आयुर्वेद और एलोपैथी में प्रतिस्पर्धा नहीं, समन्वय जरूरी : डीएम
ग्यारहवें आयुर्वेद दिवस पर राजकीय अयोध्या शिवकुमारी आयुर्वेद महाविद्यालय में समारोह, वैज्ञानिक सत्र में विशेषज्ञों ने साझा किए विचार
बेगूसराय। राजकीय अयोध्या शिवकुमारी आयुर्वेद महाविद्यालय, बेगूसराय में बुधवार को ग्यारहवें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह का उद्घाटन जिलाधिकारी रिची पांडेय ने किया। समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है। आयुर्वेद और एलोपैथी के बीच प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग एवं समन्वय की भावना होनी चाहिए, जिसका सीधा लाभ मरीजों को मिलेगा।
डीएम ने कहा कि रोगी काफी विश्वास के साथ चिकित्सक के पास पहुंचते हैं। ऐसे में सभी चिकित्सा पद्धतियों का उद्देश्य मरीज को बेहतर उपचार एवं स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद प्राचीन समय से ही लोगों के बीच लोकप्रिय रहा है और कोरोना काल में भी इसकी उपयोगिता सामने आई। आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन का विज्ञान है।
उन्होंने महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं को गुरु के प्रति सम्मान बनाए रखने तथा गुरु-शिष्य के बीच निरंतर संवाद कायम रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इससे गुरु-शिष्य परंपरा मजबूत होगी और विद्यार्थियों को आयुर्वेद के ज्ञान एवं सिद्धांतों को गहराई से समझने का अवसर मिलेगा।
समारोह में सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि कोई भी चिकित्सा पद्धति दूसरी पद्धति की प्रतिस्पर्धी नहीं है। सभी चिकित्सा पद्धतियों को मिलकर कार्य करना चाहिए। वहीं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास त्रिपाठी ने कहा कि वर्तमान समय में देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं औषधियों की महत्ता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में आयुर्वेद की महत्वपूर्ण भूमिका है और महर्षि चरक के सिद्धांतों को व्यवहार में अपनाकर कई बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।
सदर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अखिलेश कुमार सिंह ने आयुर्वेद महाविद्यालय से अपने पुराने संबंध का उल्लेख करते हुए कहा कि वे आयुर्वेद के समर्थक हैं और महाविद्यालय परिसर में आकर उन्हें प्रसन्नता हुई।
कार्यक्रम के दौरान डीएम रिची पांडेय को प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास त्रिपाठी ने अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार को भी उपहार एवं स्मृति चिह्न प्रदान किया गया। वहीं सदर अस्पताल अधीक्षक डॉ. अखिलेश कुमार सिंह को महाविद्यालय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. दिलीप कुमार वर्मा ने अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न एवं उपहार देकर सम्मानित किया।
वैज्ञानिक सत्र में विशेषज्ञों ने रखे विचार
समारोह के बाद सम्मेलन का वैज्ञानिक सत्र शुरू हुआ। प्रथम सत्र में चौधरी ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान, नई दिल्ली के शल्य तंत्र विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. महेश कुमार ने ‘आयुर्वेद में शल्य कर्म की भूमिका’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने अग्निकर्म, शलाका एवं क्षार सूत्र सहित आयुर्वेद में वर्णित विभिन्न शल्य प्रक्रियाओं की जानकारी विद्यार्थियों को दी।
दूसरे वैज्ञानिक सत्र में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमेरिटस डॉ. चंद्रभूषण झा ने ‘रस शास्त्र के माध्यम से हेल्थ प्रमोशन’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने रस शास्त्र के माध्यम से स्वास्थ्य संवर्धन और रोगियों के स्वास्थ्य लाभ में इसके उपयोग एवं संभावनाओं पर जानकारी दी।
तीसरे सत्र में विद्यार्थियों ने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। इस दौरान विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं शिक्षकों ने शोध प्रस्तुतियों का मार्गदर्शन किया।
सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. संतोष कुमार सिंह ने आयोजन की सफलता पर प्रकाश डाला। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. गार्गी प्रसाद शुक्ल ने किया। संचालन डॉ. सुशांत कुमार एवं सह-संचालन डॉ. रमन रंजन ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय के चिकित्सकों, शिक्षकों एवं कर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।