बंदरहा ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार और दबंगई के गंभीर आरोप, ग्रामीणों ने उच्च स्तरीय जांच की उठाई मांग
हरदोई जनपद के विकासखंड पिहानी अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बंदरहा इन दिनों कथित भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण कार्यों और दबंगई के आरोपों को लेकर चर्चा में है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है तथा शिकायत करने वालों को भय और दबाव के माहौल का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत में लगभग तीन वर्ष पूर्व स्वच्छता अभियान के अंतर्गत एक सार्वजनिक कूड़ेदान का निर्माण कराया गया था। सरकार द्वारा गांवों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के उद्देश्य से लाखों रुपये की योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन बंदरहा गांव में बने इस कूड़ेदान की स्थिति ने विकास कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
निर्माण कार्य पर उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि जिस कूड़ेदान का निर्माण कई वर्षों तक उपयोग में रहने के उद्देश्य से कराया गया था, वह निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही धराशायी हो गया। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप हुआ होता तो इतनी जल्दी यह संरचना क्षतिग्रस्त नहीं होती।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण में मानक गुणवत्ता की सामग्री का प्रयोग नहीं किया गया। ग्रामीणों के अनुसार, कार्य में घटिया स्तर की ईंट, निम्न गुणवत्ता की बालू तथा सीमेंट का अनुपात कम रखा गया, जिसके कारण निर्माण कमजोर साबित हुआ और समय से पहले ढह गया।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी अभिलेखों में निर्माण कार्य पूर्ण दिखाकर पूरा भुगतान निकाल लिया गया, जबकि धरातल पर उसकी गुणवत्ता और मजबूती नहीं दिखाई दी। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
*प्रधान और प्रधान प्रतिनिधि पर आरोप*
ग्राम पंचायत की वर्तमान प्रधान श्रीमती किरण सिंह हैं। ग्रामीणों ने प्रधान प्रतिनिधि राजीव सिंह पर भी विकास कार्यों में अनियमितता और मनमानी करने के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत के अधिकांश कार्यों का संचालन प्रधान प्रतिनिधि द्वारा किया जाता है।
हालांकि समाचार लिखे जाने तक प्रधान या उनके प्रतिनिधि का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
*भय के माहौल का आरोप*
गांव के कई लोगों का कहना है कि वे खुलकर शिकायत करने से डरते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान प्रतिनिधि राजीव सिंह एक गुंडा किस्म का इंसान है जिस पर बहुत सारे मुकदमा पंजीकृत हैंके प्रभाव और दबंगई के कारण लोग सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने से बचते हैं। कुछ ग्रामीणों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि यदि कोई व्यक्ति निर्माण कार्यों में हुई कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाता है तो उसे विभिन्न प्रकार के दबाव का सामना करना पड़ता है।
अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
ग्रामीणों ने ब्लॉक और तहसील स्तर के कुछ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि यदि समय-समय पर विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच और गुणवत्ता परीक्षण किया जाता, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। ग्रामीणों का मानना है कि संबंधित विभागों द्वारा प्रभावी निगरानी की कमी के कारण ही कथित रूप से घटिया निर्माण कार्यों को बढ़ावा मिला।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी हरदोई, मुख्य विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराने की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए तथा यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
पारदर्शिता की आवश्यकता
ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाले विकास कार्य सीधे तौर पर जनता के धन से संचालित होते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की अनियमितता न केवल सरकारी धन की हानि है, बल्कि ग्रामीण विकास की अवधारणा को भी प्रभावित करती है। यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला पंचायती राज व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर करता है।
बंदरहा ग्राम पंचायत का यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि होना शेष है। अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाता है या नहीं।
प्रधान सम्पादक अनन्तराम कुशवाहा
Hardoi, Hardoi | Jun 15, 2026