Public App Logo
Profile Picture

Nainital Mania

@nainitalmania
204Followers
0Following
अंग्रेजो के जमाने का आखिरी नैनीताल, Nainital 1940's ✅

अंग्रेजों ने नैनीताल की अर्थव्यवस्था से लेकर उसके Infrastructure और उसकी modernity तक, हर चीज का ध्यान रखा.
नैनीताल नगर पालिका में बने Clock Tower की कहानी, The story of the clock tower built in Nainital Municipality & History✅: 

दोस्तों 1947 के बाद अर्थात भारत की आजादी के बाद अंग्रेजो ने नैनीताल को छोड़ना शुरू कर दिया था और 3 महीने के अंदर नैनीताल से 99% अंग्रेज़ चले गए थे. अंग्रेजो के चले जाने के बाद नैनीताल में भारतीय संविधान के तहत नैनीताल नगरपालिका का फिर से गठन हुआ.

1950 तक भी अधिकांश लोगो के पास हाथो की घड़िया नहीं हुआ करती थी और नैनीताल के लोग समय देखने के लिए CRST School के clock tower की घडी को देखते थे, इसके अलवा जहाँ जहाँ नैनीताल में ब्रिटिशो की clock tower watch थी वही से वो लोग समय को देखते थे जबकि मल्लीताल के flats जो आजादी के बाद सभी लोगो के आने जाने की प्रमुख जगह थी वहाँ Clock Tower का आभाव था इसीलिए लोगो ने Clock Tower की मांग की और नैनीताल नगरपालिका अध्यक्ष ने सरकारी कोष से पैसा लगाकर England से 4 clock Tower Watch मगाई जिसे आप अभी भी आप देख सकते है.

Nainital Clock Tower Established ✅:
1956 में नगरपालिका का Clock Tower बनकर तैयार हुआ और आज़ादी के बाद के नैनीताल के विकास का प्रमुख गवाह बना...आपको यह भी पता होना चाहिए कि Nainital Nagarpalika की building आज़ादी से पहले AF(I) का institute भी रहा था. 

Nainital Municipal Board History ✅:
दोस्तों नैनीताल नगरपालिका की जो आप building देखते है वो ब्रिटिशकाल के दौरान Municipal Board Office था, जिसे आम बोलचाल में Town Hall भी कहा जाता था...इस बिल्डिंग का निर्माण 3 October 1850 को किया गया था और Mussoorie (मसूरी) के बाद उत्तर भारत के सबसे oldest municipal boards में से एक था..अंग्रेजों ने जब नैनीताल को United Provinces की Summer Capital के रूप में भी इस्तेमाल किया तब  municipal board पर हिल स्टेशन का बुनियादी ढांचा तैयार करने, सड़कों के निर्माण और उच्च स्तर की साफ़-सफाई (sanitation) व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी थी।

Follow Nainital Mania Page for Nainital History
जब चंदो और गोरखाओ का अल्मोड़ा के हवालबाग में युद्ध हुआ 🔥| Chand VS Gorkha Battle | 1790 Mahandra Chand and Gorkha Empire Fight | Chand Vansh | Gorkha Invaded Kumaon & Garhwal | Last Chand Dynasty King <nis:link nis:type=tag nis:id=chandvansh nis:value=chandvansh nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=uttarakhand nis:value=uttarakhand nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=uttarakhandhistory nis:value=UttarakhandHistory nis:enabled=true nis:link/>
क्या हर्षदेव जोशी ने ही कुमाऊ के साथ गद्दारी की? Did Harshdev Joshi betray Kumaon? Harshdev Joshi and Gorkha Shashan in Uttarakhand | Uttarakhand History | Kumaon History
Kumaon में गोरखा शासन और Chand Vansh का पतन | Gorkha Shashan in Uttarakhand <nis:link nis:type=tag nis:id=gorkhashasan nis:value=gorkhashasan nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=history nis:value=history nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=uttarakhand nis:value=Uttarakhand nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=uttarakhandhistory nis:value=uttarakhandhistory nis:enabled=true nis:link/>
जब अंग्रेजो का आखिरी जमाना नैनीताल में चल रहा था, Nainital during 1940's to 1945's (Colonial Era) ✅:

ब्रिटिशकाल के दौरान नैनीताल अपने नाम से जाना जाता था और जाने जाये भी क्यों ना क्योकि अंग्रेजो ने ही तो नैनीताल को खोजा, संवारा और उसको एक महत्वपूर्ण Hill Station बनाया।

अंग्रेजो ने नैनीताल में ब्रिटिश प्रशासन की स्थापना की, नगरपालिका की स्थापना की, कई सारे प्रशासनिक भवनों का निर्माण किया.

ब्रिटिशकाल के दौरान नैनीताल एक शांत, कम भीड़-भाड़ वाला, सभी भौतिक चीजों से संपन्न एक सुंदर शहर था. चारो तरफ अंग्रेजो ने हरियाली का ध्यान रखा था, रोड के किनारे पेड़-पौधे, फूल, यूरोपियन स्टाइल के भवन, रास्ते का निर्माण, Street Light  सभी चीजे अंग्रेजो ने सुव्यस्थित की थी. 

सच में आज जो हम नैनीताल देखते है वो ब्रिटिशकालीन नैनीताल से 80% अलग हो चूका है, क्योंकि दोस्तों अंग्रेजो के जमाने का नैनीताल ऐसा था जिसे नैनीताल कहा जाता था. 

Follow Nainital Mania Page for more Colonial History of Nainital & Uttarakhand History - Nainital Mania
अंग्रेजो के जमाने में नैनीताल में आती थी ऐसी बसे, Nainital during Transportation ✅:

दोस्तों आपको पता है कि Munshi Lalata Prasad Tamta ने Kumaoni Hills Motors (बसों) की स्थापना की. 

Kathgodam से Nainital की ओर मोटर मार्ग बनाए जाने की शुरुआत 1911 में ही हो गई थी और साल 1915 में इसी मार्ग पर कुमाऊं की पहली यातायात सेवा शुरू हुई. इसके 5 साल बाद यानी 1920 में मुंशी लालता प्रसाद टम्टा ने हिल मोटर्स ट्रांसपोर्ट कंपनी की शुरुआत...जहाँ नैनीताल में ऐसी बसे आती थी जो आपने फोटो में देख ली होगी।

उस जमाने में गाड़ियों की speed 18KM से लेकर 30KM तक ही होती थी, जहाँ आगे की सीट गद्दी वाली होती थी और पीछे की लकड़ी के पट्ठे वाली होती थी. जब बस चलती थी जोर जोर से आवाज़ करती थी, गियर बदलने पर गुआ घुआ की आवाज़ करती थी. कई जगह कच्चे रोड थे तो यात्रियों के कपड़े धूल से भर जाते थे.

जो high Class के होते थे वो ब्रिटिश कारो में जाते थे लेकिन जो अन्य होते थे वो बसों में जाते थे, ध्यान रहे कि बसों में बैठना भी बहुत बड़ी बात होती थी क्योकि लोगो को इतना भी पैसा प्राप्त नहीं होता था जो गाड़ियों में बैठ सके. 1980 तक भी लोग बिना गाड़ियों के नैनीताल, भीमताल, हल्द्वानी निकल जाते थे, अंग्रेजो के जमाने की बात तो बहुत दूर की हो गयी.

सच में जिन लोगो ने अंग्रेजो का या आजादी के बाद आये 10 सालो को जिया होगा वो वास्तव में बड़े Legend लोग रहे होंगे 

Follow Nainital Mania Page for more History of Nainital
अंग्रेजो के जमाने में नैनीताल बहुत साफ सुथरा हुआ करता था, Nainital during the  British Era ✅: 

नैनीताल में ब्रिटिश प्रशासन बहुत अच्छा था जिसकी तारीफ वो लोग भी करते थे जिन्होंने ब्रिटिश जमाने को नैनीताल में महसूस किया था. भले ही हम अंग्रेजो के गुलाम थे लेकिन  अंग्रेजो ने Nainital को Non Regulating Provinces के अंदर रखा था, जिससे यहाँ भारत के मैदानी इलाको जैसी कड़े कानून और उस level की गुलामी नहीं होती थी, यहाँ उस समय commissioners शासन चलता था.

अंग्रेजो ने नैनीताल को काफी सुंदर और एक सुव्यस्थित शहर बना कर रखा था जिन्हे गंदगी, भीड़-भाड़ और अवस्थित निर्माण संरचना बिल्कुल पसंद नहीं आती थी, तभी तो नैनीताल को ब्रिटिशकाल के दौरान Golden Days Of Nainital कहा जाता है.

Follow Nainital Mania Page for more Colonial History of Nainital
1955-60 के जमाने का नैनीताल, जब नैनीताल ब्रिटिश छवि में जी रहा था, Nainital during the period of 1955-60 ✅: 

यह 1955 से 1960 का समय था, जिसे नैनीताल का सबसे अच्छा दौर माना जाता है क्योकि तब नैनीताल अपनी रगों में British rule के दौर की संस्कृति और यादों को संजोए हुए था....भारत भले ही आज़ाद हो चुका था, लेकिन इस पर्वतीय नगरी की आबोहवा में अब भी एक अंग्रेजी छवि ज़िंदा थी.

मॉल रोड पर शाम की चहल-पहल, हर दुकानों में English में लिखे हुए दुकानों के नाम, शाम के धुंध में जलतीं पीली बत्तियाँ, और 'नैनी झील' के शांत पानी में तैरतीं ब्रिटिश परदे वाली नावें (Sailing Boats) सब कुछ एक पुराने ब्रिटिशकाल जैसा प्रतीत होता था।

उस दौर में लोग अंग्रेज़ी शिष्टाचार (Etiquette) का पालन करते थे। Nainital clubs में बजता हुआ Western music, Scottish architecture में बने बंगले और अंग्रेज़ी तर्ज़ पर सजे हुए restaurants, नैनीताल को एक अनूठा 'cosmopolitan' रूप देते थे। 

वह 1950-60 का ऐसा समय था जब नैनीताल अपनी भारतीय संस्कृति को गले लगाते हुए भी, अपनी पुरानी ब्रिटिश साख और Elite lifestyle को जीने का शौक़ रखता था..अभी जिनकी उम्र 75 से 90 वर्ष की है उन्होंने नैनीताल का अंग्रेजो द्वारा छोड़ा हुआ दौर जरूर देखा होगा।

Follow Nainital Mania Page for Nainital History - NANITAL MANIA
Shakti Singh Gusai, जिन्होंने chand vansh के दौरान पदों के अनुसार नाम बनाये जो आगे चलकर जातियों में बदल गये | Shakti Singh Gusai and Chand Dynasty History Uttarakhand & Kumaon History
अंग्रेज लोग नैनीताल में, British Era in Nainital ✅:

जैसा कि आप जानते हैं, नैनीताल की खोज और उसके आधुनिक स्वरूप को विकसित करने का श्रेय सिर्फ अंग्रेजों को दिया जाता है, जिन्होंने 1839 से 1947 तक इस नगर पर शासन किया। इसी दौरान नैनीताल एक छोटे से पहाड़ी क्षेत्र से बदलकर एक भव्य और आकर्षक Hill Station के रूप में उभरा।

British काल में नैनीताल के बारे में एक प्रसिद्ध कहावत प्रचलित थी कि "नैनीताल आना छोटी विलायत (दूसरे देश) आने के समान है।" यह बात यूँ ही नहीं कही जाती थी। उस समय जब तराई क्षेत्रों के साथ-साथ Almora, Pithoragarh अथवा Garhwal के दूरस्थ गांवों से लोग पहली बार नैनीताल आते थे, तो यहाँ की चकाचौंध देखकर हैरान रह जाते थे।

अपने गांवों में उन्होंने अधिकतर पत्थरों से बने पारंपरिक मकान ही देखे होते थे, लेकिन नैनीताल पहुँचते ही उनके सामने एक बिल्कुल अलग दुनिया होती थी। यहाँ की विशाल European Buildings, Gym Khana, Nainital Club, Bar, Luxurious Hotel, कपड़ों की दुकानें, Grocery Items से सजे बाजार, Offices, Mall Road, Cinema Hall और तरह-तरह की Lights उन्हें ऐसा एहसास कराती थीं मानो वे किसी दूसरे देश में आ गए हों।

कई इतिहासकारों ने अपने लेखों में उल्लेख किया है कि उस दौर में Nainital पहुँचना पहाड़ के सामान्य लोगों के लिए केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि एक नई और आधुनिक दुनिया से पहला परिचय हुआ करता था। उस समय नैनीताल की ब्रिटिशकालीन भव्यता और आधुनिक सुविधाएँ स्थानीय लोगों के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं थीं।

Follow Nainital Mania page for more Colonial History of the Nainital
P. Barron के जमाने का नैनीताल, जिसने नैनीताल की खोज की , The Founder of The Nainital Mr Peter Barron who had discovered Nainital in Nov 1839 ✅:

नैनीताल की खोज P Barron ने नवंबर 1839 में की, और 1841 में उन्होंने नैनीताल जगह की बात सभी जगह फैला दी थी. P Barron व्यसाय से एक व्यापारी थे जिनका शराब और गन्ने का कारखाना था....उन्होंने उस समय के कुमाऊ कमिश्नर J. H. Batten को पत्र 1842  में पत्र लिखा जिसमे उन्होंने नैनीताल में अपना घर बनाने के लिए जमीन के लिए अर्जी दी. J. H. Batten ने तुरंत P Barron की अर्जी स्वीकार कर ली क्योकि नैनीताल के खोजकर्ता आखिर P Barron जो थे.

अभी जो आप photos नैनीताल की देख रहे हो वो P Barron के जमाने की है जिन्होंने नैनीताल को खोजा और विश्व पटल में नैनीताल का नाम उजागर किया, हालाँकि ये कहना गलत नहीं होगा कि George William Trail 1823 में नैनीताल आये थे लेकिन वो नैनीताल की खोज का credit नहीं ले सके क्योकि Mr Trail धार्मिक स्वाभाव के थे और उन्होंने नैनीताल जगह की जानकारी भारतीयों के आस्था के अनुसार छुपा दी लेकिन 1839 में P Barron का दिमाग इतना चतुर था कि उन्होंने नैनीताल को ढूंढ ही निकाला और नैनीताल के खोजकर्ता का क्रेडिट Mr P Barron ने ले लिया। 

Follow Nainital Mania Page for Nainital History
अंग्रेजो के जमाने में नैनीताल में आती थी ऐसी बसे, Nainital Bus during Colonial Nainital ✅

आज से 100 साल पहले का जमाना बिल्कुल अलग था और भारत में संपूर्ण ब्रिटिश राज था, उस दौरान गाड़िया अपने प्रारंभिक दौर में थी, जहाँ उस जमाने में ऐसी बसे नैनीताल में आया करती थी 

दोस्तों नैनीताल का विकास अंग्रेजो ने 1841 की शुरुवात से ही कर दिया था, और 1880 तक नैनीताल एक प्रसिद्ध hill Station बन चुका था, जब इंग्लैंड में गाड़ियों का आविष्कार हो गया था तब अंग्रेजो की गाड़िया 1910-1912 से India आने लगी थी, George V ने भी कार में बैठकर भारत के कई जगहों की यात्रा की.

नैनीताल में रोड की शुरुवात 1911-1915 के आसपास की बताते है और 1920  से ही नैनीताल में अंग्रेजो की गाड़िया धीरे धीरे आने लगी थी, यही से पता चलता है कि नैनीताल अंग्रेजो के लिए कितना महत्वपूर्ण शहर बन गया था. 

Follow Nainital Mania Page for Nainital History
Marianne North जब इंग्लैंड से 1878 में पहली बार नैनीताल आयी और उत्तराखंड का पुराना जमाना दिखा दिया ✅

अगर अंग्रेज़ों ने नैनीताल की खोज और विकास न किया होता, तो शायद आज यह खूबसूरत पहाड़ी नगर दुनिया भर में इतना प्रसिद्ध न होता। नैनीताल के इतिहास को समझने में अंग्रेज़ों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। लेकिन केवल शहर बसाने तक ही नहीं, कुछ अंग्रेज़ ऐसे भी थे जिन्होंने अपने काम के माध्यम से पुराने कुमाऊँ और गढ़वाल को हमेशा के लिए अमर कर दिया। इन्हीं में से एक थीं Marianne North (English biologist). 

1878 में इंग्लैंड से Marianne North भारत आयी और वो भारत के कई इलाको में घूमी लेकिन उन्हें कुमाऊ और गढ़वाल क्षेत्र बहुत पसंद आया और उन्होंने यहाँ 2 साल बिताये। इन्ही 2 सालो में उन्होंने नैनीताल, भीमताल, मसूरी और अल्मोड़ा समेत संपूर्ण उत्तराखंड की यात्रा की और उन जगहों की painting करी क्योकि Camera हर किसी के पास हो ये संभव नहीं था बल्कि camera अपने प्रारंभिक दौर में था.

Marianne North ने नैनीताल और संपूर्ण कुमाऊ को अपने पेंटिंग के माध्यम से संजोया जिनकी मदद से हमें ये पता चला की आज से 200 साल पहले का नैनीताल और उत्तराखंड का पहाड़ी क्षेत्र कैसा था.

Marianne North का जन्म 24 August 1830 को Hastings, England में हुआ था  वे दुनिया भर की दुर्लभ वनस्पतियों, पेड़-पौधों और प्राकृतिक दृश्यों को चित्रों के माध्यम से संरक्षित करने के लिए जानी जाती हैं.. उन्होंने विवाह नहीं किया और अपना जीवन अधिकांश यात्रा और चित्रकला को समर्पित किया.....1871 से 1885 के बीच उन्होंने Asia, Africa, Australia, Northऔर South America सहित कई देशों की यात्रा की।

उस समय फोटोग्राफी इतनी विकसित नहीं थी, इसलिए उनके चित्र वैज्ञानिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं......उनका निधन 30 August 1890 को हुआ.

Follow Nainital Mania for Nainital and Uttarakhand History
My Elder Sisters & Brother, Past Memory 21 years ago

<nis:link nis:type=tag nis:id=beforeandafter nis:value=beforeandafter nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=oldtonew nis:value=oldtonew nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=nainital nis:value=nainital nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=photo nis:value=photo nis:enabled=true nis:link/>
चंद राजा Shakti Singh Gusai अंधे थे लेकिन कुमाऊँ को मुठ्ठी और नाली का ज्ञान देकर चले गए✅:

चंद राजा Rudra Chand के सबसे बड़े पुत्र Shakti Singh Gusai (शक्तिसिंह गुसाईं) जन्म से ही दृष्टिहीन थे। राजगद्दी के असली उत्तराधिकारी होने के बावजूद उन्होंने राज्य के हित को सर्वोपरि रखा और अपने छोटे भाई लक्ष्मी चंद को कुमाऊँ की गद्दी सौंप दी। लेकिन आंखों की रोशनी न होने के बावजूद उनकी बुद्धिमत्ता और दूरदर्शिता पूरे कुमाऊँ में प्रसिद्ध थी।

कहा जाता है कि शक्तिसिंह गुसाईं ने अपनी दृष्टि वापस पाने के लिए अनेक धार्मिक अनुष्ठान, दान-पुण्य और पूजा-पाठ किए, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। फिर भी उन्होंने समाज के लिए ऐसा कार्य किया, जिसकी पहचान आज भी कुमाऊँ की संस्कृति में जीवित है।

उन्होंने भूमि मापन की दो महत्वपूर्ण इकाइयों,"मुठ्ठी" (Mutthi) और "नाली" (Naali), को व्यवस्थित रूप दिया ताकि लोग अपनी खेती और जमीन को आसानी से माप सकें।

शक्तिसिंह गुसाईं के अनुसार "मुठ्ठी" का अर्थ 1 मुठ्ठी धान, गेहूं या �
जब अंग्रेज लोग पहली बार लामा लेकर नैनीताल आये, Llama came in Nainital 1940's ✅: 

दोस्तों जैसा कि आप जानते है कि नैनीताल...
क्या आपको पता है कि मुगल बादशाह औरंगज़ेब के भतीजे "सुलेमान शिकोह" ने गढ़वाल के शासक पृथ्वीपति शाह के वहाँ शरण ली थी ! 

जब...
गढ़वाल के इतिहास में एक ऐसा वीर राजपूत था जो सिर कटने के बाद भी नहीं झुका, ऐसे वीर महापुरुष कफ्फू चौहान के बारे में जरूर ...
गढ़वाल में एक परंपरा ऐसी थी कि परमार वंश के सैनिक छोटी जाति के लोगो के हाथ से बना खाना नहीं खाते थे लेकिन अजयपाल एक ऐसे प...
Nainital During Colonial Era 1923 Circa✅:

दोस्तों अंग्रेजो के जमाने का नैनीताल आज के नैनीताल से बहुत अच्छा, संपन्न और क...
Nainital During Colonial Era 1890's to 1930's Nainital ✅

ब्रिटिशकाल के दौरान अंग्रेज़ो की हुकूमत नैनीताल में अपने चरम मे...
नैनीताल की Buddhist Monastery कभी अंग्रेजो का Ravenswood House हुआ करता था, क्या है इसका इतिहास चलिए आज जानते है ✅

नैनी...
आजादी के बाद का नैनीताल, Nainital 1947, जरूर पढ़े ✅:

15 August 1947, जैसे ही आज़ादी की सुबह आई, नैनीताल की फिज़ा ही बदल ...
अंग्रेजो के जमाने से है YMCA का इतिहास 1885 circa✅:

अंग्रेजो ने नैनीताल में YMCA की स्थापना 1885-1890 के दौरान करी. YMC...