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Jharkhand में NGT रोक के बावजूद बालू की लूट,थाना पुलिस सब लूट में शामिल!
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Jharkhand में NGT रोक के बावजूद बालू की लूट,थाना पुलिस सब लूट में शामिल! #thenewspost #dumka #hazaribagh #NGT #thenewspost #hazaribaghNews #Damodarnews

Jharkhand, India | Jun 27, 2026

बुंदेलखंड में नियमों को निगलती पोकलैंड मशीनें ? एनजीटी के आदेशों की सरेआम 'माइनिंग'

नदियों के अस्तित्व को सहेजने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए बनाए गए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के कड़े नियम और सरकारी दावे धरातल पर कितने खोखले हैं, इसकी बानगी चित्रकूट जिले के राजापुर तहसील के अंतर्गत तीर घुमाई गंगू (खंड संख्या 03) और गडौली बालू खदान की तस्वीरो में आप देख सकते हैं । तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं। 19 जून 2026 की सुबह तीर घुमाई गंगू में ग्रामीणों द्वारा मोबाइल में रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो में जो कुछ दिख रहा है, वह किसी स्वीकृत और सीमित खनन की परिभाषा में नहीं आता, बल्कि यह नदियों के सीने को छलनी करने वाला एक संगठित खेल है।

नदी की जलधारा के बीच पोकलैंड का तांडव

 एनजीटी का स्पष्ट नियम है कि खनन में भारी मशीनों (जैसे पोकलैंड) का उपयोग नदी के पानी या उसके ठीक किनारे पर नहीं किया जा सकता, ताकि जलीय पारिस्थितिकी नष्ट न हो। लेकिन वीडियो में एक नहीं, बल्कि कई भारी पोकलैंड मशीनें सीधे नदी के बहाव क्षेत्र और टापू जैसी जगहों से बालू खोदकर ट्रकों में लोड करती नजर आ रही हैं। वीडियो में एक साथ 15 से 20 भारी ट्रक और डंपर कतार में खड़े दिखाई दे रहे हैं। यह इस बात का सबूत है कि यहां सिर्फ 'सीमित' खनन नहीं हो रहा, बल्कि नदियों का कमर्शियल दोहन बेहद आक्रामक गति से जारी है। मशीनों और ट्रकों को नदी के भीतर तक ले जाने के लिए अवैध रूप से मिट्टी और बालू पाटकर रास्ते (रैंप) बनाए गए हैं, जो नदी के प्राकृतिक प्रवाह को पूरी तरह बाधित करते हैं।

प्रशासन भले ही फाइलों में 'ऑल इज वेल' की रिपोर्ट भेज दे, लेकिन ग्राउंड जीरो से आई ये तस्वीरें चीख-चीख कर कह रही हैं कि नदियों को बचाने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। देखना यह है कि इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या यह खेल यूं ही अनवरत चलता रहेगा ! 

​"दिन का चैन लूटा, रात की नींद उड़ी
चौबीस घंटे जारी है बर्बादी का ये दौर"

​स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस क्षेत्र में तथाकथित 'वैध' पट्टों की आड़ में 24 घंटे अवैध खनन और ओवरलोड परिवहन का नंगा नाच चल रहा है। सूर्यास्त के बाद जहां प्रशासनिक अमला सो जाता है, वहीं इन खदानों में पोकलैंड मशीनों की गड़गड़ाहट और डंपरों की रफ्तार दोगुनी हो जाती है।

​ जलधारा का कत्लेआम 

नदी की मुख्य जलधारा से कम से कम 50 मीटर की दूरी से बालू उठाई जानी चाहिए। लेकिन यहां मुनाफाखोरी के चक्कर में सीधे बहती जलधारा के बीच से बालू निकाली जा रही है। पानी के भीतर बड़े-बड़े गड्ढे कर दिए गए हैं, जिससे नदी का स्वाभाविक बहाव और स्वरूप पूरी तरह विकृत (खराब) हो चुका है। यह आने वाले दिनों में भयंकर जल संकट या अचानक बाढ़ की विभीषिका को न्योता दे रहा है।

चलने लायक नहीं बचीं सड़कें 

​सैकड़ों टन ओवरलोडेड बालू लादकर जब ये डंपर रात-दिन दौड़ते हैं, तो ग्रामीण इलाकों की पक्की सड़कें भी मिट्टी में तब्दील हो जाती हैं।
​सड़कें जगह-जगह से 2 से 3 फीट तक धंस चुकी हैं। ​पूरी सड़क पर सिर्फ गहरे गड्ढे और उड़ती हुई धूल बची है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों का पैदल या बाइक से चलना भी जानलेवा हो चुका है। ​सरकार की 'गड्ढामुक्त सड़क' योजना को ये ओवरलोडेड बालू माफिया हर रोज ठेंगा दिखा रहे हैं।

#mining #bundelkhand #chitrakoot #NGT

बुंदेलखंड में नियमों को निगलती पोकलैंड मशीनें ? एनजीटी के आदेशों की सरेआम 'माइनिंग' नदियों के अस्तित्व को सहेजने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए बनाए गए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के कड़े नियम और सरकारी दावे धरातल पर कितने खोखले हैं, इसकी बानगी चित्रकूट जिले के राजापुर तहसील के अंतर्गत तीर घुमाई गंगू (खंड संख्या 03) और गडौली बालू खदान की तस्वीरो में आप देख सकते हैं । तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं। 19 जून 2026 की सुबह तीर घुमाई गंगू में ग्रामीणों द्वारा मोबाइल में रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो में जो कुछ दिख रहा है, वह किसी स्वीकृत और सीमित खनन की परिभाषा में नहीं आता, बल्कि यह नदियों के सीने को छलनी करने वाला एक संगठित खेल है। नदी की जलधारा के बीच पोकलैंड का तांडव एनजीटी का स्पष्ट नियम है कि खनन में भारी मशीनों (जैसे पोकलैंड) का उपयोग नदी के पानी या उसके ठीक किनारे पर नहीं किया जा सकता, ताकि जलीय पारिस्थितिकी नष्ट न हो। लेकिन वीडियो में एक नहीं, बल्कि कई भारी पोकलैंड मशीनें सीधे नदी के बहाव क्षेत्र और टापू जैसी जगहों से बालू खोदकर ट्रकों में लोड करती नजर आ रही हैं। वीडियो में एक साथ 15 से 20 भारी ट्रक और डंपर कतार में खड़े दिखाई दे रहे हैं। यह इस बात का सबूत है कि यहां सिर्फ 'सीमित' खनन नहीं हो रहा, बल्कि नदियों का कमर्शियल दोहन बेहद आक्रामक गति से जारी है। मशीनों और ट्रकों को नदी के भीतर तक ले जाने के लिए अवैध रूप से मिट्टी और बालू पाटकर रास्ते (रैंप) बनाए गए हैं, जो नदी के प्राकृतिक प्रवाह को पूरी तरह बाधित करते हैं। प्रशासन भले ही फाइलों में 'ऑल इज वेल' की रिपोर्ट भेज दे, लेकिन ग्राउंड जीरो से आई ये तस्वीरें चीख-चीख कर कह रही हैं कि नदियों को बचाने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। देखना यह है कि इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या यह खेल यूं ही अनवरत चलता रहेगा ! ​"दिन का चैन लूटा, रात की नींद उड़ी चौबीस घंटे जारी है बर्बादी का ये दौर" ​स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस क्षेत्र में तथाकथित 'वैध' पट्टों की आड़ में 24 घंटे अवैध खनन और ओवरलोड परिवहन का नंगा नाच चल रहा है। सूर्यास्त के बाद जहां प्रशासनिक अमला सो जाता है, वहीं इन खदानों में पोकलैंड मशीनों की गड़गड़ाहट और डंपरों की रफ्तार दोगुनी हो जाती है। ​ जलधारा का कत्लेआम नदी की मुख्य जलधारा से कम से कम 50 मीटर की दूरी से बालू उठाई जानी चाहिए। लेकिन यहां मुनाफाखोरी के चक्कर में सीधे बहती जलधारा के बीच से बालू निकाली जा रही है। पानी के भीतर बड़े-बड़े गड्ढे कर दिए गए हैं, जिससे नदी का स्वाभाविक बहाव और स्वरूप पूरी तरह विकृत (खराब) हो चुका है। यह आने वाले दिनों में भयंकर जल संकट या अचानक बाढ़ की विभीषिका को न्योता दे रहा है। चलने लायक नहीं बचीं सड़कें ​सैकड़ों टन ओवरलोडेड बालू लादकर जब ये डंपर रात-दिन दौड़ते हैं, तो ग्रामीण इलाकों की पक्की सड़कें भी मिट्टी में तब्दील हो जाती हैं। ​सड़कें जगह-जगह से 2 से 3 फीट तक धंस चुकी हैं। ​पूरी सड़क पर सिर्फ गहरे गड्ढे और उड़ती हुई धूल बची है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों का पैदल या बाइक से चलना भी जानलेवा हो चुका है। ​सरकार की 'गड्ढामुक्त सड़क' योजना को ये ओवरलोडेड बालू माफिया हर रोज ठेंगा दिखा रहे हैं। #mining #bundelkhand #chitrakoot #NGT

Manikpur, Chitrakoot | Jun 20, 2026

-#ऊना --पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ने किया हरोली बल्क ड्रग पार्क का दौरा, बोले- जिस गति से काम होना चाहिए था, नहीं हो रहा....

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Himachal Pradesh, India | Jun 10, 2026

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