्य कर्मचारियों द्वारा नियमों के उल्लंघन की जानकारी तत्काल संबंधित स्कूल एवं राज्य प्राधिकरणों को दें। अभिभावक-शिक्षक बैठक (Parent-Teacher Meeting) में भाग लेकर बच्चों की सुरक्षा संबंधी विषयों पर चर्चा करें। ऐसे वाहनों का उपयोग न करें जिनके पास वैध परमिट अथवा वैध ड्राइविंग लाइसेंस धारक चालक न हो। ऐसे वाहनों में बच्चों को न बैठाएं जिनमें निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चे बैठे हों, जैसे ऑटो रिक्शा में अधिकतम 5 बच्चे। इस संवेदनशील विषय पर सतर्क पर्यवेक्षक की भूमिका निभाएं। ऐसे अभिभावकों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई प्रस्तावित की जा सकती है जो न्यायालय द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन न करने वाले वाहनों से बच्चों को स्कूल भेजते हैं। पुलिस एवं परिवहन विभाग का दायित्व निम्नानुसार होगा। स्कूल बस संचालकों एवं स्कूल प्रबंधन द्वारा उच्चतम न्यायालय तथा केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के पालन की नियमित जांच, भौतिक सत्यापन एवं उल्लंघन की स्थिति में वैधानिक कार्रवाई करना तथा स्कूलों एवं कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना। समस्त अभिभावकों से अपील की गई कि वे बच्चों को ऐसे स्कूली वाहनों से स्कूल न भेजें जो एलपीजी गैस किट से संचालित हों अथवा अनफिट प्रतीत होते हों। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने समस्त स्कूल बस संचालकों को निर्देशित किया कि वे उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप स्कूल बसों का संचालन करें तथा वाहन में स्पीड गवर्नर, बीमा, फिटनेस, प्रदूषण प्रमाण पत्र, मोटरयान कर भुगतान प्रमाण, फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र एवं वैध भारी वाहन ड्राइविंग लाइसेंस सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। साथ ही बैठक क्षमता के अनुसार ही छात्र-छात्राओं को बैठाया जाए। चेकिंग के दौरान कमियां पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा निर्देशित किया गया कि सभी स्कूल प्रबंधन तत्काल “शाला परिवहन समन्वय समिति” का गठन करें, जो परिवहन व्यवस्था की निगरानी करेगी। उप पुलिस अधीक्षक (यातायात), सागर द्वारा नियमित चेकिंग करने तथा सभी चालकों को निर्धारित गणवेश में वाहन संचालन करने के निर्देश दिए गए। अपर कलेक्टर, सागर द्वारा सभी से अपील की गई कि किसी भी वाहन चालक अथवा अटेंडर का चरित्र सत्यापन एवं आवश्यक जांच अवश्य कराई जाए। वर्तमान में स्कूलों में अवकाश होने के कारण 15 जून तक सभी स्कूली वाहनों को मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप तैयार कर लिया जाए। 15 जून के पश्चात नियमित रूप से स्कूली वाहनों की जांच की जाएगी। CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Jansampark Madhya Pradesh #JansamparkMP #sagar

Sagar, Madhya Pradesh | Jun 3, 2026