समर हिल स्कूल में आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण, विद्यार्थियों ने सीखे जीवन रक्षक कौशल
अंतरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस पर आयोजित हुई कार्यशाला, 176 विद्यार्थियों सहित 200 प्रतिभागियों ने लिया भाग
शिमला, अक्टूबर। अंतरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस के अवसर पर डूअर्स मानवतावादी संगठन ने हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा मोचन बल के सहयोग से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय समर हिल, शिमला में आपदा तैयारी एवं प्राथमिक उपचार कार्यशाला आयोजित की। मंगलवार को आयोजित इस कार्यशाला में विद्यार्थियों और विद्यालय के कर्मचारियों को आपदा के दौरान सुरक्षित रहने, व्यवस्थित तरीके से बाहर निकलने, प्राथमिक उपचार देने तथा जीवन रक्षक सहायता उपलब्ध करवाने के व्यावहारिक तरीके सिखाए गए। विद्यालय की प्रधानाचार्य सुषमा कुमारी सहित 176 विद्यार्थियों और 24 शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों समेत कुल 200 प्रतिभागियों ने इसमें भाग लिया।
यह कार्यशाला विद्यालयों में आपदा जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित की जा रही एसटीईपी4स्कूल्स पहल के दूसरे चरण का हिस्सा थी। इस पहल को डूअर्स द्वारा एम3एम फाउंडेशन के सहयोग तथा डीओसीसी एसपीजेआईएमआर के समन्वय से संचालित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और विद्यालय के कर्मचारियों को आपदा के समय सुरक्षित प्रतिक्रिया देने, प्राथमिक उपचार करने और जीवन रक्षक कौशल में प्रशिक्षित करना है।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को भूकंप जैसी आपदा के समय अपनाए जाने वाले ‘झुको, ढको और पकड़े रहो’ सुरक्षा प्रोटोकॉल का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद विद्यालय परिसर से सुरक्षित निकासी के लिए अभ्यास किया गया। विद्यार्थियों ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए सुरक्षित क्षेत्र तक पहुंचकर अभ्यास पूरा किया। इस गतिविधि के माध्यम से उन्हें आपदा के समय घबराने के बजाय सुरक्षा निर्देशों का पालन करने, अनुशासित तरीके से बाहर निकलने और सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के महत्व की जानकारी दी गई।
इसके पश्चात हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा मोचन बल की टीम ने आपदा तैयारी, आपातकालीन प्रतिक्रिया और प्राथमिक उपचार पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान भूकंप सहित अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में बरती जाने वाली सावधानियों और प्रभावित व्यक्तियों को समय पर सहायता उपलब्ध करवाने के तरीकों के बारे में बताया गया।
प्रशिक्षण के दौरान किसी व्यक्ति के बेहोश होने की स्थिति में उसकी अवस्था का प्रारंभिक आकलन करने, जीवन के संकेतों की जांच करने तथा हृदय और श्वसन क्रिया दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया यानी सीपीआर सहित बुनियादी जीवन रक्षक तकनीकों की जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों को एंबुलेंस सहित आवश्यक आपातकालीन सेवाओं के संपर्क नंबरों से भी अवगत करवाया गया, ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते सहायता प्राप्त की जा सके।
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस प्रतिवर्ष 13 अक्टूबर को मनाया जाता है। वर्ष 2026 की थीम ‘लचीलापन घर से शुरू होता है’ रखी गई है। यह थीम आपदा के जोखिम को कम करने के लिए व्यक्तिगत तैयारी, जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी के महत्व को रेखांकित करती है।
डूअर्स और हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा मोचन बल के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यशाला ने विद्यार्थियों और विद्यालय के कर्मचारियों को आपदा के समय अधिक जागरूक, सतर्क और सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आपदा से निपटने के लिए पूर्व तैयारी, सही जानकारी और समय पर की गई कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण है। इन उपायों को अपनाकर आपातकालीन परिस्थितियों में जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।