क्या अब हम अपने जंगलों में छल भी नहीं पूज सकते हैं इसके लिए भी अब परमिशन लेनी होगी?
"राज्य तो बन गया, लेकिन क्या उत्तराखंड अपने मूल निवासियों के लिए भी बन पाया?"
उत्तराखंड के जल, जंगल और जमीन पर क्या अब मूल निवासियों का हक खत्म होता जा रहा है? क्या अपने ही जंगलों में पारंपरिक पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक अधिकारों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं?
उत्तराखंड एकता मंच के संयोजक अनील उप्रेती की बातें आपको सोचने पर मजबूर कर देंगी। आखिर राज्य आंदोलन के सपनों का उत्तराखंड बनने के बाद आम पहाड़ी, किसान और मूल निवासी को क्या मिला? और क्या खोया?
देखिए यह विशेष बातचीत और जानिए उत्तराखंड के भविष्य को लेकर उठ रहे बड़े सवाल।
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