पौड़ी गढ़वाल: 12 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद गगवाड़स्यूं घाटी में ऐतिहासिक 'मौरी मेले' का हुआ भव्य आगाज़
तमलाग/पौड़ी: उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक 'मौरी मेला' एक बार फिर पौड़ी जिले के पट्टी गगवाड़स्यूं स्थित तमलाग गांव में शुरू हो गया है। कुंभ और नंदादेवी राजजात की तर्ज पर हर 12 साल में आयोजित होने वाले इस 6 महीने लंबे उत्सव में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है।
मेले के दूसरे दिन, परंपरा के अनुसार ग्रामीणों ने अटूट श्रद्धा के साथ 'हनुमान जी' के प्रतीक स्वरूप पेड़ को उखाड़ने की प्राचीन रस्म को विधि-विधान से संपन्न किया। इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए बड़ी संख्या में प्रवासी ग्रामीण और स्थानीय लोग जुटे। मेले के दौरान प्रतिदिन ढोल सागर की थाप पर पांडव नृत्य का आयोजन किया जा रहा है, जो क्षेत्र की जड़ों से जुड़ाव को दर्शाता है।