*व्यापार मण्डल ने प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन: यूपीआई पर एमडीआर शुल्क वापस लेने की मांग*
जनपद बस्ती, उत्तर प्रदेश 23 सितंबर 2026
*बस्ती।* यूपीआई लेन-देन पर एमडीआर चार्ज लगाए जाने की प्रस्तावित व्यवस्था के विरोध में मंगलवार को बस्ती उद्योग व्यापार मण्डल के पदाधिकारियों ने जिलाध्यक्ष सुनील कुमार गुप्ता के नेतृत्व में जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।
ज्ञापन देने के बाद व्यापार मंडल के चेयरमैन आनंद राजपाल ने कहा कि यूपीआई भुगतान व्यवस्था आज छोटे व्यापारियों से लेकर आम जनता तक के लिए आसान और सुविधाजनक माध्यम बन चुकी है। ऐसे में यूपीआई लेन-देन पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने से व्यापारियों और ग्राहकों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।
संयोजक सूर्य कुमार शुक्ल ने कहा कि सरकार द्वारा डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया गया है और यूपीआई ने व्यापार को सरल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एमडीआर चार्ज लागू होने से छोटे दुकानदारों और व्यापारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री से व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की।
*सरकार का नया नियम है:*
- *₹2000 तक का कोई चार्ज नहीं।*
- *₹2000 से ऊपर* के दुकानदार (P2M) पेमेंट पर ही *0.4% MDR* लगेगा।
- ये पैसा ग्राहक से नहीं, *दुकानदार के बैंक को जाएगा।*
- ₹5000 पर ₹20, ₹10,000 पर ₹40 और ₹75,000 से ऊपर अधिकतम *₹300 कैप* है।
- छोटा व्यापारी जो महीने में ₹1 लाख तक UPI लेता है और ग्रामीण क्षेत्र का व्यापारी पूरी तरह *छूट* में है।
- ये नियम *15 अक्टूबर 2026 से* लागू होना है। 2a72c4a01edfdf42
*व्यापार मण्डल ने प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन: यूपीआई पर एमडीआर शुल्क वापस लेने की मांग*
व्यापार मंडल के चेयरमैन आनंद राजपाल ने कहा कि यूपीआई आज छोटे व्यापारियों के लिए आसान माध्यम है। 2000 रुपये से ऊपर के लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क की बात से व्यापारियों में भ्रम है।
*नई व्यवस्था क्या है और नुकसान क्या होगा?*
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 2000 रुपये तक का यूपीआई भुगतान पहले की तरह पूरी तरह फ्री रहेगा और व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) को भेजा गया पैसा चाहे जितना भी हो, उस पर कोई चार्ज नहीं है।
चार्ज सिर्फ दुकान पर 2000 रुपये से ऊपर के भुगतान पर है। जैसे 3000 रुपये पर 12 रुपये, 5000 रुपये पर 20 रुपये और 75 हजार से ऊपर अधिकतम 300 रुपये ही कटेगा। यह पैसा ग्राहक से नहीं, दुकानदार के खाते से बैंक काटेगा।
व्यापारियों का कहना है कि भले ही ग्राहक से सीधे न कटे, लेकिन आखिर में बोझ व्यापारी पर ही आएगा। छोटे दुकानदार का मार्जिन 5-10 प्रतिशत ही है, उसमें से 0.4 प्रतिशत देना घाटे का सौदा है। इससे कई दुकानदार 2000 से ऊपर का यूपीआई लेने से मना करने लगेंगे और ग्राहक से कहेंगे कि 2 बार में 1000-1000 करके पेमेंट करो या कैश लाओ। इससे डिजिटल इंडिया अभियान को झटका लगेगा और ग्राहक-दुकानदार में रोज विवाद बढ़ेगा। इसीलिए व्यापार मण्डल ने मांग की है कि इस व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए और छोटे व्यापारियों को पूरी छूट दी जाए।
इससे दूसरा बड़ा नुकसान यह होगा कि व्यापारी फिर से ग्राहकों से कहने लगेंगे कि "कैश लाओ, यूपीआई नहीं लेंगे"। इससे नकदी का चलन फिर बढ़ेगा, काला धन बढ़ेगा और सरकार का डिजिटल भुगतान का पूरा अभियान फेल हो सकता है। आम ग्राहक को भी सामान महंगा मिलेगा क्योंकि दुकानदार वह शुल्क ग्राहक से वसूलने लगेगा। कुल मिलाकर यह फैसला डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए उल्टा कदम साबित होगा।
ज्ञापन देने वालों में महामंत्री रंजीत श्रीवास्तव, नगर अध्यक्ष प्रभात सोनी ‘आर्यन’ आशुतोष पाण्डेय, कृपाशंकर त्रिपाठी, गौरव साहू, नन्दकिशोर कसौधन, दिनेश जायसवाल, कमल जायसवाल, अरविन्द चौधरी, घनश्याम कसेरा, विजय श्रीवास्तव, अनिल कसौधन, शिवम कुमार, सुद्दू, सौरभ गुप्ता, भोला गुप्ता, ओम प्रकाश आर्य, रामजी कसौधन, भागवत बरनवाल, बैजनाथ अग्रहरी, अदालत प्रसाद, उमर खान, रवि कुमार, नीरज गुप्ता,ओम प्रकाश चौधरी ,लालजी सिंह ,रामकृष्ण सोनी ,राजन गुप्ता ,प्रहलाद मोदी शेष नारायण गुप्ता, राजेंद्र प्रसाद कौशल, बृजकिशोर कसौधन, राजेंद्र कौसधन, हिमांशु गुप्ता, मनोज गुप्ता सहित बड़ी संख्या में व्यापारीगण शामिल रहे।
संवाददाता हरी ओम प्रकाश
राष्ट्रीय हिंदी दैनिक कौटिल्य का भारत
Basti, Basti | Sep 23, 2026