धरियावद: सन्मार्ग पर चलें, धर्म की प्रभावना करें; आचरण से धर्म की छवि न बिगाड़ें-आचार्य कल्पपुण्यसागर जी महाराज
48 दिवसीय भक्तामर महामंडल विधान आराधना के अंतर्गत 16 कारण पर्व की भावना श्रृंखला में सन्मार्ग प्रभावना भावना पर प्रवचन करते हुए आचार्य कल्पपुण्यसागरजी महाराज ने कहा कि संसार परिभ्रमण से संतप्त आत्मा नाना प्रकार के दुखों से घिरी हुई है। आत्मस्वरूप की पहचान नहीं होने से मनुष्य देह को ही आत्मा मान बैठता है और मिथ्या मार्ग पर भटकता रहता है। सन्मार्ग प्राप्त होन।