Public App Logo
Profile Picture

Nainital Mania

@nainitalmania
204Followers
0Following
अंग्रेज़ लोग नैनीताल में तब नैनीताल London जैसा लगता था ✅:

आज जिस नैनीताल की खूबसूरती पर हर कोई फिदा है, उसकी आधुनिक पहचान की नींव अंग्रेज़ों ने रखी थी। 1839 में नैनीताल की खोज के बाद 1841 से अंग्रेज़ों ने इसे बसाना शुरू किया और धीरे-धीरे इसे भारत के सबसे अनुशासित और खूबसूरत हिल स्टेशनों में बदल दिया......उस समय नैनीताल में कुछ ऐसे नियम लागू थे, जिन्हें सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे!

1. पेड़ों की कटाई पर सख्त रोक ★
अंग्रेज़ नैनीताल की हरियाली को अपनी सबसे बड़ी धरोहर मानते थे। बिना अनुमति कोई पेड़ नहीं काट सकता था। पूरे इलाके को छावनी (Cantonment) के नियमों के तहत रखा गया था।

2. शहर की सफाई और विकास सबसे पहले ★
नैनीताल को एक आदर्श Hill Station बनाने के लिए नगरपालिका की लगभग 60% आय शहर की सफाई, सड़कों, पार्कों और अन्य विकास कार्यों पर खर्च की जाती थी।

3. Mall Road पर थूकना या गंदगी फैलाना अपराध था 🚫
अगर कोई Mall Road पर थूकता या कूड़ा फैलाता पकड़ा जाता, तो उस पर तुरंत जुर्माना लगाया जाता था।

4. Upper Mall Road पर भारतीयों का प्रवेश प्रतिबंधित था ★
उस दौर में Upper Mall Road पर केवल अंग्रेज़ और चुनिंदा Elite भारतीयों को ही जाने की अनुमति थी। आम भारतीयों का प्रवेश प्रतिबंधित था।

5. कंक्रीट के मकानों की अनुमति नहीं थी ★
अंग्रेज़ चाहते थे कि नैनीताल का प्राकृतिक सौंदर्य बना रहे, इसलिए केवल European Style के लकड़ी के मकानों को ही अनुमति दी जाती थी।

6. आवारा पशुओं पर भी सख्ती ★
अगर कोई आवारा गाय, बैल या कुत्ता शहर में घूमता मिलता, तो उसे तुरंत नैनीताल शहर की सीमा से बाहर भेजने के आदेश दिए जाते थे।

7. व्यापारियों से ईमानदारी की अपेक्षा ★
व्यवसाय करने वाले लोगों से ईमानदारी और जनता के हित में काम करने के form भराये जाते थे, ताकि शहर की प्रतिष्ठा और व्यवस्था बनी रहे।

यही वजह थी कि...1839 से लेकर 1947 तक का Nainital अपनी साफ-सफाई, अनुशासन, खूबसूरत लकड़ी के भवनों और शांत वातावरण के कारण इतना प्रसिद्ध था कि लोग इसे "The British Nainital", "स्वर्ग" और "London Of India" जैसे नामों से भी पुकारते थे।

आपको क्या लगता है? अगर आज भी नैनीताल में ऐसे नियम लागू हों, तो क्या शहर पहले से भी ज्यादा खूबसूरत बन सकता है? अपनी राय Comment में ज़रूर बताइए - Nainital Mania 

Note: All Photos were Black & White but for better visual I have colorize them.

Nainital History and Nainital Old Photos
1947 तक जब भारतीय लोग नैनीताल में चलते थे तो हर जगह अंग्रेज़ ही दिखते थे ✅:

आज का खूबसूरत नैनीताल कभी पूरी तरह British City हुआ करता था। बहुत कम लोग जानते हैं कि 1841 में जब अंग्रेजों ने यहाँ बसना शुरू किया, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह छोटा सा पहाड़ी इलाका कुछ ही दशकों में British India का सबसे शानदार Hill Station बन जाएगा।

1880 तक Nainital में लगभग 10,000 अंग्रेज रह रहे थे, जिनमें करीब 5,000 English Ladies (Memsahibs) थीं। उस दौर के कई इतिहासकार लिखते हैं कि 1947 तक अगर कोई व्यक्ति Mall Road, Church, Schools, Colleges, Clubs, Shops या Government Office में घूमता था, तो उसे हर तरफ अंग्रेज ही दिखाई देते थे। भारतीय और स्थानीय लोग बहुत कम संख्या में थे। उस समय ऐसा माहौल था कि मानो आप भारत में नहीं, बल्कि सीधे England की किसी सड़क पर घूम रहे हों।

सोचिए... आज जिस Mall Road पर लाखों भारतीय पर्यटक घूमते हैं, कभी वहाँ अंग्रेज अफसर, उनकी Memsahibs, बच्चे और सैनिक ही सबसे ज़्यादा नज़र आते थे। नैनीताल की पहचान ही एक English Town के रूप में थी।

Nainital History 1841✅: 
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती क्योकि जब नैनीताल के बारे में स्थानीय लोगों के अलावा लगभग कोई नहीं जानता था, तब अंग्रेजों ने ही इसकी खूबसूरती की चर्चा पूरी दुनिया में फैला दी। British India से लेकर England, Scotland, Poland और यहाँ तक कि USA तक नैनीताल का नाम पहुँच चुका था।

इसी प्रसिद्धि का असर था कि 1858 में USA से आए एक American Missionary ने यहाँ ईसाई धर्म के प्रचार का कार्य शुरू किया। उसी दौर में Methodist Church (1858) और CRST School जैसी संस्थाएँ स्थापित हुईं, जो आज भी उस ऐतिहासिक विरासत की गवाही देती हैं।

यानी आज का नैनीताल सिर्फ झीलों और पहाड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा शहर है जिसने कभी पूरी दुनिया, खासकर British Empire, का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। और यही इतिहास नैनीताल को भारत के सबसे अनोखे शहरों में से एक बनाता है।

Follow Nainital Mania Page for Nainital History ❤️
गोरखाओ की ख़तरनाक दिव्य परीक्षाये जिनको सुनकर हर किसी के रोंगटे खड़े हो जाते है, Gorkha's Judicial System called Divya Parikshaye 😱
Nainital के आस पास की जगहों के नामो का मतबल जानिए | Bhowali | Ramnagar | Haldwani <nis:link nis:type=tag nis:id=bhowali nis:value=bhowali nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=ghorakhal nis:value=ghorakhal nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=chorgaliya nis:value=chorgaliya nis:enabled=true nis:link/>
अंग्रेजो के जमाने का आखिरी नैनीताल, Nainital 1940's ✅

अंग्रेजों ने नैनीताल की अर्थव्यवस्था से लेकर उसके Infrastructure और उसकी modernity तक, हर चीज का ध्यान रखा.
Gorkha Rifles, जब अंग्रेजों ने गोरखाओ की बहादुरी देखकर, Gorkha Rifles की इस्थापना की और yahi आगे चलकर Gorkha Regiment बना | Anglo Nepalese War & Gorkha Rifles History
एक Couple अपने कुत्ते को लेकर केदारनाथ पहुँच जाता हैं | Reached Kedarnath along with his Dog <nis:link nis:type=tag nis:id=kedarnath nis:value=kedarnath nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=kedarnathtemple nis:value=kedarnathtemple nis:enabled=true nis:link/>
Gorkhao की Divya Parikshaye Part 2 : EAST India Company destroyed all Divine Testes, Gorkha Shashan In Uttarakhand, Uttarakhand History
अंग्रेजो के जमाने का है Grand Hotel✅
Grand Hotel Nainital की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक विरासत इमारतों में से एक है। यह मल्लीताल में नैनीझील के किनारे स्थित है और लगभग 150 वर्ष से भी अधिक समय से पर्यटकों का स्वागत कर रहा है. 

History of the Grand Hotel ✅
1872 में एक अंग्रेज़ Tom Murray ने इस होटल का निर्माण कराया। उस समय यह नैनीताल के शुरुआदा होटलों में से एक था...शुरुआत में इसका नाम The Albion था...बाद में इसका नाम Mayo Hotel रखा गया....लेकिन 1898 में इसका नाम बदलकर The Grand Hotel कर दिया गया, जो आज भी  Grand Hotel के नाम से ही जाना जाता है. 

Pandey Family की Ownership 1933 में Grand Hotel✅
7 अक्टूबर 1933 को कुमाऊँ के प्रसिद्ध पांडे परिवार के Badri Dutt Pandey ने इस होटल को लगभग ₹60,000 (₹20.5 Crore Today) में खरीद लिया.....तब से आज तक यह होटल उसी परिवार की चौथी पीढ़ी द्वारा संचालित किया जा रहा है।

1976 की आग, When a part of the Grand Hotel Caught Fire 🔥
November 1976 में Grand Hotel के एक हिस्से में आग लग गई थी, जिससे लकड़ी का एक पूरा विंग नष्ट हो गया। लेकिन कड़ी मेहनत से उसे उसी सर्दियों में दोबारा बनाया गया और अगले tourist season में होटल फिर से खुल गया।

Famous Guests in Grand Hotel 💐
1.Pandit Jawaharlal Nehru
2. Dilip Kumar
3. Rajesh Khanna
4. Queen of Nepal (in the 1950s)

बताया जाता है कि फिल्म "Kati Patang 1970's" की शूटिंग के दौरान भी इस होटल का उपयोग किया गया था।

Interesting Facts ✅
यह नैनीताल का सबसे पुराना और अंग्रेजो के जमाने से लगातार संचालित (oldest continuously running) होटल माना जाता है....इसकी झील के सामने वाली लोकेशन इसे नैनीताल के सबसे Prestigious Heritage होटलों में शामिल करती है। Grand Hotel अपने Colonial Era की वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।

Follow Nainital Mania Page for more colonial History of the The Nainital.
Uttarakhand All District Meaning | उत्तराखंड के सभी जिलों के नामो का मतलब समझे आज <nis:link nis:type=tag nis:id=uttarakhand nis:value=uttarakhand nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=nainitalmania nis:value=nainitalmania nis:enabled=true nis:link/>
Gorkha Rifles, जब अंग्रेजों ने गोरखाओ की बहादुरी देखकर, Gorkha Rifles की इस्थापना की और yahi आगे चलकर Gorkha Regiment बना | Anglo Nepalese War & Gorkha Rifles History
Gorkhao की Divya Parikshaye Part 2 : EAST India Company destroyed all Divine Testes, Gorkha Shashan In Uttarakhand, Uttarakhand History
गोरखाओ की ख़तरनाक दिव्य परीक्षाये जिनको सुनकर हर किसी के रोंगटे खड़े हो जाते है, Gorkha's Judicial System called Divya Parikshaye 😱
अंग्रेज़ लोग नैनीताल में तब नैनीताल London जैसा लगता था ✅:

आज जिस नैनीताल की खूबसूरती पर हर कोई फिदा है, उसकी आधुनिक पहचान की नींव अंग्रेज़ों ने रखी थी। 1839 में नैनीताल की खोज के बाद 1841 से अंग्रेज़ों ने इसे बसाना शुरू किया और धीरे-धीरे इसे भारत के सबसे अनुशासित और खूबसूरत हिल स्टेशनों में बदल दिया......उस समय नैनीताल में कुछ ऐसे नियम लागू थे, जिन्हें सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे!

1. पेड़ों की कटाई पर सख्त रोक ★
अंग्रेज़ नैनीताल की हरियाली को अपनी सबसे बड़ी धरोहर मानते थे। बिना अनुमति कोई पेड़ नहीं काट सकता था। पूरे इलाके को छावनी (Cantonment) के नियमों के तहत रखा गया था।

2. शहर की सफाई और विकास सबसे पहले ★
नैनीताल को एक आदर्श Hill Station बनाने के लिए नगरपालिका की लगभग 60% आय शहर की सफाई, सड़कों, पार्कों और अन्य विकास कार्यों पर खर्च की जाती थी।

3. Mall Road पर थूकना या गंदगी फैलाना अपराध था 🚫
अगर कोई Mall Road पर थूकता या कूड़ा फैलाता पकड़ा जाता, तो उस पर तुरंत जुर्माना लगाया जाता था।

4. Upper Mall Road पर भारतीयों का प्रवेश प्रतिबंधित था ★
उस दौर में Upper Mall Road पर केवल अंग्रेज़ और चुनिंदा Elite भारतीयों को ही जाने की अनुमति थी। आम भारतीयों का प्रवेश प्रतिबंधित था।

5. कंक्रीट के मकानों की अनुमति नहीं थी ★
अंग्रेज़ चाहते थे कि नैनीताल का प्राकृतिक सौंदर्य बना रहे, इसलिए केवल European Style के लकड़ी के मकानों को ही अनुमति दी जाती थी।

6. आवारा पशुओं पर भी सख्ती ★
अगर कोई आवारा गाय, बैल या कुत्ता शहर में घूमता मिलता, तो उसे तुरंत नैनीताल शहर की सीमा से बाहर भेजने के आदेश दिए जाते थे।

7. व्यापारियों से ईमानदारी की अपेक्षा ★
व्यवसाय करने वाले लोगों से ईमानदारी और जनता के हित में काम करने के form भराये जाते थे, ताकि शहर की प्रतिष्ठा और व्यवस्था बनी रहे।

यही वजह थी कि...1839 से लेकर 1947 तक का Nainital अपनी साफ-सफाई, अनुशासन, खूबसूरत लकड़ी के भवनों और शांत वातावरण के कारण इतना प्रसिद्ध था कि लोग इसे "The British Nainital", "स्वर्ग" और "London Of India" जैसे नामों से भी पुकारते थे।

आपको क्या लगता है? अगर आज भी नैनीताल में ऐसे नियम लागू हों, तो क्या शहर पहले से भी ज्यादा खूबसूरत बन सकता है? अपनी राय Comment में ज़रूर बताइए - Nainital Mania 

Note: All Photos were Black & White but for better visual I have colorize them.

Nainital History and Nainital Old Photos
1947 तक जब भारतीय लोग नैनीताल में चलते थे तो हर जगह अंग्रेज़ ही दिखते थे ✅:

आज का खूबसूरत नैनीताल कभी पूरी तरह British City हुआ करता था। बहुत कम लोग जानते हैं कि 1841 में जब अंग्रेजों ने यहाँ बसना शुरू किया, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह छोटा सा पहाड़ी इलाका कुछ ही दशकों में British India का सबसे शानदार Hill Station बन जाएगा।

1880 तक Nainital में लगभग 10,000 अंग्रेज रह रहे थे, जिनमें करीब 5,000 English Ladies (Memsahibs) थीं। उस दौर के कई इतिहासकार लिखते हैं कि 1947 तक अगर कोई व्यक्ति Mall Road, Church, Schools, Colleges, Clubs, Shops या Government Office में घूमता था, तो उसे हर तरफ अंग्रेज ही दिखाई देते थे। भारतीय और स्थानीय लोग बहुत कम संख्या में थे। उस समय ऐसा माहौल था कि मानो आप भारत में नहीं, बल्कि सीधे England की किसी सड़क पर घूम रहे हों।

सोचिए... आज जिस Mall Road पर लाखों भारतीय पर्यटक घूमते हैं, कभी वहाँ अंग्रेज अफसर, उनकी Memsahibs, बच्चे और सैनिक ही सबसे ज़्यादा नज़र आते थे। नैनीताल की पहचान ही एक English Town के रूप में थी।

Nainital History 1841✅: 
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती क्योकि जब नैनीताल के बारे में स्थानीय लोगों के अलावा लगभग कोई नहीं जानता था, तब अंग्रेजों ने ही इसकी खूबसूरती की चर्चा पूरी दुनिया में फैला दी। British India से लेकर England, Scotland, Poland और यहाँ तक कि USA तक नैनीताल का नाम पहुँच चुका था।

इसी प्रसिद्धि का असर था कि 1858 में USA से आए एक American Missionary ने यहाँ ईसाई धर्म के प्रचार का कार्य शुरू किया। उसी दौर में Methodist Church (1858) और CRST School जैसी संस्थाएँ स्थापित हुईं, जो आज भी उस ऐतिहासिक विरासत की गवाही देती हैं।

यानी आज का नैनीताल सिर्फ झीलों और पहाड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा शहर है जिसने कभी पूरी दुनिया, खासकर British Empire, का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। और यही इतिहास नैनीताल को भारत के सबसे अनोखे शहरों में से एक बनाता है।

Follow Nainital Mania Page for Nainital History ❤️
अंग्रेजो के जमाने का है Grand Hotel✅
Grand Hotel Nainital की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक विरासत इमारतों में से एक है। यह मल्लीताल में नैनीझील के किनारे स्थित है और लगभग 150 वर्ष से भी अधिक समय से पर्यटकों का स्वागत कर रहा है. 

History of the Grand Hotel ✅
1872 में एक अंग्रेज़ Tom Murray ने इस होटल का निर्माण कराया। उस समय यह नैनीताल के शुरुआदा होटलों में से एक था...शुरुआत में इसका नाम The Albion था...बाद में इसका नाम Mayo Hotel रखा गया....लेकिन 1898 में इसका नाम बदलकर The Grand Hotel कर दिया गया, जो आज भी  Grand Hotel के नाम से ही जाना जाता है. 

Pandey Family की Ownership 1933 में Grand Hotel✅
7 अक्टूबर 1933 को कुमाऊँ के प्रसिद्ध पांडे परिवार के Badri Dutt Pandey ने इस होटल को लगभग ₹60,000 (₹20.5 Crore Today) में खरीद लिया.....तब से आज तक यह होटल उसी परिवार की चौथी पीढ़ी द्वारा संचालित किया जा रहा है।

1976 की आग, When a part of the Grand Hotel Caught Fire 🔥
November 1976 में Grand Hotel के एक हिस्से में आग लग गई थी, जिससे लकड़ी का एक पूरा विंग नष्ट हो गया। लेकिन कड़ी मेहनत से उसे उसी सर्दियों में दोबारा बनाया गया और अगले tourist season में होटल फिर से खुल गया।

Famous Guests in Grand Hotel 💐
1.Pandit Jawaharlal Nehru
2. Dilip Kumar
3. Rajesh Khanna
4. Queen of Nepal (in the 1950s)

बताया जाता है कि फिल्म "Kati Patang 1970's" की शूटिंग के दौरान भी इस होटल का उपयोग किया गया था।

Interesting Facts ✅
यह नैनीताल का सबसे पुराना और अंग्रेजो के जमाने से लगातार संचालित (oldest continuously running) होटल माना जाता है....इसकी झील के सामने वाली लोकेशन इसे नैनीताल के सबसे Prestigious Heritage होटलों में शामिल करती है। Grand Hotel अपने Colonial Era की वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।

Follow Nainital Mania Page for more colonial History of the The Nainital.
अंग्रेजो के जमाने का आखिरी नैनीताल, Nainital 1940's ✅

अंग्रेजों ने नैनीताल की अर्थव्यवस्था से लेकर उसके Infrastructure और उसकी modernity तक, हर चीज का ध्यान रखा.
नैनीताल नगर पालिका में बने Clock Tower की कहानी, The story of the clock tower built in Nainital Municipality & History✅: 

दोस्तों 1947 के बाद अर्थात भारत की आजादी के बाद अंग्रेजो ने नैनीताल को छोड़ना शुरू कर दिया था और 3 महीने के अंदर नैनीताल से 99% अंग्रेज़ चले गए थे. अंग्रेजो के चले जाने के बाद नैनीताल में भारतीय संविधान के तहत नैनीताल नगरपालिका का फिर से गठन हुआ.

1950 तक भी अधिकांश लोगो के पास हाथो की घड़िया नहीं हुआ करती थी और नैनीताल के लोग समय देखने के लिए CRST School के clock tower की घडी को देखते थे, इसके अलवा जहाँ जहाँ नैनीताल में ब्रिटिशो की clock tower watch थी वही से वो लोग समय को देखते थे जबकि मल्लीताल के flats जो आजादी के बाद सभी लोगो के आने जाने की प्रमुख जगह थी वहाँ Clock Tower का आभाव था इसीलिए लोगो ने Clock Tower की मांग की और नैनीताल नगरपालिका अध्यक्ष ने सरकारी कोष से पैसा लगाकर England से 4 clock Tower Watch मगाई जिसे आप अभी भी आप देख सकते है.

Nainital Clock Tower Established ✅:
1956 में नगरपालिका का Clock Tower बनकर तैयार हुआ और आज़ादी के बाद के नैनीताल के विकास का प्रमुख गवाह बना...आपको यह भी पता होना चाहिए कि Nainital Nagarpalika की building आज़ादी से पहले AF(I) का institute भी रहा था. 

Nainital Municipal Board History ✅:
दोस्तों नैनीताल नगरपालिका की जो आप building देखते है वो ब्रिटिशकाल के दौरान Municipal Board Office था, जिसे आम बोलचाल में Town Hall भी कहा जाता था...इस बिल्डिंग का निर्माण 3 October 1850 को किया गया था और Mussoorie (मसूरी) के बाद उत्तर भारत के सबसे oldest municipal boards में से एक था..अंग्रेजों ने जब नैनीताल को United Provinces की Summer Capital के रूप में भी इस्तेमाल किया तब  municipal board पर हिल स्टेशन का बुनियादी ढांचा तैयार करने, सड़कों के निर्माण और उच्च स्तर की साफ़-सफाई (sanitation) व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी थी।

Follow Nainital Mania Page for Nainital History
जब चंदो और गोरखाओ का अल्मोड़ा के हवालबाग में युद्ध हुआ 🔥| Chand VS Gorkha Battle | 1790 Mahandra Chand and Gorkha Empire Fight | Chand Vansh | Gorkha Invaded Kumaon & Garhwal | Last Chand Dynasty King <nis:link nis:type=tag nis:id=chandvansh nis:value=chandvansh nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=uttarakhand nis:value=uttarakhand nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=uttarakhandhistory nis:value=UttarakhandHistory nis:enabled=true nis:link/>
क्या हर्षदेव जोशी ने ही कुमाऊ के साथ गद्दारी की? Did Harshdev Joshi betray Kumaon? Harshdev Joshi and Gorkha Shashan in Uttarakhand | Uttarakhand History | Kumaon History
Kumaon में गोरखा शासन और Chand Vansh का पतन | Gorkha Shashan in Uttarakhand <nis:link nis:type=tag nis:id=gorkhashasan nis:value=gorkhashasan nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=history nis:value=history nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=uttarakhand nis:value=Uttarakhand nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=uttarakhandhistory nis:value=uttarakhandhistory nis:enabled=true nis:link/>
जब अंग्रेजो का आखिरी जमाना नैनीताल में चल रहा था, Nainital during 1940's to 1945's (Colonial Era) ✅:

ब्रिटिशकाल के दौरान नैनीताल अपने नाम से जाना जाता था और जाने जाये भी क्यों ना क्योकि अंग्रेजो ने ही तो नैनीताल को खोजा, संवारा और उसको एक महत्वपूर्ण Hill Station बनाया।

अंग्रेजो ने नैनीताल में ब्रिटिश प्रशासन की स्थापना की, नगरपालिका की स्थापना की, कई सारे प्रशासनिक भवनों का निर्माण किया.

ब्रिटिशकाल के दौरान नैनीताल एक शांत, कम भीड़-भाड़ वाला, सभी भौतिक चीजों से संपन्न एक सुंदर शहर था. चारो तरफ अंग्रेजो ने हरियाली का ध्यान रखा था, रोड के किनारे पेड़-पौधे, फूल, यूरोपियन स्टाइल के भवन, रास्ते का निर्माण, Street Light  सभी चीजे अंग्रेजो ने सुव्यस्थित की थी. 

सच में आज जो हम नैनीताल देखते है वो ब्रिटिशकालीन नैनीताल से 80% अलग हो चूका है, क्योंकि दोस्तों अंग्रेजो के जमाने का नैनीताल ऐसा था जिसे नैनीताल कहा जाता था. 

Follow Nainital Mania Page for more Colonial History of Nainital & Uttarakhand History - Nainital Mania
अंग्रेजो के जमाने में नैनीताल में आती थी ऐसी बसे, Nainital during Transportation ✅:

दोस्तों आपको पता है कि Munshi Lalata Prasad Tamta ने Kumaoni Hills Motors (बसों) की स्थापना की. 

Kathgodam से Nainital की ओर मोटर मार्ग बनाए जाने की शुरुआत 1911 में ही हो गई थी और साल 1915 में इसी मार्ग पर कुमाऊं की पहली यातायात सेवा शुरू हुई. इसके 5 साल बाद यानी 1920 में मुंशी लालता प्रसाद टम्टा ने हिल मोटर्स ट्रांसपोर्ट कंपनी की शुरुआत...जहाँ नैनीताल में ऐसी बसे आती थी जो आपने फोटो में देख ली होगी।

उस जमाने में गाड़ियों की speed 18KM से लेकर 30KM तक ही होती थी, जहाँ आगे की सीट गद्दी वाली होती थी और पीछे की लकड़ी के पट्ठे वाली होती थी. जब बस चलती थी जोर जोर से आवाज़ करती थी, गियर बदलने पर गुआ घुआ की आवाज़ करती थी. कई जगह कच्चे रोड थे तो यात्रियों के कपड़े धूल से भर जाते थे.

जो high Class के होते थे वो ब्रिटिश कारो में जाते थे लेकिन जो अन्य होते थे वो बसों में जाते थे, ध्यान रहे कि बसों में बैठना भी बहुत बड़ी बात होती थी क्योकि लोगो को इतना भी पैसा प्राप्त नहीं होता था जो गाड़ियों में बैठ सके. 1980 तक भी लोग बिना गाड़ियों के नैनीताल, भीमताल, हल्द्वानी निकल जाते थे, अंग्रेजो के जमाने की बात तो बहुत दूर की हो गयी.

सच में जिन लोगो ने अंग्रेजो का या आजादी के बाद आये 10 सालो को जिया होगा वो वास्तव में बड़े Legend लोग रहे होंगे 

Follow Nainital Mania Page for more History of Nainital
अंग्रेजो के जमाने में नैनीताल बहुत साफ सुथरा हुआ करता था, Nainital during the  British Era ✅: 

नैनीताल में ब्रिटिश प्रशासन बहुत अच्छा था जिसकी तारीफ वो लोग भी करते थे जिन्होंने ब्रिटिश जमाने को नैनीताल में महसूस किया था. भले ही हम अंग्रेजो के गुलाम थे लेकिन  अंग्रेजो ने Nainital को Non Regulating Provinces के अंदर रखा था, जिससे यहाँ भारत के मैदानी इलाको जैसी कड़े कानून और उस level की गुलामी नहीं होती थी, यहाँ उस समय commissioners शासन चलता था.

अंग्रेजो ने नैनीताल को काफी सुंदर और एक सुव्यस्थित शहर बना कर रखा था जिन्हे गंदगी, भीड़-भाड़ और अवस्थित निर्माण संरचना बिल्कुल पसंद नहीं आती थी, तभी तो नैनीताल को ब्रिटिशकाल के दौरान Golden Days Of Nainital कहा जाता है.

Follow Nainital Mania Page for more Colonial History of Nainital
1955-60 के जमाने का नैनीताल, जब नैनीताल ब्रिटिश छवि में जी रहा था, Nainital during the period of 1955-60 ✅: 

यह 1955 से 1960 का समय था, जिसे नैनीताल का सबसे अच्छा दौर माना जाता है क्योकि तब नैनीताल अपनी रगों में British rule के दौर की संस्कृति और यादों को संजोए हुए था....भारत भले ही आज़ाद हो चुका था, लेकिन इस पर्वतीय नगरी की आबोहवा में अब भी एक अंग्रेजी छवि ज़िंदा थी.

मॉल रोड पर शाम की चहल-पहल, हर दुकानों में English में लिखे हुए दुकानों के नाम, शाम के धुंध में जलतीं पीली बत्तियाँ, और 'नैनी झील' के शांत पानी में तैरतीं ब्रिटिश परदे वाली नावें (Sailing Boats) सब कुछ एक पुराने ब्रिटिशकाल जैसा प्रतीत होता था।

उस दौर में लोग अंग्रेज़ी शिष्टाचार (Etiquette) का पालन करते थे। Nainital clubs में बजता हुआ Western music, Scottish architecture में बने बंगले और अंग्रेज़ी तर्ज़ पर सजे हुए restaurants, नैनीताल को एक अनूठा 'cosmopolitan' रूप देते थे। 

वह 1950-60 का ऐसा समय था जब नैनीताल अपनी भारतीय संस्कृति को गले लगाते हुए भी, अपनी पुरानी ब्रिटिश साख और Elite lifestyle को जीने का शौक़ रखता था..अभी जिनकी उम्र 75 से 90 वर्ष की है उन्होंने नैनीताल का अंग्रेजो द्वारा छोड़ा हुआ दौर जरूर देखा होगा।

Follow Nainital Mania Page for Nainital History - NANITAL MANIA