चौकी इंचार्ज पर विधवा महिला को धमकाने के आरोप, पुलिस अधीक्षक से लगाई न्याय की गुहार
घर खाली कराने के लिए पुलिस पर दबाव बनाने का आरोप, फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी का दावा
शिकायत के बाद जांच की मांग, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
✒️ रिपोर्ट: यूपी हेड नागेंद्र पांडय
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के मलवां थाना क्षेत्र स्थित सौरा चौकी से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें एक विधवा महिला ने चौकी इंचार्ज पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला ने पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि उसे घर खाली कराने के लिए कथित रूप से पुलिस के माध्यम से दबाव बनाया जा रहा है तथा विरोध करने पर फर्जी मुकदमे में फंसाने और परिजनों को जेल भेजने की धमकी दी जा रही है। फिलहाल यह आरोप शिकायतकर्ता के हैं, जिनकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, चखेड़ी गांव निवासी जन्नतुन निशा, पत्नी स्वर्गीय रियासत खां ने पुलिस अधीक्षक को दिए प्रार्थना पत्र में कहा है कि वर्ष 2018 में उन्होंने अपना खेत बेच दिया था, लेकिन मकान नहीं बेचा। उनके अनुसार, घर की देखरेख के लिए उन्होंने लईक खान को वहां रहने की अनुमति दी थी।
महिला का आरोप है कि पड़ोस की एक महिला कथित रूप से मकान पर कब्जा करना चाहती है। शिकायत में कहा गया है कि इसी विवाद के दौरान सौरा चौकी इंचार्ज बृजेश कुमार द्वारा पुलिसकर्मियों को घर भेजकर कथित रूप से गाली-गलौज की गई और मकान खाली करने का दबाव बनाया गया।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि यदि घर खाली नहीं किया गया तो भू-माफिया संबंधी कार्रवाई करने और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में फर्जी मुकदमा दर्ज कर परिवार के सदस्य को जेल भेजने की धमकी दी गई। महिला ने अपने प्रार्थना पत्र में स्वयं को भयभीत बताते हुए निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग की है।
मामले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक पुलिस विभाग की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि संपत्ति या कब्जे से जुड़े मामलों का निस्तारण न्यायालय, राजस्व विभाग और विधिक प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए। यदि किसी सरकारी अधिकारी पर अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप लगता है, तो उसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। वहीं, यदि आरोप असत्य पाए जाते हैं तो यह भी जांच का विषय होता है।
इस मामले में भी वास्तविक स्थिति पुलिस अधीक्षक स्तर पर होने वाली जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। जांच पूरी होने से पहले किसी भी पक्ष को दोषी या निर्दोष मानना उचित नहीं होगा।
🟥 अपील
किसी भी भूमि, मकान या कब्जे से जुड़े विवाद का समाधान केवल कानून और सक्षम न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए।यदि किसी नागरिक को किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति द्वारा अनुचित दबाव,धमकी या उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा हो तो वह संबंधित उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर उपलब्ध साक्ष्य सुरक्षित रखें।प्रशासन से अपेक्षा है कि ऐसे संवेदनशील मामलों की निष्पक्ष,पारदर्शी और समयबद्ध जांच कर वास्तविक तथ्यों के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए,जिससे आमजन का कानून और पुलिस व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।
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📅 दिनांक: 15 सितम्बर 2026
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नोट: यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र और उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी पर आधारित है।समाचार में उल्लिखित सभी आरोप शिकायतकर्ता के हैं। इनकी पुष्टि संबंधित विभागीय जांच,पुलिस विवेचना एवं विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।सभी पक्षों को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्राप्त है।