बाल विवाह को जड़ से ख़त्म करने हेतु शिक्षक की अहम भूमिका- डॉ. पंड्या
बाल विवाह के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र का वैश्विक दिवस की घोषणा बाल विवाह मुक्त समाज की दिशा में महत्वपूर्ण क़दम- डॉ पंड्या
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उदयपुर, 5 सितम्बर। बाल विवाह के खिलाफ जमीनी अभियान चला रहे गायत्री सेवा संस्थान ने संयुक्त राष्ट्र के 27 नवंबर को ‘बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह की समाप्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस’ घोषित करने के ऐतिहासिक कदम का स्वागत किया है। संगठन ने कहा कि यह सरकार व प्रशासन के सहयोग से देश में बाल विवाह के खिलाफ अभियान चला रहे नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के अथक और असाधारण प्रयासों को वैश्विक मान्यता है। गायत्री सेवा संस्थान जेआरसी का एक सहयोगी संगठन है। जेआरसी लंबे समय से इस दिवस की मांग कर रहा था। शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर हुए संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में बाल विवाह की रोकथाम हेतु दिवस की घोषणा के उपलक्ष्य में शनिवार को शिक्षक दिवस पर जिले के जनजाति बाहुल्य खेरवाड़ा एवं झाडोल पंचायत के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में बाल विवाह रोकने हेतु प्रयासरत शिक्षकों का सम्मान समारोह गायत्री सेवा संस्थान द्वारा आयोजित किया गया।
इस अवसर पर बाल अधिकार विशेषज्ञ एवं पूर्व सदस्य राजस्थान बाल आयोग, राजस्थान सरकार डॉ. शैलेन्द्र पण्ड्या ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत से उठी आवाज आज पूरी दुनिया का संकल्प बन गई है। साथ ही यह पूरे भारत के लिए भी गर्व का विषय है, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र ने बाल विवाह के खिलाफ वैश्विक दिवस के लिए 27 नवंबर की तारीख चुनी। 2024 में इसी दिन भारत सरकार ने जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन जैसे नागरिक समाज संगठनों को साथ लेकर ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान की शुरुआत की थी। लेकिन यह जश्न मनाकर रुक जाने का क्षण नहीं है। संयुक्त राष्ट्र की घोषणा ने हमें गौरव दिया है। अब हमारी जिम्मेदारी है कि दुनिया के हर बच्चे को बाल विवाह मुक्त बचपन भी मिले। हमारे सामने इस संकल्प को जमीन पर उतारने की चुनौती भी है। जब तक जिले के किसी गांव का एक भी बच्चा बाल विवाह के डर में जी रहा है, तब तक हमारी लड़ाई अधूरी है। इस दिशा मे शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है, हमे मिलकर बाल विवाह को जड़ से ख़त्म करना होगा
इस अवसर पर कार्यक्रम विद्यालय की प्रधानाचार्या नीलम ने शिक्षक दिवस से एक दिन पूर्व सयुक्त राष्ट्र द्वारा बाल विवाह की रोकथाम हेतु घोषित अंतर्राष्ट्रीय दिवस की पहल की सराहना करते हुए गायत्री सेवा संस्थान द्वारा जनजाति अंचल में बाल विवाह रोकने हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और बच्चों को बाल विवाह से होने वाले नुक़सान से अवगत कराया।
इस अवसर पर गायत्री सेवा संस्थान के कार्यक्रम समन्वयक नितिन पालीवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने बाल विवाह के खात्मे के लिए एक अलग अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने की पहल की थी। मार्च 2026 में संयुक्त राष्ट्र में भुवन ऋभु ने अपने संबोधन के दौरान कई वैश्विक नेताओं की मौजूदगी में एक बार फिर बाल विवाह के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने के लिए प्रस्ताव लाने की बात कही। तब अफ्रीकी देश सिएरा लियोन की फर्स्ट लेडी डॉ. फातिमा मादा बायो भी मौजूद थीं, जिन्होंने इस पहल का समर्थन किया। इसके बाद सिएरा लियोन ने भारत सहित करीब 50 देशों के समर्थन वाला प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किया। जिसमें 27 नवंबर को बाल विवाह समाप्त करने के लिए समर्पित वैश्विक दिवस घोषित करने की मांग थी। 4 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र ने इस प्रस्ताव को पारित कर दिया। इस उपलक्ष्य में शिक्षक दिवस के अवसर पर बाल विवाह की रोकथाम हेतु सहयोगी शिक्षकों का संस्थान द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यक्रम आयोजित कर सम्मानित किया जा रहा है स भारत में जेआरसी अपने सहयोगी संगठनों के साथ देश के सभी 782 जिलों में बाल विवाह के खिलाफ अभियान चला रहा है। जेआरसी ने अपने सहयोगी संगठनों के साथ सरकारों और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से समुदायों, स्कूलों, पंचायतों, आदिवासी और वंचित समुदायों, महिलाओं, पुलिसकर्मियों, धर्मगुरुओं और जनप्रतिनिधियों को बाल विवाह रोकने के लिए एकजुट किया है। जेआरसी के सहयोगी संगठनों ने देश में 5,50,000 से अधिक बाल विवाह रुकवाए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि जब सरकार, नागरिक समाज और समुदाय मिलकर काम करते हैं, तो बाल विवाह को रोका जा सकता है और अंततः पूरी तरह समाप्त भी किया जा सकता है।
इस अवसर पर गायत्री सेवा संस्थान की परियोजना समन्वयक पायल कनेरिया ने मुहिम का प्रभाव बताते हुए बाल विवाह की दर में आई गिरावट की जानकारी दी। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (2019-21) के अनुसार देश में 23.3 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल से पहले हो चुकी थी, जबकि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-6 (2023-24) में यह आंकड़ा घटकर 20.1 फीसदी रह गया। वहीं भारत सरकार ने 2026 तक बाल विवाह की दर को 10 फीसदी तक घटाने का लक्ष्य रखा है। केंद्र और राज्य, दोनों ही स्तरों पर लगातार किए जा रहे प्रयासों की बदौलत उम्मीद है कि 2026 खत्म होते-होते भारत में बाल विवाह की दर 15 फीसदी से भी नीचे आ जाएगी। यह 2030 तक बाल विवाह को समाप्त करने की वैश्विक प्रतिबद्धता सतत विकास लक्ष्य 5 (लैंगिक समानता) के लक्ष्य 5.3 के अनुरूप है। जिसमें बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह जैसी सभी नुकसानदेह प्रथाओं को खत्म करने की बात कही गई है।
Girwa, Udaipur | Sep 5, 2026