बीज शोधन अपनाकर बढ़ाएं उत्पादन, कम करें लागत: जिला कृषि रक्षा अधिकारी
हरदोई, 6 जून। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने किसानों से फसलों की बुवाई से पूर्व बीज शोधन अपनाने की अपील करते हुए कहा है कि यह बेहतर उत्पादन, कम लागत और रोगों से बचाव का प्रभावी उपाय है। उन्होंने बताया कि फसलों में हर वर्ष कीट, रोग एवं खरपतवारों के कारण होने वाली क्षति तथा कृषि रक्षा रसायनों के अविवेकपूर्ण प्रयोग से स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे में बुवाई से पहले बीज शोधन करना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि कृषि विभाग द्वारा वर्ष 2026-27 को “बीज वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है, जिसमें बीज शोधन का विशेष महत्व है। इसी क्रम में जनपद हरदोई में “बीज शोधन अभियान-स्वस्थ बीज, समृद्ध किसान” का आयोजन 5 जून से 4 जुलाई 2026 तक किया जा रहा है। अभियान के तहत सभी ग्राम पंचायतों में किसानों को बीज शोधन के प्रति जागरूक किया जाएगा।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि बीज जनित रोगों से बचाव के लिए बुवाई से पूर्व प्रति किलोग्राम बीज पर 5 से 10 ग्राम ट्राइकोडर्मा हारजेनियम का प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा धान की नर्सरी तैयार करने से पहले कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी की 3 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से उपचारित करना लाभकारी होता है।
उन्होंने बताया कि बीज उपचार करने से धान की नर्सरी में लगने वाले भूरा धब्बा, सीड ब्लाइट सहित कई बीज जनित रोगों में कमी आती है। इसके अतिरिक्त मूंग, उड़द, मूंगफली, ज्वार, बाजरा एवं मक्का जैसी फसलों के बीजों का भी बुवाई से पूर्व उपचार किया जाना चाहिए।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि बीज उपचार के लिए आवश्यक रसायन जनपद की सभी राजकीय कृषि रक्षा इकाइयों पर 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे बीज शोधन की तकनीक अपनाकर स्वस्थ फसल, अधिक उत्पादन और बेहतर आय सुनिश्चित करें।