#बलरामपुर: #सुप्रीम_कोर्ट के आदेश की उड़ रही धज्जियां, होटलों में मुफ्त पानी की जगह ग्राहकों से 'बोतलबंद' लूट
#बलरामपुर: होटलों में चल रहा 'प्यास' का कारोबार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखा रहे नामचीन रेस्टोरेंट
#बलरामपुर: रेहड़ी वाले पिला रहे मुफ्त पानी, बड़े होटलों में 'मिनरल वाटर' के नाम पर वसूली; वकीलों ने प्रशासन को दिखाया आईना
क्या बलरामपुर के 80 फीसदी गरीबों को मुफ्त पानी पीने का हक नहीं? वकीलों ने खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल
बलरामपुर: भीषण गर्मी के बीच बलरामपुर जिले में पानी के नाम पर 'बाजारवाद' और मनमानी का एक बड़ा मामला सामने आया है। एक तरफ जहां चिलचिलाती धूप में रेहड़ी-पटरी वाले और छोटे दुकानदार आम जनमानस को इंसानियत के नाते मुफ्त में शुद्ध पेयजल उपलब्ध करा रहे हैं, वहीं शहर के नामचीन होटल और रेस्टोरेंट खुलेआम ग्राहकों की जेब काटने में लगे हैं।
इन बड़े प्रतिष्ठानों में मुफ्त पानी की कोई व्यवस्था नहीं है और प्यास बुझाने के लिए ग्राहकों को मजबूरी में बोतलबंद पानी (मिनरल वाटर) खरीदना पड़ रहा है। इस खुली लूट और प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ अब जिला युवा अधिवक्ता एसोसिएशन, बलरामपुर ने मोर्चा खोल दिया है और जिम्मेदार अधिकारियों को उनकी कार्यप्रणाली का आईना दिखाया है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष मृगेंद्र उपाध्याय (एडवोकेट) ने 22 जून 2026 को जिले के खाद्य सुरक्षा अधिकारी को एक कड़ा पत्र लिखा है। इस पत्र के जरिए उन्होंने प्रशासन का ध्यान माननीय उच्चतम न्यायालय के उस अहम निर्देश की तरफ खींचा है, जिसे जिले के होटल कारोबारी और खुद अधिकारी संभवतः भूल चुके हैं।
पत्र में स्पष्ट रूप से इस बात का हवाला दिया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों और उपभोक्ता संरक्षण कानून के अनुसार, सभी होटलों, रेस्टोरेंट्स और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में ग्राहकों के लिए शुद्ध एवं निःशुल्क पेयजल की व्यवस्था होना अनिवार्य है। इसके बावजूद, बलरामपुर के इन प्रतिष्ठानों में शुद्ध पानी मुहैया कराने के बजाय, ग्राहकों के सामने सीधे मिनरल वाटर की बोतल रख दी जाती है और उसकी मनमानी कीमत वसूली जाती है, जो कि सीधे तौर पर न्यायालय के आदेशों की अवमानना है।
अधिवक्ताओं ने अपने पत्र में जिले की सामाजिक और आर्थिक हकीकत का भी प्रमुखता से जिक्र किया है। उन्होंने अधिकारियों को बताया है कि बलरामपुर जनपद की लगभग 80 प्रतिशत आबादी गरीब तबके से आती है। इस भीषण गर्मी में जब ये गरीब और आम लोग घरों से बाहर निकलते हैं, तो उनके लिए होटलों में जाकर बोतलबंद पानी खरीदकर पीना आर्थिक रूप से कतई संभव नहीं है। यह स्थिति तब और भी शर्मनाक हो जाती है जब फुटपाथ के छोटे व्यापारी तो शुद्ध पानी मुफ्त दे रहे हैं, लेकिन मुनाफा कमाने वाले बड़े प्रतिष्ठान अपनी सामाजिक और कानूनी जिम्मेदारी से पूरी तरह मुकर रहे हैं।
इस पूरे मामले में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यशैली और उनकी चुप्पी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जिला युवा अधिवक्ता एसोसिएशन ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी से सख्त अपेक्षा की है कि वे तत्काल प्रभाव से जनपद के सभी होटलों, रेस्टोरेंट्स और प्रतिष्ठानों को कड़े निर्देश जारी करें। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि हर व्यावसायिक स्थल पर आम लोगों और ग्राहकों के लिए अपने यहां शुद्ध और निःशुल्क शुद्ध पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था हो।
अब देखना यह होगा कि वकीलों की इस पहल और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला दिए जाने के बाद प्रशासन अपनी कुंभकर्णी नींद से जागता है, या फिर बलरामपुर की गरीब जनता को अपनी प्यास बुझाने के लिए यूं ही कीमत चुकानी पड़ेगी।
#DMBalrampur #Balrampur #UPNews #sdmbalrampur #NewsUpdate #sdmtulsipur #viralreels #viralpost