बलिया के नौरंगा गांव में गंगा के बढ़ते जलस्तर और कटान के खतरे के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जब बार-बार शिकायत के बावजूद कोई मदद नहीं मिली, तो ग्रामीणों ने खुद ही मोर्चा संभाल लिया।
गांव के लोगों ने आपस में चंदा इकट्ठा किया और बांस-बल्ली के सहारे अस्थाई बांध बनाकर अपने घरों और खेतों को बचाने की पहल शुरू कर दी। ग्रामीणों का कहना है कि गंगा का पानी तेजी से कटान कर रहा है, जिससे पूरा गांव खतरे में है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब तक मौके पर नहीं पहुंचे।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नेता और अधिकारी सिर्फ चुनाव के समय नजर आते हैं, लेकिन संकट की घड़ी में कोई साथ नहीं देता। ऐसे में मजबूर होकर ग्रामीणों को खुद ही ‘इंजीनियर’ बनना पड़ा और अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी पड़ी।
हैरानी की बात यह है कि जब इस संबंध में संबंधित अधिकारी से जानकारी ली गई, तो उन्होंने पूरे मामले से अनभिज्ञता जाहिर की। इससे प्रशासन की संवेदनहीनता और लापरवाही साफ नजर आती है।
नौरंगा गांव की यह पहल जहां एक ओर ग्रामीणों के साहस और एकजुटता को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर सिस्टम की विफलता की भी कहानी बयां करती है।#Balliakhabar #Ballia