अमर शहीद खुदीराम बोस को शहादत दिवस पर दी गई श्रद्धांजलि, 11 अगस्त की सुबह सेल प्रकोष्ठ व कारा परिसर में हुआ कार्यक्रम
मुजफ्फरपुर। अमर शहीद खुदीराम बोस के शहादत दिवस के अवसर पर 11 अगस्त 2026 की सुबह करीब 4:30 बजे विभिन्न प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, पुलिस उप महानिरीक्षक, तिरहुत क्षेत्र, जिला पदाधिकारी, वरीय पुलिस अधीक्षक, अपर समाहर्ता (राजस्व), अनुमंडल पदाधिकारी पूर्वी, काराधीक्षक, उपाधीक्षक सहित अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी मौजूद रहे।
खुदीराम बोस के परिजनों और बंगाल से आए लोगों ने भी सेल प्रकोष्ठ, जहां खुदीराम बोस को फांसी दी गई थी, फांसी स्थल तथा कारा परिसर स्थित उनकी प्रतिमा पर श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। अधिकारियों और उपस्थित लोगों ने अमर शहीद की वीरता और देश के लिए दिए गए बलिदान को याद किया।
18 वर्ष की उम्र में शुरू किया क्रांतिकारी संघर्ष
अमर शहीद खुदीराम बोस बंगाल के मिदनापुर जिले के निवासी थे। वर्ष 1905 में बंगाल विभाजन के बाद वे क्रांतिकारी समिति से जुड़े और महज करीब 18 वर्ष की उम्र में ब्रिटिश शासन के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय हो गए।
ब्रिटिश न्यायाधीश डगलस किंग्सफोर्ड के खिलाफ खुदीराम बोस ने कार्रवाई का निर्णय लिया। किंग्सफोर्ड बंगाल से स्थानांतरित होकर मुजफ्फरपुर के जिला जज बने थे। 30 अप्रैल 1908 को किंग्सफोर्ड की बग्घी पर बम फेंका गया, हालांकि किंग्सफोर्ड उस बग्घी में नहीं थे। इस घटना में बग्घी में सवार दो महिलाओं की मौत हो गई।
इसके बाद 1 मई 1908 को खुदीराम बोस को गिरफ्तार कर मुजफ्फरपुर जेल में बंद किया गया। करीब तीन महीने से अधिक समय तक कारा में रखने के बाद 11 अगस्त 1908 को महज 18 वर्ष की उम्र में उन्हें फांसी दे दी गई।
खुदीराम बोस का बलिदान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में युवाओं के साहस और देशभक्ति की मिसाल के रूप में याद किया जाता है।