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क्या जैन धर्म राष्ट्र के लिए लड़ने की बात करता है ?
राजवीर जी बताते हैं कि इतिहास में राजस्थान के कई राजाओं की सेनाओं में जैन सेनापति और कमांडर भी रहे हैं, और जैनों ने भी युद्धभूमि में राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना रक्त बहाया है।
आचार्य महाश्रमण जी की सीख के अनुसार हिंसा को तीन प्रकारों में समझा जा सकता है—अनजाने में होने वाली हिंसा, राष्ट्र की रक्षा के लिए की जाने वाली हिंसा और पूर्व नियोजित हिंसा।
वे बताते हैं कि जैन धर्म राष्ट्र की रक्षा के पक्ष में है। यदि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए युद्ध करना आवश्यक हो, तो राष्ट्र की रक्षा करना अपना कर्तव्य है।
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Badgaon, Udaipur | Sep 19, 2026