बड़ी जेसीबी रुकी, तो छोटी जेसीबी ले आए! आखिर कब बचेगा किशोर सागर तालाब?
छतरपुर का किशोर सागर तालाब आज केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि शहर की पर्यावरणीय धरोहर और आने वाली पीढ़ियों की अमानत है। लेकिन सवाल यह है कि क्या कुछ प्रभावशाली लोगों के स्वार्थ के सामने इस धरोहर का अस्तित्व समाप्त होने दिया जाएगा?
स्थानीय लोगों के अनुसार, तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में लंबे समय से हस्तक्षेप और भराव की शिकायतें सामने आती रही हैं। जब बड़ी मशीनों से काम पर सवाल उठे, मीडिया ने मुद्दा उठाया और जनप्रतिनिधियों ने हस्तक्षेप किया, तब लगा कि शायद तालाब को राहत मिलेगी। लेकिन अब आरोप हैं कि छोटी मशीनों के जरिए वही काम फिर शुरू हो गया है। यदि यह सच है, तो यह केवल नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि कानून और पर्यावरण दोनों को चुनौती देने जैसा है।
सबसे बड़ा सवाल प्रशासन से है—क्या वायरल वीडियो, शिकायतें और जनता की चिंता भी कार्रवाई के लिए पर्याप्त नहीं हैं? यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो जिम्मेदार लोगों पर अब तक कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? कानून केवल आम लोगों के लिए है या प्रभावशाली लोगों के लिए अलग व्यवस्था है?
किशोर सागर तालाब पर हर अवैध हस्तक्षेप केवल मिट्टी का ढेर नहीं, बल्कि शहर के भविष्य पर चोट है। प्रशासन को स्पष्ट करना होगा कि वह तालाब और पर्यावरण संरक्षण के साथ खड़ा है या फिर शिकायतों को अनदेखा करने की परंपरा जारी रहेगी।
जनता का संदेश साफ है—तालाब बचाइए, नियम लागू कीजिए और यदि किसी ने कानून तोड़ा है तो निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई कीजिए। क्योंकि प्रकृति के साथ अन्याय का परिणाम अंततः पूरे समाज को भुगतना पड़ता है।
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