अंग्रेजो के जमाने में भी नैनीताल ने 4 बार खतरनाक भूस्खलन झेले है, Nainital has faced 4 times dangerous landslides✅
बहुत से लोग सोचते है कि नैनीताल में 18 सितंबर 1880 को ही भूस्खलन आया था और उसके बाद अंग्रेजो ने बरसाती नालो का नैनीताल में निर्माण किया लेकिन दोस्तों यह जानकारी थोड़ी अधूरी है क्योकि 1880 से पहले भी नैनीताल में 1866, 1867, 1869 और 1879 में आया जिसने पुराने नैनीताल की शक्ल ही बदल दी.
1866 का भूस्खलन⚠️: यह landslide नैनीताल के उत्तर-पूर्वी भाग अर्थात Alma Hill क्षेत्र में आया था जहाँ आज 7 number और Charton Lodge वाला क्षेत्र है, यह भूस्खलन इतना खतरनाक हुआ था कि जिसने उस जमाने के मल्लीताल क्षेत्र में बसी buildings को तहस नहस कर दिया था इसमें जानमाल का काफी नुक्सान हुआ था.
6 जुलाई 1867 Sher-ka-Danda: यह landslide आज जहाँ पर Nainital zoo, Ramsey Hospital और elphinstone hotel है वहाँ पर आया था और लगभग 1.25 km लंबी crack भी दर्ज हुई थी
1869 Alma Hill पर फिर से आया⚠️: इसे 1866 की instability के बाद की rainfall-triggered घटना माना जाता है, हालाँकि 1866 से तीव्रता थोड़ी कम थी.
1879 तबाही से ठीक एक साल पहले ⚠️: Alma Hill और उससे आगे का क्षेत्र तीसरी बार हिला लेकिन भूस्खलन आंशिक हुआ: British historical accounts इसे 1880 के disaster से ठीक पहले की महत्वपूर्ण चेतावनी मानते हैं
18 September 1880 ☠️: नैनीताल के इतिहास का अब तक का सबसे खतरनाक भूस्खलन जिसने किसी को सँभलने का मौका तक नहीं दिया और 151 लोगों की मृत्यु, कई लोगो के लापता होने की रिपोर्ट और Victoria Hotel, Naina Devi Temple, Assembly Hall, Bell Shop आदि के साथ साथ कई भव्य इमारते नष्ट हुई, इस भूस्खलन ने नैनीझील को कुछ क्षेत्र तक भर दिया था और flats का जन्म हुआ, इतिहासकार बताते है कि इसने मल्लीताल का क्षेत्र ही बदल दिया था.
इसके बाद अंग्रेजो ने सबक लिया और 62 बरसाती नालो का निर्माण किया और सम्पूर्ण नैनीताल को 50 KM के radius में नालो के जाले से बांधा ताकि भविष्य में फिर कभी ऐसे भूस्खलन ना आ सके, लेकिन आज लोगो ने इन्ही नालो के ऊपर घर बना दिए है जो आगे आने वाले किसी बड़ी तबाही का कारण बन सकते है.
तो सवाल यह नहीं है कि अगला बड़ा भूस्खलन कब आएगा? सवाल यह है कि...जब पहाड़ अगली बार चेतावनी देगा, क्या हम उसे सुन पाएंगे?
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Nainital 1850's ✅: कोई रास्ता नहीं था तब मल्लीताल जाने का हर जगह घने जंगल और रास्तो में झाड़िया थी, यह नैनीताल का प्रारंभिक दौर था.
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